
संवाददाता
नई दिल्ली। राहुल गांधी ने अपनी ‘भारत जोड़ो यात्रा’ और उसके बाद के अभियानों के दौरान लगातार यह संदेश देने का प्रयास किया कि वे देश में कथित तौर पर बढ़ रही नफरत के बाजार में “मोहब्बत की दुकान” खोलने आए हैं। लेकिन व्यवहार में राहुल गांधी इसके ठीक विपरीत देश में नफरत की खेती कर रहे हैं और गालियों की फसल उगा रहे हैं। अक्सर अपनी रैलियों या सम्मेलनों में सनातन के प्राचीन ग्रंथों, विशेषकर ‘मनुस्मृति’ या अन्य धार्मिक ग्रंथों का चुनिंदा संदर्भ देकर अपमानित कर रहे हैं और जातियों के बीच वैमनस्य बढ़ाकर सनातन को विभाजित करने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं जब देश की 140 करोड़ जनता द्वारा निर्वाचित प्रधानमंत्री और सनातन के खिलाफ अमर्यादित और अपमानजनक टिप्पणियां होती हैं, तो कठोर निंदा करने या राजनीतिक शिष्टाचार दिखाने के बजाय, गालीबाजों का गॉडफादर बनकर संरक्षण देते हैं।

पीएम मोदी को गाली देने वाली निशु आजाद का संरक्षक बने राहुल गांधी
दरअसल, कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के दौरान जंतर-मंतर पर निशु आजाद नाम की यूट्यूबर लड़की के पिता पर हुए हमले का मामला फिर से सुर्खियों में आया है। निशु आजाद ने इसे लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मदद मांगी। सांसद राहुल गांधी ने उनके पोस्ट पर रिप्लाई करते हुए कहा कि वह निशु के साथ हैं और वह तब तक नहीं रुकेंगे जब तक न्याय नहीं मिल जाता। राहुल गांधी ने कहा, ‘निशु, घबराने की जरूरत नहीं है। मैं तुम्हारे साथ हूं। साफ है कि तुम्हें इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि तुम अपने समुदाय और छात्रों के हक की आवाज उठाती हो। अमित शाह की दिल्ली पुलिस एक तरफ छात्रों के साथ अमानवीय बर्बरता करती है। दूसरी तरफ एक दलित लड़की के पिता का सिर फोड़ने वाला अपराधी खुलेआम घूम रहा है। पीएम मोदी, गृह मंत्री अमित शाह ऐसे अपराधी को आपका और आपकी पार्टी के लोगों का संरक्षण क्यों है? अब भी कार्रवाई होगी या किसी को बचाते रहेंगे? निशु, तुम्हारी लड़ाई अकेली नहीं है। हम तब तक नहीं रुकेंगे जब तक न्याय नहीं मिल जाता। जय भीम। जय संविधान।’
खुद संजय आजाद ने खोल दी अपनी, निशु और राहुल गांधी की पोल
सोशल मीडिया में वायरल हो रहे एक वीडियो ने निशु आजाद, उसके पिता संजय आजाद और राहुल गांधी की पोल खोलकर रख दी है। इस वीडियो में निशु आजाद का पिता संजय आजाद खुद स्वीकार कर रहा है कि उसके माथे पर जो चोट लगी, वो अनजाने में लगी थी। शेखी बघारते हुए संजय आजाद बोल रहा है, “अगर दो मिनट पुलिस नहीं आती तो फोटो में देख सकते हैं, तुम्हारी (आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज) दशा किस तरह का कर रखी थी। पुलिस को वहम हो गया था कि मैं तुझे मार रहा हूं। तो पुलिस ने मुझे पकड़ लिया था गलती से। वन-टू-वन कर ले भाई।” इसी वीडियो में निशु आजाद बोल रही है, “कहते हैं कि जिनको अपने बाप का प्यार नहीं मिलता है, तो वो अपना बाप नेताओं को बना लेते हैं। मोदी जी के बारे में थोड़ी बात क्या बोल दी पेट में खलबली मच गई।”
राहुल गांधी की फंडिंग से पीएम मोदी-सनातन को गाली
पुलिस के बयान और मेडिकल रिपोर्ट ने इस मामले को नया मोड़ दे दिया है। इसके साथ ही निशु आजाद के पिता संजय आजाद ने अपने वीडियो में स्वतंत्र भारद्वाज को पीटने का जो वीडियो लगाया है, उससे स्वतंत्र भारद्वाज के दावे की पुष्टि होती है। अब सवाल ये उठता है कि क्या राहुल गांधी के संरक्षण और फंडिंग से यूट्यूबरों का एक ऐसा गिरोह सक्रिय है, जो निशु आजाद की तरह पैसे लेकर प्रधानमंत्री मोदी और सनातन के खिलाफ आपत्तिजनक बयान देकर पहले लोगों को विरोध करने के लिए भड़काता है और बाद में पीड़ित बनकर उनसे उगाही करता है। इस सवाल का जवाब कई इंस्टाग्राम और यूट्यूब कंटेंट क्रिएटर ने दिया है, जिन्होंने खुद उन चैट्स और मैसेजेस के स्क्रीनशॉट साझा किए, जिनमें कांग्रेस की पीआर टीम द्वारा मोदी सरकार और सनातन के खिलाफ नकारात्मक कंटेंट बनाने के बदले पैसे देने की बात कही गई थी। इसी तरह कांग्रेस द्वारा राहुल गांधी की छवि चमकाने के लिए कंटेंट क्रिएटर को हायर किया गया, जिसका खुलासा खुद एक कंटेंट क्रिएटर ने ही किया।
