latest-newsदेश

SIR प्रॉसेस पर उठे सवालों पर चुनाव आयोग की दो टूक- सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों चुनाव आयुक्त ने 14 बार आपत्तियां की थीं.

संवाददाता

नई दिल्ली। चुनाव आयोग ने आज बुधवार को एसआईआर प्रक्रिया पर मतभेद को लेकर बयान दिया है. अंग्रेजी के एक नेशनल डेली अख़बार की रिपोर्ट में हुए खुलासे के बाद हंगामा शुरू हो गया है. इन सबके बीच चुनाव आयोग ने भी अपनी सफाई पेश की है. आयोग ने कहा कि पूरे देश में वोटर लिस्ट के स्पेशल पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े अपने सभी फैसलों पर शुरू से ही एकमत था.

चुनाव आयोग ने दावा करते हुए कहा कि SIR समेत सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए, जिनमें दोनों चुनाव आयुक्तों और मुख्य चुनाव आयुक्त की मंजूरी ली गई थी. छपी रिपोर्ट्स के मुताबिक एसआईआर प्रॉसेस के दौरान दोनों चुनाव आयुक्तों ने अपनी-अपनी आपत्तियां दर्ज कराई थीं. दोनों आयुक्तों ने करीब 10 महीनों में 14 बार ये आपत्तियां कीं. बता दें, चुनाव आयोग के सभी बड़े फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्त के पैनल मिलकर करते हैं. दो चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने ये सभी आपत्तियां जताई थीं.

सवालों के जवाब में अधिकारियों ने कहा कि दोनों आयुक्तों ने वोटर डेटाबेस को संभालने के दौरान अलग-अलग राज्यों में नाम हटाने से जुड़े फैसलों पर ध्यान दिलाया था. अधिकारियों ने कहा कि चुनाव आयोग के कामकाज को कंट्रोल करने वाला कानून और सुप्रीम कोर्ट का फैसला इस बात पर जोर देता है कि जितना हो सके, फैसले एकमत से लिए जाने चाहिए और अगर जरूरत हो, तो ज्यादातर लोगों की राय को माना जाना चाहिए.

इंडियन एक्सप्रेस ने रिपोर्ट किया कि तीन मेंबर वाले इलेक्शन कमीशन (EC) में ही इलेक्टोरल रोल के SIR से जुड़े मामलों पर तीन में से दो इलेक्शन कमिश्नर, संधू और जोशी ने बार-बार सवाल उठाए. वहीं, मामले को तूल पकड़ता देख विपक्षी दलों ने भी प्रतिक्रिया देनी शुरू कर दी है. बता दें, विपक्षी पार्टियों ने SIR को लेकर चुनाव आयोग की आलोचना की है और दावा किया है कि इसका मकसद उन वोटर्स को टारगेट करना है जो बीजेपी और उसके सहयोगियों से जुड़े नहीं हैं.

मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस की तरफ से पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने तीखी प्रतिक्रिया करते हुए कहा कि आज दोपहर में इस पर विस्तार से चर्चा की जाएगी. जयराम रमेश ने चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार पर ECI की क्रेडिबिलिटी और इंटीग्रिटी को खत्म करने का आरोप लगाया. इस साल की शुरुआत में सेक्रेटरी जनरल को चीफ इलेक्शन कमिश्नर को हटाने के लिए 73 विपक्षी राज्यसभा सांसदों के नए नोटिस ऑफ मोशन का जिक्र करते हुए, सीनियर कांग्रेस लीडर ने सोशल मीडिया ‘एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि यह 24 अप्रैल, 2026 की बात है. यह अभी भी राज्यसभा के चेयरमैन के पास पेंडिंग है. इसे स्थगित नहीं किया गया है.

इसी तरह राज्यसभा सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि पांच महीने पहले, 60+ राज्यसभा सांसद (50 चाहिए) ने CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए चेयरमैन सभापति को लिखा था. दो इलेक्शन कमिश्नरों ने CEC के कई कामों पर आपत्ति जताई थी, अब RS मोशन लाने का समय आ गया है.

वहीं, आम आदमी पार्टी (AAP) के सीनियर लीडर सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि चीफ इलेक्शन कमिश्नर का बर्ताव एक नासमझ बीजेपी बूथ एजेंट जैसा है. चीफ इलेक्शन कमिश्नर पर हमला करते हुए उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा कि जब मैं ECI में ज्ञानेश कुमार से मिला, तो उनका बर्ताव एक नासमझ बीजेपी बूथ एजेंट जैसा था. हर सवाल पर, वह बेमतलब की सफाई देकर हम पर पलटवार करते थे. बाकी दो इलेक्शन कमिश्नर लगातार सिर हिला रहे थे. BJP बूथ एजेंट जब पुलिस के आस-पास होते हैं (उन्हें पिटाई से बचाने के लिए) तो वे भी वैसा ही बर्ताव करते हैं.

अभी SIR का तीसरा चरण 16 राज्यों और दिल्ली समेत तीन केंद्र शासित प्रदेशों में जारी है. इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मिजोरम, ओडिशा, मणिपुर, आंध्र प्रदेश, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, चंडीगढ़, पंजाब, कर्नाटक, नागालैंड, झारखंड, त्रिपुरा, महाराष्ट्र और मेघालय शामिल हैं. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र बचाने के लिए चीफ इलेक्शन कमिश्नर के खिलाफ महाभियोग लाना जरूरी है.

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com