latest-newsदेश

ज्ञानेश कुमार पर बिखर गया इंडी गठबंधन, धरी रह गई राहुल गांधी और ममता बनर्जी की उम्मीदें

संवाददाता

नई दिल्ली । संसद के मॉनसून सत्र में राहुल गांधी की अगुवाई में लगभग पूरा विपक्ष एकजुट दिखने की कोशिश कर रहा था. छात्रों का मुद्दा हो चाहे अयोध्या के राम मंदिर में दान चोरी का मामला, हर मोर्चे पर बचाखुचा विपक्ष एकजुट नजर आया. 37 सांसदों की ताकत वाली समाजवादी पार्टी और उसके मुखिया अखिलेश यादव तो हर मौके पर राहुल गांधी के साथ कदमताल मिलाते नजर आए. सदन की कार्यवाही ना चलने देने की बात हो चाहे संसद परिसर में किसी मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन करने की हर बार पूरा विपक्ष एक ही लाइन पर दिखा, लेकिन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर चल रहे विवाद पर पूरा विपक्ष बिखरा है.

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर बिखरा दिख रहा विपक्ष

एक अंग्रेजी अखबार में चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू के हवाले से खबर प्रकाशित हुई कि मुख्य चुनाव आयुक्त कई मामलों में अपनी मन मर्जी से फैसले लेते रहे हैं. यह खबर सामने आने के बाद कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, आरजेडी, वामदलों के तमाम घटक दल, तृणमूल कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, डीएमके समेत तमाम विपक्षी पार्टियों सड़कों पर उतरी हुई हैं. ये लगातार ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं. इन तमाम प्रदर्शन को देखकर पहली नजर में तो यही लग रहा है कि ज्ञानेश कुमार के मसले पर पूरा विपक्ष एकजुट है. लेकिन जरा ध्यान से इन प्रदर्शनों पर नजर डालेंगे तो कुछ और ही तस्वीर देखने को मिल रही है.

दरअसल, ये बात तो सही है कि ज्ञानेश कुमार के मुख्य चुनाव आयुक्त पद से इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी खेमे में शामिल राजनीतिक दल विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन ये सभी अकेले अकेले कर रही हैं. गौर करने वाली बात यह है कि चुनावी राज्यों में भी तमाम दलों के विपक्षी दलों के प्रदर्शन अलग-अलग हैं. उदाहरण के लिए उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव है. लगातार कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के नेताओं की तरफ से यह बात क्लियर तौर पर कहा जा रहा है कि दोनों पार्टियां गठबंधन में 2027 का चुनाव लड़ेंगे. इसके बावजूद ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर दोनों पार्टियां अलग-अलग प्रदर्शन कर रही हैं. यही हाल बिहार में है. यहां कांग्रेस, आरजेडी, माले, वीआईपी चारो दल अलग-अलग प्रदर्शन करते देखे जा रहे हैं. महाराष्ट्र में भी यही हाल देखा जा रहा है.

पश्चिम बंगाल का विधानसभा चुनाव हारने के बाद इंडी गठबंधन को लेकर गंभीरता दिखाने वाली ममता बनर्जी की पार्टी का भी यही हाल है. एक तरफ नंदीग्राम उपचुनाव में ममता बनर्जी ने कांग्रेस के प्रत्याशी को समर्थन देने का ऐलान की हैं, दूसरी तरफ ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने में टीएमसी और कांग्रेस अलग अलग आयोजन कर रही है.

30 सितंबर को इंडी में रफ्फू से पहले अखिलेश ने दिया गच्चा

इंडी गठबंधन में साफ तौर पर बिखराव दिखने के बाद ममता बनर्जी इसमें रफ्फू करने के प्रयास में जुट गई हैं. दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में 30 सितंबर को इंडी गठबंधन की बैठक बुलाई गई है. ममता बनर्जी ने कहा है कि उन्होंने राहुल गांधी से इस बारे में बात की है. बताया जा रहा है कि ममता बनर्जी इस प्रयास में हैं कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश और उनके कार्यकाल में हुए विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ एकजुटता दिखाई जाए, जिससे सरकार पर चुनाव आयोग जैसी संस्था की विश्वसनीयता को बनाए रखने का दबाव बन सके.

इंडी गठबंधन की इस बैठक में किन दलों के बड़े नेता पहुंचेंगे इस बार में अब तक कोई ठोस जानकारी नहीं है. लेकिन समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि वह इंडी गठबंधन की बैठक में नहीं जा रहे हैं. उन्होंने साफ तौर पर कहा कि जिन मुद्दों पर इंडी गठबंधन के मंच पर चर्चा होनी है उनकी पार्टी की तरफ से दूसरे नेता जाएंगे. अखिलेश यादव ने दोहराया कि उस दिन उनका कोई और कार्यक्रम है.

आखिर में सवाल यही उठता है कि कांग्रेस और अखिलेश यादव सरीखे नेता, जिन्हें की कुछ ही महीनों के बाद गठबंधन में विधानसभा चुनाव लड़ना है, लेकिन उन्हें ज्ञानेश कुमार जैसे मुद्दों पर बात रखने के लिए समय नहीं है. 2029 का लोकसभा चुनाव होने में अभी समय है, लेकिन उससे पहले उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में विपक्षी दलों में इस तरह की लड़ाई देखी जा रही है कि भला कोई दूसरा क्या कहे. जरा सोचकर देखिए कि अगर तमाम विपक्षी दल एक ही बैनर के नीचे होकर ज्ञानेश कुमार का विरोध करते तो भला उसका केंद्र सरकार पर कितना बड़ा इंपैक्ट होता.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com