
संवाददाता
भोपाल । मध्य प्रदेश के सियासी गलियारों में एक बार फिर बहुत बड़ा भूचाल आ गया है। इस बार सीधे सूबे के मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनका पूरा परिवार विपक्ष के निशाने पर है। कांग्रेस ने एक के बाद एक कई सोशल मीडिया पोस्ट और प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए 23 जून मुख्यमंत्री मोहन यादव के परिवार पर सरकारी ताकत का इस्तेमाल करके करोड़ों रुपये का जमीन घोटाला करने का बेहद संगीन आरोप लगाया है।
मध्य प्रदेश कांग्रेस ने सीएम मोहन यादव का फैमिली ट्र्री शेयर करते हुए बताया कि मोहन यादव की पत्नी सीमा, बेटा वैभव, बहू शालिनी से लेकर भाई व चचेरे भाई तक पर किसने कितनी जमीन खरीदी है। कांग्रेस का दावा है कि कुल भूमि स्वामित्व रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के परिवार और रिश्तेदारों के पास 245 प्लॉट में 335 एकड़ जमीन है। आइए समझे क्या पूरा मामला।
क्या है मोहन यादव के परिवार पर आरोप? मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए चौंकाने वाले आंकड़े देश के सामने रखे। कांग्रेस के दावों के मुताबिक साल 2021 में जब मोहन यादव पहली बार राज्य सरकार में मंत्री बने, उसके बाद से ही उनके परिवार और बेहद करीबी लोगों की संपत्ति में बहुत ज्यादा उछाल आया है। कांग्रेस के मुताबिक 2021 से 2023 के बीच 57 प्लॉट में करीब 85 एकड़ भूमि खरीदी गई। वहीं 2024 से 2025 के बीच मात्र एक साल में 137 प्लॉट के जरिए लगभग 168 एकड़ जमीन अर्जित की गई। पार्टी का दावा है कि कुल मिलाकर करीब 194 प्लॉट में 253 एकड़ जमीन परिवार से जुड़े लोगों के नाम पर आई।

किसके नाम पर कितनी जमीन? कांग्रेस की पूरी रिपोर्ट कांग्रेस द्वारा जारी की गई कुल भूमि स्वामित्व रिपोर्ट (Total Land Ownership Report) के मुताबिक, मुख्यमंत्री मोहन यादव के कुनबे और उनके खास रिश्तेदारों के पास इस समय कुल 245 प्लॉट में करीब 335 एकड़ जमीन मौजूद है। कांग्रेस ने इस फैमिली ट्री के जरिए जो सूची जारी की है। नीलेश यादव (रिश्तेदार): 108 एकड़ गोविंद यादव (रिश्तेदार): 47 एकड़ नारायण यादव (रिश्तेदार): 19 एकड़ मोहन यादव (खुद सीएम): 17 एकड़ वैभव यादव (बेटा): 17 एकड़ नंदलाल यादव (रिश्तेदार): 17 एकड़ कलावती (बहन): 17 एकड़ अभय यादव (रिश्तेदार): 16 एकड़ सीमा यादव (पत्नी): 11 एकड़ शालिनी यादव (बहू): 10 एकड़ रेखा यादव (रिश्तेदार): 6 एकड़

जीतू पटवारी ने यह भी खुलासा किया कि इस पूरे मामले में 4 प्रमुख रियल एस्टेट कंपनियों के नाम भी सामने आए हैं। इन कंपनियों में मुख्यमंत्री की पत्नी सीमा यादव और खुद मोहन यादव की बड़ी हिस्सेदारी है। अकेले मुख्यमंत्री की पत्नी सीमा यादव और उनके बेटे वैभव के नाम पर 25 एकड़ जमीन का सीधा लिंक मिला है। इसके साथ ही मोहन यादव की बहन कलावती की भाभी सुनीता के नाम पर भी 47 एकड़ जमीन दर्ज है।
पत्नी, बेटे और बहू को लेकर क्या दावा? प्रेस कॉन्फ्रेंस में जीतू पटवारी ने दावा किया कि मुख्यमंत्री मोहन यादव की पत्नी सीमा यादव और बेटे वैभव यादव से लगभग 25 एकड़ जमीन जुड़ी हुई है। कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि परिवार के अन्य सदस्यों और रिश्तेदारों का संबंध कई रियल एस्टेट कंपनियों से रहा है। पार्टी का कहना है कि कुछ कंपनियों में परिवार के सदस्यों और करीबी रिश्तेदारों की हिस्सेदारी रही है तथा जमीनों के हस्तांतरण और निवेश को लेकर कई सवाल खड़े होते हैं।
चार रियल एस्टेट कंपनियों का भी जिक्र
कांग्रेस ने अपने आरोपों में चार रियल एस्टेट कंपनियों का भी उल्लेख किया है। जीतू पटवारी का दावा है कि इनमें से कुछ कंपनियों में बहुमत हिस्सेदारी मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनकी पत्नी सीमा यादव से जुड़ी बताई जाती है। कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री की बहन कलावती से जुड़े पारिवारिक रिश्तों के माध्यम से भी बड़ी मात्रा में भूमि का संबंध सामने आता है। हालांकि इन दावों पर अभी तक कोई आधिकारिक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है।
संयोग या मास्टरप्लान?
