
संवाददाता
नई दिल्ली। कड़क आवाज, बेबाक अंदाज और जानदार एक्टिंग से दर्शकों के दिलों पर राज करने वाले सिनेमा के ‘शेरदिल’ नाना पाटेकर अब हमारे बीच नहीं हैं. नाना पाटेकर का निधन गोवा के डोना पाउला स्थित उनके घर पर हुआ है. बॉलीवुड के दिग्गज एक्टर नाना पाटेकर के अचानक चले जाने से पूरा सिनेमा जगत गहरे सदमे में है. मनोरंजन से खेल और राजनीति से बिजनेस जगत के लोग एक्टर के निधन पर भारी दुख व्यक्त कर रहे हैं.

नाना पाटेकर का निधन 75 साल की उम्र में कार्डियक अटैक से हुआ है. उन्हें बीती 8 अक्टूबर तड़के मणिपाल हॉस्पिटल ले जाया गया था. वहां ऑन्कोलॉजी डिपार्टमेंट के हेड डॉ. शेखर सालकर ने एक्टर को लेकर चौंकाने वाला खुलासा किया है. डॉक्टर ने पूरा वाकया बताने के साथ-साथ बताया है कि एक्टर ने सीने में दर्द उठने पर अपने एक दोस्त को मैसेज किया था.
डॉक्टर ने क्या-क्या बताया ?
मणिपाल हॉस्पिटल के ऑन्कोलॉजी डिपार्टमेंट के हेड डॉ. शेखर सालकर ने बताया, ‘नाना पाटेकर को अस्पताल में करीब तड़के 4.30 बजे मृत अवस्था में लाया गया था… सुबह 5:30 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया गया. हमने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन उन्हें मृत ही लाया गया था. लगभग 45 मिनट से एक घंटे तक कार्डियक मसाज दी गई, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका. हमें जो याद है, उनके अनुसार, लगभग रात 2:30 बजे उन्होंने अपने दोस्त को मैसेज भेजा था कि उनकी तबीयत ठीक नहीं है’.
डॉक्टर ने आगे बताया, ‘लेकिन रात का समय होने के कारण उनका दोस्त मैसेज नहीं देख पाया. इसलिए उन्होंने उसे फोन किया. वह लगभग 4 बजे उनके घर पहुंचा. तब तक उन्हें पसीना आ रहा था और उनकी हालत खराब थी. उन्होंने उन्हें संभाला और जरूरी शुरुआती मदद दी, लेकिन वह धीरे-धीरे बेहोश हो रहे थे, इसलिए उन्होंने उसके केयरटेकर को अस्पताल भेजा..
डॉक्टर ने आगे कहा, ‘जब हमारी टीम वहां पहुंची, तो उन्होंने कार्डियक मसाज शुरू कर दी क्योंकि वह बिल्कुल भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रहे थे… वे उन्हें सुबह करीब 4:20 या 4:30 बजे हमारे अस्पताल लाए थे. हमने भी पूरी कोशिश की, लेकिन अस्पताल पहुंचने तक उनकी मौत हो चुकी थी. फिर हमें पुलिस केस दर्ज करना पड़ा क्योंकि यह एक MLC (मेडिको-लीगल केस) का मामला था. अब शव को पोस्टमार्टम के लिए गोवा मेडिकल कॉलेज ले जाया गया है. उनके परिवार वाले वहां नहीं थे. उनके साथ उनके दोस्त और एक केयरटेकर थे.

बता दें, नाना पाटेकर ने साल 1978 में आई फिल्म गमन से हिंदी सिनेमा में कदम रखा था. इसके बाद एक्टर ने फिर कभी रुकने का नाम नहीं लिया. जिस फिल्म में नाना होते थे, लोग सिर्फ उनकी एक्टिंग और डायलॉग के लिए देखा करते थे. उनकी बेहतरीन फिल्मों की लिस्ट बहुत लंबी है. उनकी बेहद शानदार फिल्मों में सलाम बॉम्बे, परिंदा, प्रहार: द फाइनल अटैक, तिरंगा, क्रांतिवीर, अग्नी साक्षी, यशवंत, अब तक छप्पन, अपहरण, फिर हेरा फेरी, वेलकम, राजनीति, गदर 2 है. उन्हें आखिरी मौजूदा साल में दो फिल्में ओ’रोमियो और सुबेदार में देखा गया था.