निशु आजाद ने की थी पीएम मोदी के मरने की कामना
राहुल गांधी प्रधानमंत्री मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी पर अपराधी को संरक्षण देने का आरोप लगा रहे हैं। लेकिन राहुल गांधी निशु आजाद जैसे गालीबाज लड़की का संरक्षक बनकर उसको न्याय दिलाने की बात कर रहे हैं। किसी पीड़ित को न्याय मिले इसमें किसी को आपत्ति नहीं है, लेकिन सवाल तब उठता है, जब न्याय सेलेक्टिव हो। जब देश के संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां होती हैं और गालियां दी जाती हैं तो नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को न्याय और संविधान नजर नहीं आता है। उनके चेहरे से ‘मोहब्बत का मुखौटा’ उतर जाता है। उनकी नफरत उनके ऊपर हावी हो जाती है। उनके लिए वे सभी लोग प्रिय हो जाते हैं, जो प्रधानमंत्री मोदी, देश और सनातन को गाली देते हैं। क्या निशु आजाद के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान दिए गए उस आपत्तिजनक बयान को भुलाया जा सकता है, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी के मरने की कामना करते हुए तेरहवीं का खाना खिलाने की बात कही गई थी।
सनातन विरोधियों और नफ़रत का ब्रांड एंबेसेडर बने राहुल गांधी
बारह साल से केंद्र की सत्ता से दूर राहुल गांधी की हताशा और निराशा दिनों-दिन बढ़ती जा रही है। वो किसी भी कीमत पर केंद्र की सत्ता में आना चाहते हैं। इसके लिए चाहे विदेशों में देश की छवि खराब करनी हो, मनुस्मृति, जाति जनगणना और “जितनी आबादी, उतना हक” जैसे मुद्दों को उठाकर सनातन को जातियों में बांटने और सामाजिक तनाव पैदा करने हो, चाहे देश में अराजकता पैदा करने वाली ताकतों को समर्थन देना हो, वो किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार है। आज राहुल गांधी सनातन विरोधियों और नफ़रत का ब्रांड एंबेसेडर बन चुके हैं। इसका प्रामण निशु आजाद का पोस्ट, राहुल गांधी का समर्थन में ट्वीट और संसद मार्ग थाने के सामने स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग को लेकर जुटी भीड़ की टाइमिंग देती है। इन तीनों का एक साथ होना कोई संयोग नहीं, बल्कि सुनियोजित प्रयोग है। क्योंकि मामला डेढ़ महीना पुराना है, इसको नए सिरे गर्माने की कोशिश एक नई साजिश की ओर इशारा कर रही है। गिरफ्तारी की मांग को लेकर जुटी भीड़ में अधिकतर लोग पीएम मोदी और सनातन विरोधी थे, जिनके ब्रांड एंबेसेडर राहुल गांधी हैं।
देवी-देवताओं-ब्राह्मणों के खिलाफ गाली सच्चा कांग्रेसी होने का प्रमाण पत्र
आज पीएम मोदी और सनातन से नफरत करने वाली निशु आजाद भी राहुल गांधी से समर्थन मांग रही हैं, क्योंकि सोशल मीडिया पर सनातन विरोधी और हिन्दू देवी-देवताओं-ब्राह्मणों के खिलाफ किए गए पोस्ट उसके लिए सच्चा कांग्रेसी होना का प्रमाण पत्र है। आज 4 सितंबर 2026 को पूरा देश कृष्ण जन्मोत्सव मना रहा है। ऐसे में निशु भारद्वाज का एक ट्वीट वायरल हो रहा है, जिसमें महिलाओं की नंगी तस्वीर को शेयर करते हुए लिखा गया है कि बराबरी का अधिकार की लड़ाइयों में स्त्रियों के एड़ियां घिस गई थीं। वे गुण बाबा साहब ने दिए। तो आज महिलाएं कृष्ण जन्माष्टमी की उपवास रख के सब गुण गोबर कर दिए।



