
संवाददाता
नई दिल्ली/शामली। हरियाणवी सिंगर और यूट्यूबर अंकित बालियान की शामली में बुधवार यानी 27 अगस्त को गोली मारकर हत्या कर दी गई. अंकित बालियान की हत्या की जिम्मेदारी दिल्ली के गोगी गैंग से जुड़े एक सोशल मीडिया पोस्ट ने ली है. हालांकि शामली पुलिस अभी इस दावे की जांच कर रही है. दिल्ली-NCR के गैंगवार की चर्चा फिर तेज हो गई है. सवाल यह भी उठ रहा है कि तमाम कार्रवाइयों के बावजूद दिल्ली में ऐसे कितने गैंग सक्रिय हैं.
अप्रैल 2025 की एक रिपोर्ट में दिल्ली में 95 छोटे-बड़े सक्रिय गैंग होने की बात सामने आई थी. दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने जनवरी 2026 में 25 सक्रिय क्राइम सिंडिकेट की पहचान की थी.इनमें गोगी, नीरज बवाना-नवीन बाली, टिल्लू ताजपुरिया, काला जठेड़ी, कपिल सांगवान उर्फ नंदू, हिमांशु भाऊ, हाशिम बाबा, कौशल चौधरी और मनजीत महाल-अशोक प्रधान जैसे गैंग के नाम शामिल थे. इनमें करीब 10 गैंग को बड़े और ज्यादा प्रभावशाली गैंग के तौर पर देखा गया था.
कैसे ऑपरेट होते हैं दिल्ली के गैंग?
दिल्ली के गैंगवार को मोटे तौर पर तीन स्तरों पर समझा जा सकता है. पुराने स्थानीय गैंग, बड़े सिंडिकेट और जेल और विदेश से ऑपरेशन
- पुराने स्थानीय गैंग: गोगी, टिल्लू ताजपुरिया, नीरज बवाना, हाशिम बाबा, छेनू पहलवान, मनजीत महाल जैसे गैंग लंबे समय से दिल्ली और आसपास के इलाकों में सक्रिय रहे हैं.
- बड़े सिंडिकेट:स्थानीय गैंगों के बीच समय के साथ बड़े नेटवर्क से गठजोड़ हु. खास तौर पर लॉरेंस बिश्नोई, काला जठेड़ी, गोल्डी बराड़, हिमांशु भाऊ और दूसरे नेटवर्क का प्रभाव बढ़ा.
- जेल और विदेश से ऑपरेशन: कई गैंग के मुख्य चेहरे जेल में हैं या विदेश में बैठे हैं, जबकि जमीन पर उनके सहयोगी काम करते हैं. यही वजह है कि किसी गैंगस्टर के जेल में होने का मतलब यह नहीं कि उसका नेटवर्क खत्म हो गया.
दिल्ली के 10 खतरनाक गैंग कौन-कौन से हैं?
दिल्ली कई गैंग अपने प्रभाव, अन्य गैंगों से दुश्मनी के चलते एक-दूसरे के सहयोगी या विरोधी सिंडिकेट में जुड़े हुए हैं. फिलहाल, दिल्ली का गैंगवॉर लंबे समय से मोटे तौर पर दो बड़े धड़ों में बंट गया है. एक तरफ लॉरेंस बिश्नोई से जुड़ा नेटवर्क और दूसरी तरफ नीरज बवाना-हिमांशु भाऊ, टिल्लू से जुड़े नेटवर्क.
- गोगी गैंग
- लॉरेंस बिश्नोई सिंडिकेट
- नीरज बवाना गैंग
- काला जठेड़ी गैंग
- टिल्लू ताजपुरिया गैंग
- हाशिम बाबा गैंग
- कपिल सांगवान उर्फ नंदू सिंडिकेट
- कौशल चौधरी गैंग
- छेनू पहलवान गैंग
- मंजीत महाल-अशोक प्रधान गैंग
गोगी और टिल्लू गैंग के बीच अदावत क्या है?