देर रात, अकेलापन और… वो चूक, जिसकी वजह से चली गई नाना पाटेकर की जान
नाना पाटेकर के निधन ने हर किसी को झकझोर दिया है. 75 साल के इस दिग्गज अभिनेता ने गोवा स्थित अपने घर में आखिरी सांस ली. लेकिन उनकी मौत से पहले के कुछ घंटे अब सबसे ज्यादा चर्चा में हैं. वजह है एक ऐसा मैसेज, जो नाना ने रात करीब 2:30 बजे अपने दोस्त को भेजा था. उन्होंने बताया था कि उनकी तबीयत ठीक नहीं लग रही और शरीर के बाईं तरफ दर्द हो रहा है.
रात होने की वजह से दोस्त उस मैसेज को तुरंत नहीं देख पाए. जब तक उन्हें इसकी जानकारी मिली और वह नाना के घर पहुंचे, तब तक हालत काफी बिगड़ चुकी थी. डॉक्टर शेखर सालकर के मुताबिक, नाना पाटेकर ने रात करीब 2:30 बजे अपने दोस्त को मैसेज किया था. इसमें उन्होंने असहज महसूस होने और बाईं तरफ दर्द की शिकायत की थी.
“अच्छा नहीं लग रहा है “
नाना पाटेकर के आखिरी घंटों की यह कहानी सबसे ज्यादा इसलिए भावुक करती है क्योंकि उन्होंने खुद महसूस किया था कि कुछ ठीक नहीं है. उन्होंने मदद के लिए अपने दोस्त को मैसेज भी किया. एक्टर ने लिखा था, “अच्छा नहीं लग रहा है”, लेकिन रात के उस वक्त मैसेज तुरंत नहीं देखा जा सका.
उस वक्त नाना गोवा में अकेले थे और उनके साथ एक केयरटेकर मौजूद था. बाद में जब उनके दोस्त ने मैसेज देखा तो नाना से संपर्क करने की कोशिश की और उनके घर की तरफ रवाना हुए. करीब डेढ़ घंटे बाद दोस्त जब उनके पास पहुंचे, तब तक हालात बेहद गंभीर हो चुके थे.
सुबह तक बिगड़ चुकी थी हालत
करीब 4 बजे जब दोस्त एक्टर के घर पहुंचे, तो वहां का मंजर परेशान करने वाला था. रिपोर्ट के मुताबिक, नाना पसीने से लथपथ थे और उन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही थी. उनकी हालत धीरे-धीरे बिगड़ रही थी. इसके बाद केयरटेकर को अस्पताल की ओर भेजा गया और एंबुलेंस बुलाने की प्रक्रिया शुरू हुई. यहीं से नाना की जिंदगी बचाने की कोशिश तेज हुई. लेकिन वक्त तेजी से हाथ से निकल चुका था.
एंबुलेंस पहुंची तो बेहोश थे नाना
डॉक्टरों के मुताबिक, जब एंबुलेंस की टीम नाना के घर पहुंची, तब वह पूरी तरह बेहोश हो चुके थे और कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रहे थे. उन्हें घर से ही CPR देना शुरू किया गया. इसके बाद करीब 4:20 बजे उन्हें अस्पताल लाया गया. अस्पताल में भी डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट तक उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ. अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि उन्हें कार्डियक अरेस्ट आने की आशंका थी. हालांकि, मौत की सटीक वजह की पुष्टि के लिए पोस्टमार्टम की प्रक्रिया की गई.
नाना पाटेकर ने अपने आकस्मिक निधन से महज तीन दिन पहले गोवा में एक सामाजिक कार्यक्रम में कहा था कि हर किसी को एक दिन जाना है और ‘‘पता नहीं मैं कल यहां रहूंगा या नहीं।’’ तब शायद किसी ने नहीं सोचा था कि वह आज हमारे बीच नहीं होंगे.
पाटेकर ने चार अक्टूबर को गोवा में पणजी के निकट डोना पाउला में आयोजित ‘सम्राट क्लब इंटरनेशनल’ के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही थी. इस दौरान उन्होंने अपने मित्र और गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत मनोहर पर्रिकर को भी याद किया था.
पाटेकर ने कहा था, ‘‘हम सभी को एक दिन जाना है. पता नहीं मैं कल यहां रहूंगा या नहीं। यह समय हर किसी के जीवन में आता है. लेकिन वह समय आने से पहले हमें यह सोचना चाहिए कि क्या मैं वह कर पा रहा हूं जो मैं करना चाहता हूं? क्या मैंने प्रयास किया है?’’



