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भाजपा को टक्कर देने के उन्हीं के पैंतरे इस्तेमाल कर रहे अखिलेश

संवाददाता

गाजियाबाद । विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर भाजपा ने अपनी तैयारी पहले से ही शुरू कर रखी है और जो प्रदेश की टीम बनी है उसकी झलक भी 2027 चुनाव के आसपास ही है। वहीं समाजवादी पार्टी भी इस बार भाजपा के रास्ते पर ही चल रही है। वो भी उम्मीदवारों के बारे में पहले से ही सर्वे करा रही है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कई सीटों पर सपा ने दो बार सर्वे करा लिया है। अब तीसरा सर्वे होने जा रहा है। सूत्रों पर भरोसा करें तो इस बार समाजवादी पार्टी यादव-मुस्लिमों से ज्यादा अन्य जातियों केे लोगों को मैदान में उतारने की तैयारी में है। कई ऐसी विधानसभाएं हैं जो विशेष जाति की बाहुल्य सीट है लेकिन वहां भी इस बार समाजवादी पार्टी अलग से उम्मीदवार उतारना चाहती है।

दरअसल, अगर इस बार सपा सत्ता में नहीं आयी तो फिर उसकी स्थिति काफी दयनीय हो जाएगी। हालांकि लोकसभा चुनाव के बाद जिस तरह से समाजवादी पार्टी ने जीत दर्ज करायी थी और देश की तीसरी बड़ी पार्टी बनी है उसके बाद से सपा के प्रति एक माहौल बना था क्योंकि अगर 2024 के लोकसभा चुनाव पर नजर डालें तो समाजवादी पार्टी ने सवा तीन सौ विधानसभाओं पर एक तरह से जीत हासिल की थी। लेकिन बीच में पश्चिम बंगाल में जिस तरह भाजपा की जीत हुई और उसके बाद टीएमसी में टूट हो गई इससे जो उत्साह था उसमें नि:संदेह कमी आयी है और भाजपा के प्रति माहौल और मजबूत हुआ है। हालांकि राजनीतिक गलियारों चर्चा है कि राम मंदिर चढ़ावे को लेकर भी कहीं ना कहीं भाजपा के माहौल में थोड़ी बहुत कमी आयी है क्योंकि जिस भगवान श्रीराम के सहारे भाजपा सत्ता में आयी है उसी भगवान के नाम पर चोरी होना लोगों को हजम नहीं हो रहा है। ये देश आस्था वालों का देश है और जो लोग आस्था से खिलवाड़ करते हैं फिर उनसे सबक भी लिया जाता है। आस्था से खिलवाड़ के कारण ही सपा और कांग्रेस सत्ता से दूर है।

अब देखना है कि राम मंदिर चढ़ावे को लेकर किस तरह भाजपा अपने आप को चुनावी मौसम में कितना संभालती है। वहीं गाजियाबाद, नोएडा, मेरठ, बुलंदशहर, हापुड़, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर मंडल में समाजवादी पार्टी बहुत ही मजबूती के साथ चुनाव लडऩे की तैयारी में है। पिछले विधानसभा चुनाव में सपा और रालोद का गठबंधन था उसके काफी अच्छे परिणाम भी सामने आये। अब रालोद एनडीए में शामिल हो गई है इसलिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सपा और रालोद दोनों के लिए 2022 वाला माहौल नहीं है। इस बार रालोद और सपा दोनों को नुकसान हो सकता है। क्योंकि भाजपा के साथ रालोद को जाने पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जाट समाज भी रालोद से खुश नहीं है।

वहीं पिछली बार जाट, मुस्लिम यादव का समीकरण बना था उसके अच्छे परिणाम आये थे। सूत्र बताते हैं कि इस बार समाजवादी पार्टी टिकट वितरण में बहुत ही सावधानी बरत रही है। गाजियाबाद की सीटों पर किस उम्मीदवार को उतारा जाए इसका सर्वे भी अंदरखाने हो रहा है। हालांकि शहर सीट पर कई दावेदार हैं उसके बाद भी सपा सर्वे के बाद ही कोई फैसला लेगी। सूत्र बताते हैं कि समाजवादी पार्टी और कांगे्रस के बीच गठबंधन लगभग तय है। दोनों मिलकर ही चुनाव लड़ेंगे।

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