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दोहरे पासपोर्ट केस में अब्दुल्ला आजम खान को बड़ी राहत, कोर्ट ने किया बरी; मिली थी 7 साल की सजा

संवाददाता

रामपुर। समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान के बेटे और पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम खान को दोहरे पासपोर्ट मामले में बड़ी कानूनी राहत मिली है. एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट ने मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा सुनाई गई 7 साल की सजा को रद्द करते हुए उनकी अपील स्वीकार कर ली और उन्हें इस मामले में पूरी तरह बरी कर दिया. इस फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में इस मामले को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है. इसकी जानकारी अब्दुल्ला आजम खान के वकील नासिर सुल्तान ने दी.

सेशन कोर्ट ने अब्दुल्ला आजम खान को किया बरी

जानकारी के अनुसार, अब्दुल्ला आजम खान को कुछ समय पहले मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा दोहरे पासपोर्ट मामले में दोषी करार देते हुए 7 साल की सजा सुनाई गई थी. इस फैसले के खिलाफ उनके पक्ष की ओर से सेशन कोर्ट में अपील दाखिल की गई थी. शुक्रवार को दोपहर करीब तीन बजे इस अपील पर सुनवाई करते हुए MP-MLA सेशन कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया.

कोर्ट ने मजिस्ट्रेट कोर्ट के उस फैसले को रद्द करते हुए अब्दुल्ला आजम खान की अपील को स्वीकार कर लिया और उन्हें इस मामले में पूरी तरह बरी कर दिया. कोर्ट के इस निर्णय के बाद अब्दुल्ला आजम खान को बड़ी राहत मिली है. इस फैसले से राजनीतिक और कानूनी हलकों में भी हलचल तेज हो गई है.

अब्दुल्ला आजम खान के वकील ने दी जानकारी

अब्दुल्ला आजम खान के वकील नासिर सुल्तान ने इस पूरे मामले की जानकारी देते हुए बताया कि अदालत ने सभी तथ्यों और दस्तावेजों पर विचार करने के बाद यह निर्णय लिया है. उन्होंने कहा कि सेशन कोर्ट ने निचली अदालत के आदेश को खारिज करते हुए अब्दुल्ला आजम खान को दोषमुक्त करार दिया है. इस फैसले के बाद समर्थकों में भी राहत की भावना देखी जा रही है. वहीं राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है.

2 पासपोर्ट बनवाने का था आरोप

बता दें कि समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेता आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम खान पर फर्जी तरीके से दो पासपोर्ट (अलग-अलग जन्मतिथि वाले) बनवाने का आरोप था. इस मामले में एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट कोर्ट ने दिसंबर 2025 में उन्हें 7 साल की सजा सुनाई थी. आरोप था कि अब्दुल्ला आजम खान ने फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करके अपने दो अलग-अलग पासपोर्ट बनवाए, जिनमें उनकी जन्मतिथि अलग-अलग दर्ज थी. 5 दिसंबर 2025 को एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट कोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराया और 7 साल की कैद और जुर्माने की सजा सुनाई थी.

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