
संवाददाता
गाजियाबाद। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) एक बार फिर वित्तीय और कानूनी पेंच में फंसता नजर आ रहा है. आम लोगों और फ्लैट खरीदारों के हक में यूपी रेरा और जिला उपभोक्ता फोरम के फैसले आने के बाद भी उन्हें उनका पैसा नहीं मिल पा रहा है. वजह यह है कि जीडीए के बैंक खाते कुर्क किए जा चुके हैं, लेकिन खातों से भुगतान पर रोक लगी हुई है.
मामला अब इतना बढ़ गया है कि गाजियाबाद के जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मंदर ने जीडीए उपाध्यक्ष को कड़ा पत्र भेजकर अंतिम चेतावनी दी है. प्रशासन ने साफ कहा है कि या तो बकाया रकम जल्द जमा की जाए या फिर किसी सक्षम अदालत से स्टे ऑर्डर पेश किया जाए. ऐसा नहीं होने पर कुर्क बैंक खातों से नियमानुसार रकम निकालकर भुगतान की कार्रवाई की जा सकती है.
34 मामलों में 6.34 करोड़ से ज्यादा की देनदारी
जानकारी के मुताबिक, यूपी रेरा के वर्ष 2021 से जुड़े 28 रिकवरी नोटिस अभी लंबित हैं. इनकी कुल रकम 6.07 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है. वहीं, जिला उपभोक्ता फोरम के वर्ष 2024-25 के 9 मामले भी लंबित हैं, जिनमें करीब 26.95 लाख रुपये की रकम शामिल है. कुल मिलाकर करीब 34 मामलों में जीडीए पर 6.34 करोड़ रुपये से ज्यादा की देनदारी बताई गई है. इन मामलों में कई खरीदारों ने प्रोजेक्ट में देरी और दूसरी समस्याओं को लेकर रेरा और उपभोक्ता फोरम का रुख किया था. संबंधित संस्थाओं ने ग्राहकों के पक्ष में फैसला देते हुए GDA को रिफंड और मुआवजा देने के आदेश दिए.
खाते में पैसा, लेकिन पीड़ितों के हाथ खाली



