
संवाददाता
नई दिल्ली। दिल्ली सरकार के बहुचर्चित 650 करोड़ रुपये के मेडिकल उपकरण खरीद घोटाले में भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (ACB) को एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है. इस मामले के मुख्य आरोपी और लंबे समय से फरार चल रहे राजीव कुमार रंगीला ने आखिरकार एसीबी के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया. इसके तुरंत बाद एजेंसी ने उसे औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया. शुक्रवार को अदालत ने आरोपी को चार दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है, जिससे घोटाले से जुड़े कई अन्य अहम खुलासे होने की उम्मीद जताई जा रही है.
लुकआउट सर्कुलर और भगोड़ा घोषित होने का दबाव
एसीबी अधिकारियों के मुताबिक, राजीव रंगीला की गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे थे. उसके खिलाफ पहले ही लुकआउट सर्कुलर जारी किया जा चुका था. एसीबी की टीमों ने उसकी तलाश में एनसीआर और उत्तराखंड के कई ठिकानों पर महीनों तक छापेमारी की थी, लेकिन वह चकमा देकर अमेरिका भाग निकला था. बढ़ते कानूनी शिकंजे और अदालत द्वारा भगोड़ा घोषित किए जाने के बाद, जब एजेंसी ने अक्टूबर के पहले हफ्ते में उसकी संपत्तियों को कुर्क या जब्त करने की कानूनी प्रक्रिया तेज की, तो रंगीला पर दबाव बढ़ गया और उसने आत्मसमर्पण कर दिया.
फर्जी कंपनियों का जाल और घरेलू सहायकों के नाम पर ओनरशिप
जांच में खुलासा हुआ है कि पूर्वी दिल्ली के रहने वाले राजीव रंगीला ने इस घोटाले को अंजाम देने के लिए कई शेल (फर्जी) कंपनियां बना रखी थीं. इन कागजी कंपनियों के असली मालिक साधारण लोग थे, जिन्हें दस्तावेजों में घरेलू सहायक या चाय बेचने वाले के रूप में दिखाया गया था। इन फर्जी कंपनियों में प्रमुख नाम शामिल हैं. एफ मेड डिवाइसेज, टेक्नोक्रेट्स, राजश्री, आशी सर्जिकल एंड फार्मास्यूटिकल्स, एम साहिब एंड संस प्राइवेट लिमिटेड है.
स्वास्थ्य सेवा निदेशालय और टेंडर में धांधली
जांच एजेंसी एसीबी के मुताबिक, राजीव रंगीला ने स्वास्थ्य विभाग और सीपीए के तत्कालीन एचओओ डॉ. विनोद कुमार रंगा और डॉ. वत्सला अग्रवाल के साथ सांठ-गांठ कर सरकारी खरीद के तय पोर्टल (जेम) के नियमों को दरकिनार किया. उसने कई फर्जी शेल कंपनियां बनाकर टेंडर प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर हेरफेर की. आरोप है कि लगभग 10 से 15 लाख रुपये में मिलने वाली पोर्टेबल एक्स-रे मशीनों और मेडिकल उपकरणों को दिल्ली सरकार के अस्पतालों के लिए 33 से 38 लाख रुपये प्रति मशीन के हिसाब से आपूर्ति किया गया. घोटाले से अर्जित धन को छिपाने के लिए अपने रिश्तेदारों और जान-पहचान वालों के करीब 100 से अधिक बैंक खातों में भारी रकम ट्रांसफर की गई. इससे पहले रंगीला की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी और उसके विदेश भागने की आशंका के चलते इंटरपोल की भी मदद ली जा रही थी. अब 4 दिन की रिमांड के दौरान एसीबी आरोपी को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ करेगी, गायब सरकारी फाइलों का पता लगाएगी और मनी ट्रेल से जुड़े अन्य सरकारी अधिकारियों व साझीदारों के नेटवर्क का पर्दाफाश करेगी.
राजनीतिक कनेक्शन और संपत्तियों की तलाश
जांच में यह भी सामने आया है कि राजीव रंगीला ने साल 2014 में हरियाणा के करनाल से निर्दलीय विधानसभा चुनाव भी लड़ा था, हालांकि उसे हार का सामना करना पड़ा था. फिलहाल, एसीबी उसकी रिमांड के दौरान पूछताछ कर रही है ताकि दिल्ली, हरियाणा और उत्तराखंड में फैले उसकी अवैध संपत्तियों और इस नेटवर्क में शामिल अन्य चेहरों का पूरा कच्चा-चिट्ठा खंगाला जा सके.



