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राज्यसभा के लिए सपा का तीसरा कैंडिडेट कौन? चौधरी रूद्रसेन, सलीम शेरवानी या अरविंद सिंह गोप

दाे सीटाें के लिए चाचा राम गोपाल यादव और पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन के नाम का ऐलान पहले ही हाे गया हैं.

संवाददाता

लखनऊ । उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए 16 अक्टूबर को मतदान होना है. इसमें से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) 7 और समाजवादी पार्टी (सपा) 2 सीट पर आसानी से जीत दर्ज कर सकती है. लड़ाई अब 10वीं सीट को लेकर है. सूत्रों का कहना है कि अखिलेश यादव ने 10वीं सीट के लिए अपना प्रत्याशी उतारने का फैसला कर लिया है. कई नामों की चर्चा है, जिसमें गुर्जर नेता चौधरी रूद्रसेन, पूर्व सांसद सलीम शेरवानी और पूर्व मंत्री अरविंद सिंह गोप शामिल हैं.

दाे सीटाें के लिए नाम का ऐलान पहले ही हाे गया हैं.

रामगोपाल यादव और आलोक रंजन होंगे सपा के राज्यसभा उम्मीदवार, तीसरे नाम पर भी हुई चर्चा

दो सीटों के लिए अखिलेश यादव ने प्रत्याशियों का ऐलान कर दिया है. चाचा राम गोपाल यादव और पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन के नाम का ऐलान सपा विधायकों के सामने कर दिया गया है. वहीं, तीसरी सीट के दावेदारों से अखिलेश ने साफ कह दिया है कि अगर आप विधायक लाते हैं तो आप कैंडिडेट बन जाइए… यानी सपा के पास जितने अतिरिक्त विधायक बच रहे हैं, उनसे इतर अगर दूसरे दलों के विधायकों से क्रॉस वोटिंग कराने की हिम्मत रखने वाले नेता को राज्यसभा का टिकट दिया जाएगा.

क्या है राज्यसभा का गणित

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश की विधानसभा में कुल 403 सीटें हैं, लेकिन इस समय 6 सीटें खाली हैं. यानी राज्यसभा चुनाव के लिए प्रभावी विधायक संख्या 397 है. इसी 397 की संख्या के आधार पर राज्यसभा की 10 सीटों का चुनाव होगा. मतलब एक उम्मीदवार को जीत के लिए 37 प्रथम वरीयता वोट चाहिए. BJP के पास 256 विधायक हैं. BJP के सहयोगी दलों को जोड़ें तो NDA की संख्या 292 तक पहुंचती है.

बीजेपी के फेवर में नंबर

इसके अलावा जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के दो विधायकों के समर्थन को जोड़कर NDA का आंकड़ा 294 बताया गया है.अब 294 को 37 के कोटे से जोड़कर देखिए. 259 वोट से सात सीट आसानी से जीत सकते हैं, लेकिन आठवीं सीट के लिए 296 वोट चाहिए. यानी 294 के आंकड़े के साथ BJP-NDA को आठवीं सीट के लिए महज 2 वोट का अंतर रह जाता है. हालांकि, सपा के 101 में से 4 विधायकों ने पिछली बार बीजेपी के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की थी.

सपा का गणित

सपा के पास विधानसभा में 101 विधायक हैं. कांग्रेस के दो विधायक भी सपा के साथ हैं. यानी सपा-कांग्रेस ब्लॉक का आंकड़ा 103 बताया जा रहा है. 37 वोट से एक सीट… 74 वोट से दूसरी सीट… यानी दो सीटों के लिए चाहिए 74 वोट. सपा-कांग्रेस के पास 103 विधायक हैं. इसका मतलब दो सीटें निकालने के बाद 29 वोट बचेंगे. यही वजह है कि तीसरे उम्मीदवार के लिए सपा को अतिरिक्त समर्थन जुटाने की जरूरत होगी.

ये 8 वोट कहां से आएंगे?

सपा के सामने चुनौती दोहरी है. पिछली बार क्रॉस वोटिंग करने वाले विधायकों को अपने पाले रखने के साथ ही 8 विधायक का अतिरिक्त समर्थन चाहिए. RLD के पास करीब 3 विधायक और SBSP के 4 विधायक सपा के संपर्क में बताए जा रहे हैं. अखिलेश ने तीसरी सीट के लिए दावेदारी कर रहे नेताओं से साफ कह दिया कि अगर वह सीट के लिए जितने विधायक चाहिए हैं, उतना आंकड़ा साम-दाम-दंड-भेद से इकट्ठा कर पाते हैं तो वह ही कैंडिडेट होंगे.

दावेदारी में सबसे आगे सलीम शेरवानी

सपा के मुस्लिम चेहरों में से एक सलीम शेरवानी का नाम दावेदारों की लिस्ट में सबसे आगे है. पांच बार के सांसद सलीम शेरवानी, केंद्र की गुजराल सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं. पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान वह बदायूं से टिकट चाह रहे थे, लेकिन ऐन वक्त पर अखिलेश ने उनका टिकट काटकर आदित्य यादव को प्रत्याशी बना दिया था. इसके बाद सलीम शेरवानी के नाराज होने की खबर आई थी, हालांकि अखिलेश ने बाद में उन्हें मना लिया था.

गुर्जर नेता रूद्रसेन चौधरी के नाम की भी चर्चा

पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय तक प्रभाव रखने वाले चौधरी यशपाल सिंह की राजनीतिक विरासत को उनके बेटे चौधरी रुद्रसेन और चौधरी इंद्रसेन आगे बढ़ा रहे हैं. रुद्रसेन ने 2012 में गंगोह विधानसभा सीट से सपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था.. हालांकि चुनाव हार गए थे. दिसंबर 2017 में उन्हें सपा ने सहारनपुर जिलाध्यक्ष बनाया. बाद में पार्टी संगठन में उनकी जिम्मेदारी बढ़ी और 2023 में उन्हें सपा का राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया. वह बड़े गुर्जर नेता हैं.

अरविंद सिंह गोप लड़ सकते हैं चुनाव

सबसे चौंकाने वाला नाम अरविंद सिंह गोप का है. समाजवादी पार्टी (सपा) के सीनियर नेता और पूर्व मंत्री अरविंद सिंह गोप की गिनती अखिलेश यादव के करीबी नेताओं में होती है. सूत्रों का कहना है कि अखिलेश ने अरविंद सिंह गोप के नाम पर विचार किया है. इसके पीछे दो कारण हैं. अरविंद सिंह गोप को राजा भैया की पार्टी का समर्थन मिल सकता है. साथ ही सपा से बागी हुए विधायकों के साथ भी अरविंद सिंह गोप के अच्छे रिश्ते हैं. ऐसे में अरविंद सिंह गोप पर दांव लगाया जा सकता है.

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