
संवाददाता
नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 अक्टूबर 2026 को विकसित भारत के लक्ष्य को लेकर देश को ‘हम करके रहेंगे’ ‘We Will Do It’ का नया नारा दिया। जनसेवा में 25 साल पूरे होने के मौके पर नई दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में आयोजित ‘विकसित भारत संकल्प सभा’ में उन्होंने देशवासियों से ‘विकसित भारत’ के सपने को सच करने का आह्वान किया। स्टेडियम में मौजूद हजारों कार्यकर्ताओं और देशवासियों के साथ ‘हम करके रहेंगे’ ‘We Will Do It’ नारे को दोहराते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित बनाना, देश को दुनिया की टॉप 3 इकोनॉमी में शामिल करना, आत्मनिर्भर भारत का निर्माण, ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनना और अंतरिक्ष से लेकर ओलंपिक्स तक भारत का परचम लहराना अब केवल एक सपना नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों का मजबूत संकल्प है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 25 वर्षों का जनविश्वास उनके लिए बड़ी पूंजी है, जो उन्हें और अधिक ऊर्जा के साथ काम करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि देशवासियों ने उन्हें जो जिम्मेदारी सौंपी है, उसे वे और अधिक समर्पण के साथ निभाना चाहते हैं। उनके लिए जनता-जनार्दन ईश्वर का रूप है और देश के हर नागरिक का उन पर सबसे बड़ा हक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अब आराम करने का समय नहीं है, बल्कि पूरे जोश और सामूहिक ऊर्जा के साथ देश के लिए खुद को खपा देने का वक्त है। यह सफर किसी व्यक्तिगत उपलब्धि का नहीं, बल्कि जनता के विश्वास, कार्यकर्ताओं की मेहनत और देश की सेवा के संकल्प का परिणाम है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 25 वर्षों का जनविश्वास उनके लिए बड़ी पूंजी है, जो उन्हें और अधिक ऊर्जा के साथ काम करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि देशवासियों ने उन्हें जो जिम्मेदारी सौंपी है, उसे वे और अधिक समर्पण के साथ निभाना चाहते हैं। उनके लिए जनता-जनार्दन ईश्वर का रूप है और देश के हर नागरिक का उन पर सबसे बड़ा हक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अब आराम करने का समय नहीं है, बल्कि पूरे जोश और सामूहिक ऊर्जा के साथ देश के लिए खुद को खपा देने का वक्त है। यह सफर किसी व्यक्तिगत उपलब्धि का नहीं, बल्कि जनता के विश्वास, कार्यकर्ताओं की मेहनत और देश की सेवा के संकल्प का परिणाम है।
प्रधानमंत्री ने अपने अनुभवों का जिक्र करते हुए कहा कि सफलता ने उन्हें विनम्र होना सिखाया, असफलताओं ने दोबारा खड़े होने की ताकत दी और आलोचनाओं ने आत्ममंथन का मौका दिया। विरोध ने उन्हें लोकतंत्र की शक्ति समझाई, जबकि संकटों ने उनके धैर्य की परीक्षा ली। जीवन की कोई भी घटना व्यर्थ नहीं गई और हर अनुभव ने उन्हें कुछ न कुछ सिखाया। मोरबी की बाढ़, भुज का भूकंप, चंद्रयान की यात्रा और कोरोना महामारी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इन घटनाओं ने उन्हें सेवा, पुनर्निर्माण, असफलता से उबरने और सामूहिक प्रयास की अहमियत समझाई। उन्होंने स्वयंसेवकों की निःस्वार्थ सेवा को नमन करते हुए कहा कि उनका जीवन किसी पद या महत्वाकांक्षा के लिए नहीं, बल्कि एक मिशन के लिए समर्पित रहा है।
पीएम मोदी ने कहा कि कर्म ही उनका धर्म है और देश के लिए लगातार काम करते रहना उनकी साधना है। पद, प्रतिष्ठा और अधिकार से ज्यादा महत्वपूर्ण देश की सेवा है। इन 25 वर्षों का वास्तविक मूल्यांकन इस बात से होना चाहिए कि देश कहां पहुंचा है, न कि कोई व्यक्ति कहां पहुंचा। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में अपने अनुभवों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि जनता को साथ लेकर फैसले करना, नीतियां बनाना और उन्हें जमीन पर लागू करना ही विकास की असली राह है।
2014 से पहले और बाद के भारत की तुलना करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि एक समय देश की अर्थव्यवस्था को लेकर निराशा जताई जाती थी, लेकिन अब भारत संकटों से उबरने की अपनी क्षमता के लिए जाना जाता है। जहां पहले ‘पॉलिसी पैरालिसिस’ की चर्चा होती थी, वहीं अब ‘रिफॉर्म्स एक्सप्रेस’ की बात होती है। पीएम मोदी ने बताया कि 2015 से 2025 का दशक कृषि विकास के लिहाज से ऐतिहासिक रहा है। उन्होंने कहा कि सुशासन का आधार ‘सबका साथ, सबका विकास’ है। सरकारी योजनाओं का लाभ हर पात्र व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। विकास का फायदा किसी जाति, समुदाय या वर्ग तक सीमित नहीं रहना चाहिए और कोई भी पात्र लाभार्थी छूटना नहीं चाहिए।

उन्होंने कहा कि भारत को अब छोटे लक्ष्य नहीं रखने चाहिए। हमें 2047 तक विकसित भारत बनाने, दुनिया की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने और गरीबी मिटाने जैसे बड़े लक्ष्यों पर फोकस करना होगा। भारत को पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल, मनोरंजन, इनोवेशन और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में वैश्विक पहचान दिलानी होगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना है और एक दिन दुनिया ‘मेड इन इंडिया’ विमान की भी चर्चा करेगी। उन्होंने युवाओं से इस ऐतिहासिक अवसर को पहचानने और देश के विकास में योगदान देने की अपील की।

पीएम मोदी ने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य दूर जरूर दिख सकता है, लेकिन इतिहास साक्षी है कि सामूहिक इच्छाशक्ति से असंभव काम भी पूरे होते हैं। 100 साल पहले गुलामी के दौर में भी भारतीयों ने आजादी की लड़ाई लड़ी थी, तो आज 140 करोड़ देशवासी मिलकर 2047 तक विकसित भारत का सपना क्यों नहीं पूरा कर सकते? संबोधन के अंत में पीएम मोदी ने कहा कि भारत के सामने चुनौतियां जरूर हैं, लेकिन देश के पास 140 करोड़ समाधान भी हैं। उन्होंने देशवासियों से ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना के साथ काम करने और अपने कर्तव्यों को पूरी निष्ठा से निभाने का आह्वान किया। उन्होंने एक बार फिर संकल्प दोहराया कि ‘हम करके रहेंगे… We Will Do It!’



