
संवाददाता
चंडीगढ । आम आदमी पार्टी की सियासत में इन दिनों सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। जिन नेताओं ने अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में राजनीति की नई शुरुआत का सपना देखा था, उनमें से कई अब पार्टी से किनारा कर रहे हैं। आप को छोड़कर जाने वाले नेताओं की कड़ी में अब पंजाब के तीन विधायकों का नाम जुड़ा है। पहले राघव चड्डा समेत 7 सांसदों ने आप से किनारा कर भाजपा का दामन थाम लिया था। आप को टाटा कहने वाले नेताओं में कुछ भाजपा का दामन थाम रहे हैं तो कुछ दूसरे राजनीतिक विकल्प तलाश रहे हैं। आखिर इसकी वजह क्या है? जब एक ही दल के कई प्रमुख चेहरे लगातार बाहर निकलने लगें तो उसके पीछे के कारणों की पड़ताल जरूरी हो जाती है।

आम आदमी पार्टी इस समय ऐसे ही सवालों से घिरी दिखाई दे रही है। पार्टी छोड़ने वाले नेताओं के फैसलों को कोई नेतृत्व से असंतोष बता रहा है, कोई संगठन के भीतर घटती राजनीतिक संभावनाओं से जोड़ रहा है, तो कोई इसे चुनाव से पहले अपनी स्थिति सुरक्षित करने की रणनीति मान रहा है। दरअसल, केजरीवाल की कार्यशैली और नेतृत्व के तौर-तरीकों से असंतोष लगातार बढ़ रहा है। पंजाब में अगले विधानसभा चुनाव से पहले सत्ता विरोधी माहौल की आशंका भी इस पलायन के पीछे बड़ी वजह है। भगवंत मान सरकार में काम न होने से इंटी इंकम्बेंसी के चलते नेताओं को लगने लगा है कि आप में उनका राजनीतिक भविष्य सुरक्षित नहीं है। बड़ा सवाल ये है कि यह केवल नेताओं के व्यक्तिगत फैसलों की श्रृंखला है या फिर पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी में बड़े विघटन के स्पष्ट संकेत हैं?
नेताओं के बार-बार इस्तीफे आप के लिए गंभीर साबित होंगे
राजनीति में नेताओं का आना-जाना सामान्य घटनाक्रम माना जाता है, लेकिन खास तौर पर पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव के संदर्भ में यह घटनाक्रम बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। यहां सत्ता में मौजूद आप अपने कमजोर कामकाज, जन-असंतोष और संगठन की एकजुटता के अभाव में चुभते सवालों का सामना कर रही है। दरअसल, आप की यह विडंबना ही है कि पार्टी के गठन के शुरुआती दिनों से ही उसके भीतर विचारधारा, नेतृत्व, संगठनात्मक फैसलों और सत्ता में हिस्सेदारी को लेकर असहमति सामने आती रही है। कभी संस्थापक चेहरे पार्टी से अलग हुए, कभी दिल्ली में सरकार और संगठन के बड़े नामों ने किनारा किया, तो कभी पंजाब में पार्टी को मजबूत करने वाले नेता ही उससे दूर चले गए।
पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले जिस तरह पार्टी के बड़े चेहरों और निर्वाचित प्रतिनिधियों का साथ छूट रहा है, उसने इस सिलसिले को आप के लिए एक बार फिर गंभीर राजनीतिक संकट के रूप में सामने ला दिया है।
तीन आप विधायक बीजेपी में शामिल, ‘डबल इंजन’ सरकार बनाने पर जोर
पंजाब में आप की सियासत में हड़कंप मचा हुआ है। पिछले दो दिनों में आप के 3 विधायक बागी हो गए और उन्होंने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। तीनों बागी विधायक आप को झटका देकर बीजेपी में शामिल हो गए हैं। इन विधायकों में पटियाला के सनौर से विधायक हरमीत सिंह पठान माजरा, समाना से विधायक और पूर्व मंत्री चेतन सिंह जोड़ा माजरा और पूर्व आईपीएस अधिकारी व विधायक कुंवर विजय प्रताप सिंह ने बीजेपी मुख्यालय में पार्टी ज्वाइन कर ली। बीजेपी में शामिल होने के बाद, कुंवर विजय प्रताप ने कहा, “पंजाब में आम आदमी पार्टी खत्म हो चुकी है। अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान ने खुद ही इसका अंत कर दिया है। अब राज्य में आप का कोई अस्तित्व नहीं बचा है। पंजाब में भी ‘डबल इंजन’ की सरकार बनेगी।
एंटी इंकम्बेंसी की गिरफ्त में मान सरकार, पिछले प्रदर्शन का दबाव
इससे पहले आम आदमी पार्टी के कुल 7 राज्यसभा सांसद बीजेपी में शामिल हुए थे। इनमें राघव चड्ढा, संदीप पाठक, अशोक कुमार मित्तल, हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता, स्वाति मालीवाल और विक्रमजित सिंह साहनी शामिल रहे। राघव चड्ढा का पार्टी छोड़ना आम आदमी पार्टी के लिए केवल एक सांसद का जाना नहीं था। चड्ढा 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में पार्टी की रणनीति और दिल्ली नेतृत्व तथा पंजाब इकाई के बीच समन्वय के प्रमुख चेहरों में से एक थे। उनके साथ राज्यसभा के छह अन्य सांसदों का भाजपा में जाना पार्टी के संसदीय आधार को भी बड़ा झटका था। चुनाव से पहले लगातार ऐसी भागमभाग से न सिर्फ कार्यकर्ताओं का मनोबल टूट रहा है, बल्कि स्थानीय समीकरण के साथ ही मतदाताओं के बीच पार्टी छवि बिगड़ रही है। अगले साल होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव में आप के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने 2022 के प्रदर्शन को दोहराने की है। पिछली बार पार्टी ने 117 में से 92 सीटें जीतकर ऐतिहासिक बहुमत हासिल किया था। अब उसे सत्ता-विरोधी माहौल, सरकार के कामकाज पर उठते सवालों, नशे के कारोबार और ड्रग्स से होती मौतों से जनता की नाराजगी का जवाब देना होगा। भाजपा इन घटनाओं को आप की अंदरूनी कमजोरी के प्रमाण के रूप में पेश करेगी, जबकि कांग्रेस और अकाली दल भी इसका राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश करेंगे।