कांग्रेस के वो 5 तीखे सवाल
कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री ने पवित्र धर्मनगरी उज्जैन को जमीन के इस गोरखधंधे का केंद्र बना दिया है। विपक्ष का सबसे बड़ा हमला इस बात पर है कि खरीदी गई कुल जमीनों में से करीब 111 एकड़ जमीनें बिल्कुल उन्हीं जगहों पर हैं, जहां से सरकार की बड़ी विकास परियोजनाएं और सड़कें निकलने वाली हैं। इसे लेकर कांग्रेस ने सरकार के सामने कई तीखे सवाल दागे हैं:
पहले सड़क बनी या जमीन आई?
मुख्यमंत्री जी यह बताएं कि उन इलाकों में पहले सरकारी सड़क का रूट तय हुआ था या फिर आपके परिवार ने पहले वहां की जमीनें कौड़ियों के भाव खरीदीं और बाद में वहां से सड़क निकाली गई? क्या उज्जैन के आम किसानों को भी इस प्रोजेक्ट की पहले से भनक थी?
सरकारी फैसले से खुद को अलग क्यों नहीं किया?
क्या मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) ने कभी यह सुनिश्चित किया कि जिन क्षेत्रों में उनके परिवार की निजी जमीनें हैं, वहां से जुड़ी फाइलें साइन करते समय मुख्यमंत्री खुद को उन फैसलों से दूर रखें?
क्या इंटेलिजेंस सो रहा था?
जब किसी कैबिनेट मंत्री या मुख्यमंत्री का परिवार सरकारी प्रोजेक्ट्स वाली जगहों पर इतने बड़े पैमाने पर निवेश कर रहा था, तो क्या मध्य प्रदेश का खुफिया तंत्र (Intelligence Bureau) आंखों पर पट्टी बांधकर बैठा था?
लैंड यूज चेंज का सच क्या है?
क्या सरकार उन सभी जमीनों के ‘भूमि उपयोग परिवर्तन’ (Land Use Diversion) की सूची सार्वजनिक करेगी, जिससे यह साफ हो सके कि कृषि भूमि को अचानक आवासीय या व्यावसायिक कैसे बनाया गया?
क्या फॉरेंसिक ऑडिट होगा?
जिन 4 रियल एस्टेट कंपनियों में मुख्यमंत्री के परिवार की हिस्सेदारी है, क्या मुख्यमंत्री उन सभी कंपनियों के खातों और जमीनी हस्तांतरण का फॉरेंसिक ऑडिट कराने का हौसला दिखाएंगे?
क्या है कांग्रेस की मुख्य मांगें?
इस पूरे विवाद के सामने आने के बाद कांग्रेस ने बैकफुट पर आई बीजेपी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुराने नारे ‘ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा’ पर तंज कसते हुए मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। कांग्रेस की मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:
सुप्रीम कोर्ट के जज से जांच: कांग्रेस की मांग है कि इस पूरे कथित भूमि घोटाले की जांच सुप्रीम कोर्ट के किसी सिटिंग जज की निगरानी में एक विशेष समिति बनाकर की जाए, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।
मुख्यमंत्री खुद दें जवाब: मुख्यमंत्री मोहन यादव को तुरंत मध्य प्रदेश की जनता के सामने आकर इन सभी गंभीर आरोपों पर अपनी स्थिति साफ करनी चाहिए और आधिकारिक बयान देना चाहिए।
सिंहस्थ कुंभ की जांच: उज्जैन में होने वाले आगामी सिंहस्थ कुंभ के नाम पर जो विकास कार्य हो रहे हैं, उनके पीछे कौन सी निजी कंपनियां काम कर रही हैं और उनका सत्ता में बैठे लोगों से क्या संबंध है, इसका पूरा ब्योरा सार्वजनिक किया जाए।
जनता के पैसे का हिसाब: प्रदेश के विकास के नाम पर खर्च होने वाले लाखों-करोड़ों रुपये आखिर किसके फायदे के लिए इस्तेमाल हो रहे हैं, सरकार को इसका पूरा हिसाब-किताब श्वेत पत्र जारी करके देना चाहिए। अब देखना यह होगा कि इस बड़े राजनीतिक हमले पर खुद मुख्यमंत्री मोहन यादव और भारतीय जनता पार्टी की तरफ से क्या आधिकारिक सफाई सामने आती है। फिलहाल यह मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के स्तर पर है। कांग्रेस लगातार हमलावर है और न्यायिक जांच की मांग कर रही है।



