
- 2022 तक गृह मंत्रालय की शिकायतें सबसे ज्यादा थीं, फिर तस्वीर बदली.
- 2025 में बैंक 9,933 शिकायतों के साथ सबसे ऊपर, रेलवे दूसरे नंबर पर रहा.
- गृह मंत्रालय की शिकायतें 2022 के 46,643 से घटकर 2025 में 2,036 रह गईं.
- आखिर गृह मंत्रालय की शिकायतों में इतनी बड़ी गिरावट क्यों आई?
- क्या शिकायतों की संख्या को भ्रष्टाचार का सीधा पैमाना माना जा सकता है?
संवाददाता
नई दिल्ली। देश में भ्रष्टाचार को लेकर आने वाली शिकायतों के आंकड़ों में पिछले पांच साल में बड़ा बदलाव दिखा है. कभी शिकायतों के मामले में गृह मंत्रालय सबसे ऊपर था, लेकिन अब तस्वीर बदल गई है. केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) की सालाना रिपोर्टों के मुताबिक, 2021 और 2022 में गृह मंत्रालय के खिलाफ शिकायतों की संख्या सबसे ज्यादा थी. 2021 में गृह मंत्रालय के खिलाफ 37,670 शिकायतें आई थीं, जबकि रेलवे के खिलाफ 11,003 शिकायतें थीं. 2022 में गृह मंत्रालय की शिकायतें बढ़कर 46,643 हो गईं और वह सबसे ज्यादा शिकायतों वाला विभाग रहा. इसी साल रेलवे के खिलाफ 10,580 और बैंकों के खिलाफ 8,129 शिकायतें आईं. यानी 2022 में गृह मंत्रालय की शिकायतें रेलवे से करीब 4.4 गुना ज्यादा थीं.

गृह मंत्रालय की शिकायतों में इतनी बड़ी गिरावट क्यों?
पांच साल के आंकड़ों में 2022 से 2023 के बीच अचानक करीब 95% की गिरावट दिखती है. लेकिन इसे सीधे यह निष्कर्ष निकालकर नहीं देखा जा सकता कि गृह मंत्रालय में शिकायतें भी 95% कम हो गया. इसकी एक बड़ी वजह आंकड़ों की रिपोर्टिंग और विभागों की कवरेज में बदलाव है. CVC की रिपोर्ट में अलग-अलग वर्षों में मंत्रालयों और उनके जुड़े संगठनों को अलग तरीके से दिखाया गया है.
2024 की रिपोर्ट साफ कहती है कि मंत्रालय या विभाग के आंकड़ों में उससे जुड़े संगठन भी शामिल हैं और गृह मंत्रालय का आंकड़ा दिल्ली पुलिस को छोड़कर है. इसलिए 2022 और उसके बाद के आंकड़ों की तुलना करते समय यह अंतर ध्यान में रखना जरूरी है.
फिर बैंक और रेलवे लगातार ऊपर क्यों?
इसका एक कारण इन दोनों संस्थानों का आम लोगों से बहुत बड़ा और रोजाना का संपर्क है. बैंकों में खाते, कर्ज, वसूली, लेन-देन, शाखाओं और दूसरी वित्तीय सेवाओं से जुड़े लाखों काम होते हैं. रेलवे में टिकट, भर्ती, माल ढुलाई, ठेके, खरीद, निर्माण और दूसरी सेवाओं से जुड़े बड़े पैमाने पर काम होते हैं. ऐसे में शिकायतों के लिए भी इन संस्थानों का संपर्क क्षेत्र बहुत बड़ा है. शिकायतों की संख्या में संस्थान का आकार, लोगों से संपर्क और लेन-देन की मात्रा भी बड़ी भूमिका निभाती है.
2025 में CVC के पास सीधे अलग-अलग संगठनों के CVO यानी मुख्य सतर्कता अधिकारियों के जरिए 70,584 शिकायतें आईं. इनमें से 64,905 का निपटारा किया गया, जबकि साल के अंत में 5,679 शिकायतें पेंडिंग थीं. इनमें 2,002 शिकायतें तीन महीने से ज्यादा समय से पेंडिंग थीं. CVC के नियमों के मुताबिक, जांच को सामान्य तौर पर तीन महीने में पूरा करने की अपेक्षा है.
2025 में सिर्फ 248 मामले जांच के लिए भेजे गए
2025 में CVC को 34,153 नई शिकायतें मिलीं. पुराने पेंडिंग मामलों को जोड़ने पर कुल 35,413 शिकायतें हुईं, जिनमें से 35,193 का निपटारा किया गया. इनमें 1,701 शिकायतें गुमनाम या किसी दूसरे नाम से थीं, 13,181 शिकायतें अस्पष्ट या सत्यापन योग्य नहीं थीं और 20,063 शिकायतें CVC के अधिकार क्षेत्र से बाहर होने या दूसरे विभागों से जुड़ी होने के कारण आगे भेजी गईं. सिर्फ 248 शिकायतें CVO/CBI को जांच के लिए भेजी गईं.
यानी शिकायतों की संख्या को भ्रष्टाचार का सीधा पैमाना नहीं माना जा सकता. 2022 में गृह मंत्रालय सबसे ऊपर था, लेकिन 2023 के बाद रेलवे और बैंक लगातार ज्यादा शिकायतों वाले क्षेत्रों में रहे. 2025 में बैंकों और रेलवे के खिलाफ मिलाकर 19,314 शिकायतें आईं. वहीं गृह मंत्रालय के खिलाफ 2,036 शिकायतें थीं. शिकायत आने के बाद मामला जांच में सही पाया जाता है या बंद होता है, यह अलग प्रक्रिया है. CVC के मुताबिक जांच के बाद मामला बंद भी हो सकता है या प्रशासनिक कार्रवाई शुरू हो सकती है.



