
संवाददाता
नई दिल्ली । कांग्रेस ने शुक्रवार को पार्टी नेताओं राजेंद्र पाल गौतम और संजय दत्त को उत्तर प्रदेश और हरियाणा के लिए एआईसीसी का प्रभारी बनाया. राजेंद्र पाल गौतम ने उत्तर प्रदेश में अविनाश पांडे की जगह ली, जबकि दत्त ने हरियाणा में पार्टी के वरिष्ठ नेता हरिप्रसाद की जगह ली. वहीं, हरिप्रसाद को अब कर्नाटक कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया.
पीटीआई न्यूज के अनुसार कांग्रेस ने एक बयान में कहा कि उसने अजय कुमार लल्लू की जगह लालजी देसाई को ओडिशा का नया AICC इंचार्ज भी बनाया है AICC के ऑर्गनाइजेशन जनरल सेक्रेटरी के सी वेणुगोपाल ने बयान में कहा, “पार्टी जाने वाले जनरल सेक्रेटरी/इंचार्ज – अविनाश पांडे, बी के हरिप्रसाद और अजय कुमार लल्लू के योगदान की तारीफ करती है.”
एक और बयान में, कांग्रेस ने लालजी देसाई की जगह बी वी श्रीनिवास को कांग्रेस सेवा दल का नया चीफ ऑर्गेनाइजर बनाने की घोषणा की, जो तुरंत प्रभाव से लागू होगा.
अविनाश पांडेय की जगह राजेंद्र गौतम पाल को जिम्मेदारी
राजेंद्र पाल गौतम पहले दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार में मंत्री रह चुके हैं. बाद में उन्होंने आम आदमी पार्टी छोड़कर कांग्रेस का दामन थामा, कांग्रेस ने उन्हें अनुसूचित जाति विभाग का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया. पिछले कुछ महीनों से वह उत्तर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं. इसी दौरान उन्होंने लखनऊ में बसपा प्रमुख मायावती से मुलाकात की कोशिश भी की थी, हालांकि यह मुलाकात नहीं हो सकी.
कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश के प्रभारी पद पर बड़ा बदलाव करते हुए अविनाश पांडेय की जगह राजेंद्र पाल गौतम को नियुक्त किया है. अविनाश पांडेय को दिसंबर 2023 में लोकसभा चुनाव 2024 की तैयारियों के लिए यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी. अब पार्टी ने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए संगठन में यह बदलाव किया है.
दलित समीकरण साधने की कोशिश
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव केवल संगठनात्मक नहीं, बल्कि सामाजिक और चुनावी रणनीति का भी हिस्सा है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय सवर्ण समुदाय से आते हैं. ऐसे में दलित चेहरे राजेंद्र पाल गौतम को प्रभारी बनाकर कांग्रेस सामाजिक संतुलन और दलित वोट बैंक को साधने की कोशिश करती दिख रही है.
राहुल गांधी लगातार जातिगत जनगणना और “जिसकी जितनी आबादी, उसकी उतनी हिस्सेदारी” का मुद्दा उठाते रहे हैं. ऐसे में उत्तर प्रदेश जैसे अहम राज्य में राजेंद्र पाल गौतम की नियुक्ति को कांग्रेस की इसी राजनीतिक रणनीति का विस्तार माना जा रहा है. अब निगाहें इस बात पर होंगी कि 2027 के विधानसभा चुनाव में यह दांव पार्टी को कितना राजनीतिक लाभ दिला पाता है.



