
संवाददाता
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले प्रदेश की राजनीति में हलचल शुरू हो गई है. खबर सामने आ रही है कि पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी से दिल्ली में मुलाकात की और INDIA गठबंधन में शामिल हो गए है. यूपी जैसे राज्य में ओबीसी वोटरों को लुभाने के लिए कांग्रेस ये दांव खेल सकती है.
सपा से निकलने के बाद स्वामी प्रसाद मौर्य अभी ‘अपनी जनता पार्टी’ बनाकर राजनीति की. हालांकि यूपी की राजनीति में अब उनका पहले जैसा आधार नहीं रहा है. स्वामी प्रसाद मौर्य अकसर बयानों के कारण विवादों में भी रहे हैं.
ओबीसी राजनीति में बड़ा नाम
स्वामी प्रसाद मौर्या उत्तर प्रदेश की राजनीति का एक बेहद प्रभावशाली और चर्चित ओबीसी चेहरा रहे हैं. उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत जनता दल से की थी और बाद में बहुजन समाज पार्टी में लंबे समय तक रहे. 2016 में वे बसपा छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए और योगी आदित्यनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री (श्रम एवं सेवायोजन) बने. 2022 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उन्होंने बीजेपी छोड़कर समाजवादी पार्टी का दामन थामा. सपा में कुछ समय तक विधान परिषद सदस्य रहने और मतभेदों के चलते उन्होंने बाद में सपा से भी इस्तीफा देकर अपनी नई पार्टी ‘राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी’ बनाई थी.
कांग्रेस की रणनीति में फिट बैठ रहे
उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में अभी कांग्रेस के पास कोई ओबीसी चेहरा नहीं है. स्वामी प्रसाद मौर्य पुराने नेता हैं और उनके पूरे यूपी में कई इलाकों में प्रभाव है, जिसका फायदा कांग्रेस पार्टी उठाना चाहेगी. कांग्रेस के यूपी प्रभारी के रूप में राजेन्द्र पाल गौतम एससी वर्ग से आते हैं. अब आराधना मिश्रा मोना सवर्ण हैं तो पिछड़ी जाति के लिए मौर्य बेहतर साबित हो सकते हैं. कुछ जानकार उनके जल्द कांग्रेस में शामिल होने का दावा कर रहे हैं.