जितेंद्र मान उर्फ गोगी दिल्ली के सबसे चर्चित गैंगस्टरों में रहा. उसके नेटवर्क पर हत्या, रंगदारी और अन्य गंभीर अपराधों के आरोप रहे हैं. गोगी गैंग का लंबे समय से टिल्लू ताजपुरिया गैंग के साथ खूनी संघर्ष रहा. गोगी और टिल्लू की दुश्मनी दिल्ली के गैंगवार का सबसे चर्चित उदाहरण रही है. सितंबर 2021 में रोहिणी कोर्ट में पेशी के दौरान गोगी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.ऊधर टिल्लू की 2023 में तिहाड़ जेल में हत्या कर दी गई, लेकिन उसके नेटवर्क से जुड़े लोगों का नाम बाद की पुलिस कार्रवाइयों में भी सामने आता रहा. दोनों ही गैंग के आका फिलहाल, इस दुनिया में नहीं है.
दिल्ली में गैंगवार की जड़ में क्या है?
इन गैंगों के बीच संघर्ष की बड़ी वजहें आमतौर पर रंगदारी, इलाके पर वर्चस्व, बदला, अवैध हथियार, कॉन्ट्रैक्ट किलिंग और पुराने गैंगवार होती हैं. कई बार एक हत्या का बदला दूसरी हत्या से लिया जाता है और इसी तरह दुश्मनी कई साल चलती रहती है.यही वजह है कि एक गैंग की गतिविधि दूसरे गैंग के नेटवर्क को भी सक्रिय कर देती है. किसी एक गैंग के सदस्य की हत्या के बाद बदले की कार्रवाई होती है और फिर उसके जवाब में दूसरा हमला. इसके बाद कई अपने आपको अधिक ताकतवर बनाने के लिए कई गैंग्स जुड़कर सिंडिकेट बनाते हुए भी अपराध को अंजाम देने लगे.
दिल्ली में अपराध के दो बड़े सिंडिकेट कौन से बन गए हैं?
- लॉरेंस बिश्नोई का नाम दिल्ली के संगठित अपराध के सबसे बड़े नेटवर्क में आता है.दिल्ली में उसके प्रभाव से स्थानीय गैंग के लोगों के जुड़ने से गैंगवार का स्वरूप बदल गया.
- पुलिस और जांच एजेंसियों के इनपुट में लॉरेंस बिश्नोई, गोगी, हाशिम बाबा, दीपक बॉक्सर और कपिल सांगवान उर्फ नंदू जैसे गैंग नामों को बिश्नोई नेटवर्क से जोड़े जाने की बात सामने आती रही है.
- इस मॉडल में स्थानीय गैंग के पास जमीन पर मौजूद शूटर और नेटवर्क होते हैं, जबकि बड़ा सिंडिकेट उन्हें फंडिंग, संपर्क और बड़े अपराध नेटवर्क से जोड़ सकता है.
दूसरी तरफ कौन?
- दिल्ली के अपराध नेटवर्क में दूसरी तरफ नीरज बवाना-नवीन बाली और हिमांशु भाऊ जैसे नेटवर्क का नाम सामने आता है।
- नीरज बवाना-नवीन बाली, हिमांशु भाऊ, छेनू पहलवान, टिल्लू और मनजीत महाल जैसे नाम हैं.
- हालांकि गैंगवार का यह गठबंधन स्थायी राजनीतिक गठबंधन जैसा नहीं है। गठजोड़ समय, फायदे और दुश्मनी के हिसाब से बदल सकते हैं।
अंकित बालियान केस क्यों अहम है?
अंकित बालियान की हत्या दिल्ली में नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के शामली में हुई है. फिर गोगी गैंग की तरफ से इस हत्या की जिम्मेदारी लेना बताता है कि दिल्ली-NCR का अपराध नेटवर्क राज्यों की सीमाओं से काफी आगे फैल चुका है. यह समस्या केवल कुछ कुख्यात गैंगस्टरों तक सीमित नहीं है. असली चुनौती इन बड़े गैंग के आसपास बने छोटे-छोटे नेटवर्क, सहयोगियों और नए युवाओं की भर्तियां. दिल्ली पुलिस लगातार इनके खिलाफ अभियान भी चलाती है. लेकिव अब दिल्ली का गैंगवार अब सिर्फ गोगी बनाम टिल्लू की कहानी नहीं है. इसके पीछे कई गैंग, उनके गठजोड़, दुश्मनियां और राज्यों की सीमाओं के पार फैला एक पूरा आपराधिक नेटवर्क बन गया है.



