
संवाददाता
गाजियाबाद। केंद्र में आवास व शहरी मामलों के मंत्रालय द्वारा आदर्श स्वच्छ शहर बनाने के लिए उत्तर प्रदेश के छह जिलों को शामिल किया है, इसमें गाजियाबाद शामिल नहीं है।
इससे पहले आवास व शहरी मामलों के मंत्रालय ने 2016 में स्मार्ट सिटी मिशन की शुरुआत की थी, इसमें भी गाजियाबाद को शामिल नहीं किया गया। दिल्ली के करीब होने और 50 लाख की आबादी का जिला होने के बाद भी गाजियाबाद का नाम इस सूची में शामिल न होने से लोगों में मायूसी है।
छह प्रमुख शहरों को मिली जगह
अयोध्या, मथुरा, वाराणसी व प्रयागराज आध्यात्मिक शहरों में गिने जाते हैं। अयोध्या में प्रभु श्रीराम की जन्मस्थली पर राम मंदिर बना है। मथुरा भगवान कृष्ण की नगरी है। वाराणसी महादेव की नगरी है। प्रयागराज में गंगा, यमुना, सरस्वती का संगम होता है और इसे संगम नगरी के नाम से जाना जाता है।
माना जा रहा है कि इसकी वजह से ही प्रारंभिक चरण में उत्तर प्रदेश के इन प्रमुख शहरों को चुना गया है। आगरा में ताजमहल बना है, जिसे देखने देश – विदेश के पर्यटक आते हैं। लखनऊ ऐतिहासिक विरासत को संजोए हुए है और प्रदेश की राजधानी है।
आध्यात्मिक महत्व के बावजूद नाम नहीं
गाजियाबाद की बात करें तो इस शहर का आध्यात्मिक और पौराणिक महत्व है। भगवान दूधेश्वरनाथ का विख्यात मंदिर होने के कारण गाजियाबाद को दूधेश्वर नगरी कहा जाता है। इस जिले की पहचान उत्तर प्रदेश के प्रवेश द्वार के रूप में भी होती है।
यहां रहने वाले लोगों का मानना है कि गाजियाबाद भी यदि आदर्श स्वच्छ शहर की सूची में सम्मिलित होता तो निश्चित तौर पर शहर में सफाई व्यवस्था बेहतर होती और गंदगी से निजात मिलती।
जिलाधिकारी – रविंद्र कुमार मांदड़ के मुताबिक आदर्श स्वच्छ शहर में किस आधार पर शहरों को शामिल किया गया है, इसकी जानकारी नहीं है। जिन शहरों को शामिल किया गया है, वहां पर टूरिस्ट अधिक आते हैं। गाजियाबाद को गाजियाबाद के लोगों की मदद से आदर्श स्वच्छ शहर बनाने के लिए प्रयास किया जाएगा, लोग जागरूक होंगे तो शहर में स्वच्छता को बढ़ावा मिलेगा।



