
संवाददाता
काठमांडू। नेपाल में बालेन शाह की अगुवाई में बनी नई सरकार को अभी एक महीना भी पूरा नहीं हुआ है, लेकिन शुरुआती दौर में ही दो मंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया है। गृहमंत्री सूदन गुरुंग मनी लॉन्ड्रिंग केस में लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शन के बाद इस्तीफा दे दिया। इससे बालेन सरकार की भ्रष्टाचार मुक्त साफ सुथरी छवि और नई पीढ़ी की राजनीति करने के दावे पर बट्टा लगा है।
श्रम मंत्री दीपक कुमार साह पर गलत तरीके से अपनी पत्नी को हेल्थ इंश्योरेंस बोर्ड में शामिल करने के आरोप लगे। इसके बाद उनसे इस्तीफा ले लिया गया। दूसरा आरोप गृहमंत्री सुदन गुरुंग पर मनी लॉन्ड्रिंग का लगा। उनके इस्तीफे की माँग को लेकर विपक्ष ने विरोध प्रदर्शन किया। अब उन्हें इस्तीफा देना पड़ा है।
शिक्षा मंत्री पोखरेल को उनके पदभार ग्रहण करने के तुरंत बाद नीतिगत निर्णयों और विरोधाभासी बयानों के कारण आलोचना का सामना करना पड़ा। उन्होंने अचानक कोचिंग संस्थानों पर प्रतिबंध लगा दिया, लेकिन पढ़ाई की व्यवस्था नहीं की। इससे छात्रों और अभिभावकों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
अच्छा शासन, पारदर्शिता और साफ-सुथरी राजनीति का वादा करके सत्ता में आई बालेन सरकार के लिए ये शुभ लक्षण नहीं हैं। 2025 में Gen Z आंदोलन ने नेपाल की राजनीतिक व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन कर दिया था। उस आंदोलन की उपज बालेन शाह जब सत्ता में आए, तो जनता को उनसे काफी उम्मीदें थीं।
100 दिन के एक्शन प्लान के तहत उन्होंने सबसे पहले ‘छात्र राजनीति’ पर प्रतिबंध लगा दिया। इससे Gen Z सकते में है। कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन भी कर रहे हैं। भारतीय बॉर्डर पर भंसार नीति लागू कर नेपाली 100 रुपए से अधिक के सामानों पर कस्टम ड्यूटी लगा दी। इससे खिलाफ सीमावर्ती क्षेत्र में जनता सड़कों पर हैं। नीतियों को लेकर विवाद के साथ-साथ अब नेताओं की छवि भी धुमिल हो रही है।
गृहमंत्री का मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप के बाद इस्तीफा
जिस भ्रष्टाचार के खिलाफ Gen Z ने विद्रोह किया था। केपी ओली की सरकार को उखाड़ फेंका था। उस भ्रष्टाचार का दीमक एक महीने में ही बालेन सरकार को लग गया है। प्रधानमंत्री बालेन शाह के कैबिनेट के अहम सदस्य गृहमंत्री सूदन गुरुंग मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में फँस गए। उन पर इस्तीफा देने का राजनीतिक दबाव था। जनता भी शक कर रही है। इसलिए बालेन शाह सरकार ने गृहमंत्री से इस्तीफा ले लिया। हालाँकि गृहमंत्री गुरुंग का दावा है कि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया है। वे जाँच कराए जाने का समर्थन करेंगे और पार्टी का फैसला मानेंगे।
गृह मंत्री सूदन गुरुंग नेपाल के सबसे प्रभावशाली नेताओं में एक हैं। जेन जी आंदोलन के दौरान सितंबर 2025 में उन्होंने हामी नेपाली नाम से एनजीओ के माध्यम से सुर्खियाँ बटोरी और अपनी सफलता को चुनाव में भुनाने में कामयाब रहे। लेकिन उनकी दिन दुनी रात चौगुनी बढ़ रही संपत्ति पर जनता का ध्यान गया और उन पर वित्तीय अनियमितता के आरोप लगे।
काठमांडू पोस्ट के मुताबिक, गृहमंत्री सूदन गुरुंग और बिजनेसमैन दीपक कुमार भट्ट की कंपनियों के बीच संदिग्ध लेन-देन हुए। गुरुंग की दो कंपनियों लिबर्टी माइक्रो लाइफ इश्योरेंस और स्टार माइक्रो इंश्योरेंस में 25-25 हजार शेयर खरीदे थे। ये कंपनियाँ दीपक भट्ट और जगदंबा ग्रुप की हैं। इसके अलावा समय समय पर अलग अलग लोगों ने उनके खाते में काफी पैसे जमा कराए। रिपोर्ट के मुताबिक 2024 में संजय सर्विसेज सेंटर प्राइवेट लिमिटेड ने 10 लाख रुपए और फिर 1.25 करोड़ रुपए जमा किए।
सूडान के खाते में 37 लाख रुपये जमा करने वाले बिजय कुमार श्रेष्ठ की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है। लिबर्टी माइक्रो लाइफ इंश्योरेंस और स्टार माइक्रो इंश्योरेंस में शेयर खरीदने के लिए इस्तेमाल किए गए धन के स्रोत को लेकर विवाद के बाद, गृह मंत्री गुरुंग ने दावा किया है कि उन्होंने ऋण के माध्यम से शेयर हासिल किए थे।
सूदन गुरुंग ने हालाँकि खुद पर लगे आरोपों को सिरे से नकार दिया। द हिमालयन टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने दो कंपनियों में निवेश की बात मानी है। संपत्ति छिपाने के आरोप पर उनका कहना है कि 2 करोड़ रुपए से अधिक के निवेश की बात उन्होंने सार्वजनिक की थी। उनका निवेश पारदर्शी है और निवेश के वर्गीकरण में गलती हुई है। उनकी मंशा कुछ भी छिपाने की नहीं है।
विपक्ष का विरोध प्रदर्शन
गृहमंत्री सूदन गुरुंग के इस्तीफे की माँग को लेकर विपक्ष सड़कों पर उतर गई। नेपाली कॉन्ग्रेस ने निष्पक्ष जाँच की माँग करते हुए इस्तीफा देने को कहा। पार्टी का कहना है कि सरकार होम मिनिस्टर के खिलाफ सभी आरोपों की तुरंत एक स्वतंत्र, निष्पक्ष और हाई-लेवल जाँच शुरू करे। इस मामले को टालने, प्रभावित करने या छिपाने की कोशिश न की जाए।
वहीं CPN-UML ने गुरुंग से जुड़े सभी मामलों की जाँच के लिए एक हाई-लेवल जाँच कमेटी बनाने की माँग की है। साथ ही संगठन का कहना है कि ये जाँच तुरंत शुरू की जाए और इसमें किसी तरह की दखलंदाजी नहीं होनी चाहिए। किसी तरह की लीपापोती न की जाए। सोशल मीडिया पर भी गृह मंत्री को लेकर लोगों की कड़ी प्रतिक्रिया सामने आ रही है। इसमें कहा जा रहा है कि लोगों के खून-पसीने की कमाई को लूटने की इजाजत नहीं दी जा सकती है। दरअसल गृहमंत्री ने खुद के खिलाफ मीडिया ट्रायल और सुनियोजित तरीके से अफवाह फैलाने का आरोप लगाया था, जिसके बाद लोगों का गुस्सा फूट गया।



