
नरेन्द्र भल्ला
नयी दिल्ली, 25 जून। देश की आंतरिक सुरक्षा के लिये प्राइवेट सिक्योरिटी के महत्व पर जोर देते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने आज सभी राज्यों को निर्देश दिया है कि निजी सुरक्षा एजेंसियों के लाइसेंस संबंधित शिकायतों का समाधान तीन महीने के भीतर हर हाल में किया जाये। गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव (पुलिस आधुनिकीकरण) आर.प्रसन्ना ने गुरुवार को दिल्ली में हुई संयुक्त कार्यशाला में राज्यों से आये अधिकारियों से कहा कि प्राइवेट सिक्योरटी एजेंसी को दिए जाने वाले लाइसेंस को प्राथमिकता के तौर पर लिया जाये। नया लाइसेंस तय समय-सीमा के भीतर जारी किया जाये और नवीनीकरण के लिये जो पेंडिंग मामले में हैं,उनके निपटान में भी कोई कोताही न बरती जाये।

गृह मंत्रालय के नेतृत्व में इस कार्यशाला का आयोजन सेंट्रल एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट सिक्योरिटी इंडस्ट्री (केप्सी) और फिक्की समेत पांच संगठनों ने संयुक्त रुप से किया था। मकसद यह था कि निजी सुरक्षा सेक्टर में जो समस्याएं हैं,उनका समाधान मौके पर ही किया जाये। गौरतलब है कि इस मुद्दे पर केप्सी के चेयरमैन कुंवर विक्रम सिंह और जनरल सेक्रेटरी महेश चंद्र शर्मा ने पिछले कुछ महीनों में संयुक्त सचिव के साथ कई बैठकें की थीं और उनके सुझाव पर ही गृह मंत्रालय ने ऐसी कार्यशाला के लिये अपनी सहमति दी,ताकि सभी हितधारकों को आमने-सामने बैठाकर समाधान खोजा जाये। साल 2005 में पसारा कानून बनने के बाद ऐसा पहली बार हुआ है,जब केंद्र ने इस तरह की अनूठी पहल की है। इसीलिये गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों की कंट्रोलिंग अथॉरिटी से जुड़े अधिकारियों को इसमें तलब किया था,ताकि वे निजी सुरक्षा एजेंसियों के संचालकों की शिकायतों/सुझावों को अपने सामने सुनें और उसका समाधान निकालें।
आर.प्रसन्ना ने गुजरात व पंजाब के पुलिस महानिदेशक समेत करीब डेढ़ दर्जन राज्यों के अधिकारियों से बारी-बारी से हर शिकायत पर जवाब तलब करते हुए जोर दिया कि निजी सुरक्षा के मुद्दे को हल्के में न लिया जाए। इस इंडस्ट्री को पेश आ रही दिक्कतों को दूर करने के लिये कंट्रोलिंग अथॉरिटी के नोडल ऑफिसर प्राइवेट सिक्योरटी एसोसिएशन के प्रतिनिधियों के साथ निरंतर बैठक करें।इस कॉन्फ्रेंस में देश भर से प्राइवेट सिक्योरटी इंडस्ट्री के चार सौ से भी अधिक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
केप्सी के चेयरमैन कुंवर विक्रम सिंह ने कहा कि “पसारा कानून” को लागू हुए दो दशक बीत चुके हैं और इस दौरान इस सेक्टर ने बड़ी तेजी से प्रगति की है,जिसका नतीजा है कि आज 35 हजार रजिस्टर्ड एजेंसियों में एक करोड़ गार्ड कार्यरत हैं। आंतरिक सुरक्षा के लिये यह बेहद महत्वपूर्ण फ़ोर्स है। उन्होंने मौजूदा कानून में संशोधन करने का सुझाव देते हुए कहा कि “वन नेशन-वन लाइसेंस”होना चाहिये, ताकि हमें हर राज्य के लिए अलग-लाइसेंस न लेना पड़े। फ़िलहाल महाराष्ट्र व दिल्ली में लाइसेंस के पेंडिंग मामले सबसे अधिक हैं।
इस अवसर पर गृह मंत्रालय की उप सचिव आईएएस कृति गर्ग ने स्लाइड प्रेजेंटेशन के जरिये विस्तार से बताया कि प्राइवेट सिक्योरिटी सेक्टर से अब तक क्या-क्या शिकायतें/सुझाव मिले हैं और उस पर मंत्रालय ने क्या कार्रवाई की है। उन्होंने बताया कि इस मसले पर अब हम राज्यवार मॉनिटरिंग कर रहे हैं,ताकि इनके निपटान में कोई देरी न हो।
सिक्युरिटी इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों नेलाइसेंस नवीनीकरण के लिए हर बार पुलिस सत्यापन करने और ऑफिस बदलने पर नये सिरे से लाइसेंस लेने के नियम को गैरजरुरी बताते हुए इसे खत्म करने का सुझाव दिया गया। निजी सुरक्षा संचालकों की तरफ से दिये गए कई सुझावों पर अपनी सहमति जताते हुए प्रसन्ना ने आश्वस्त किया कि इसके लिए जल्द ही फ्रेम वर्क तैयार किया जायेगा।
निजी सुरक्षा के महत्व को रेखांकित करते हुए प्रसन्ना ने बताया कि इसी विषय पर केंद्रीय गृह सचिव 2 जुलाई को सभी राज्यों के मुख्य सचिव व पुलिस महानिदेशक के साथ बैठक करेंगे। उल्लेखनीय है कि मोदी सरकार एयरपोर्ट्स और अन्य सार्वजनिक संस्थानों समेत धार्मिक स्थलों की सुरक्षा में तैनात सीआईएसएफ का उपयोग आंतरिक सुरक्षा के लिए करने पर विचार कर रही है। उसके स्थान पर प्रशिक्षित प्राइवेट सिक्योरटी गार्ड्स को यह जिम्मा देने की योजना का पुख़्ता खाका तैयार किया जा रहा है।



