
संवाददाता
नई दिल्ली। जो लोग भारत की सीमाओं में चोरी-छिपे घुसकर, यहां का राशन खाकर और फर्जी कागज बनवाकर इस देश की डेमोग्राफी बदलने का सपना देख रहे थे, उनकी उल्टी गिनती अब शुरू हो चुकी है। मोदी सरकार ने देश के भीतर छिपे इस साइलेंट टाइम बम को डिफ्यूज करने के लिए अब तक का सबसे बड़ा और कड़ा चक्रव्यूह रच दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल 15 अगस्त को लाल किले से जिस महा-मिशन का संकल्प लिया था, आज गृह मंत्री अमित शाह ने उस पर मुहर लगाते हुए ‘हाई-लेवल कमेटी ऑन डेमोग्राफिक चेंज’ के गठन का एलान कर दिया। साफ है कि हिंदुस्तान की छाती पर अवैध रूप से पल रहे एक-एक घुसपैठिए को चुन-चुनकर चिह्नित किया जाएगा और देश की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों को सीधा रास्ता दिखाया जाएगा।
यह हाई-पावर कमेटी सिर्फ कागजी कार्रवाई के लिए नहीं बनी है, बल्कि इसका सीधा मकसद देश की सीमाओं में सेंध लगाकर घुसे अवैध प्रवासियों की पहचान करना, डेमोग्राफी में आ रहे असामान्य और अप्राकृतिक बदलावों को रोकना और भारत की संप्रभुता की रक्षा करना है।
अमित शाह ने स्पष्ट शब्दों में कहा, यह कमिटी, अवैध प्रवास और अन्य असामान्य कारणों से पूरे भारत में हो रहे डेमोग्राफिक चेंज का व्यापक मूल्यांकन करेगी। चाहे वो असम के आदिवासी इलाके हों, झारखंड का संथाल परगना हो या फिर देश के अन्य हिस्से…जहां-जहां भी असामान्य रूप से आबादी का संतुलन बिगड़ा है, वहां अब सरकार का हंटर चलने वाला है।
गृहमंत्री अमित शाह ने घुसपैठियों को बाहर करने के लिए जो हाई पावर कमेटी बनाई है, उसमें काफी अनुभवी चेहरे हैं. यह टीम किसी भी दबाव में आए बिना, वैज्ञानिक और कानूनी तरीके से घुसपैठियों के पैटर्न का पर्दाफाश करेगी।
सुप्रीम कोर्ट के रिटायर न्यायाधीश जस्टिस प्रकाश प्रभाकर नावलेकर को इस बेहद महत्वपूर्ण कमेटी की कमान सौंपी गई है। कमेटी में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव और रिटायर्ड आईएएस अधिकारी दुर्गा शंकर मिश्रा और रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी बालाजी श्रीवास्तव को शामिल किया गया है। मशहूर अर्थशास्त्री और पीएम की आर्थिक सलाहकार परिषद की सदस्य डॉ. शमिका रवि को इसमें जगह दी गई है, जो जनसंख्या और सामाजिक बदलावों के डेटा का सटीक विश्लेषण करेंगी। देश के जनगणना आयुक्त खुद इस कमेटी के सदस्य होंगे और गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव (फॉरेनर्स-I) इसके सदस्य सचिव बनाए गए हैं। यानी, गृह मंत्रालय सीधे इस कमेटी की हर रिपोर्ट और एक्शन पर नजर रखेगा।
पिछले कुछ सालों में देश के कई राज्यों से ऐसी खबरें आई हैं, जहां कुछ खास सीमावर्ती इलाकों और अंदरूनी जिलों में अचानक एक खास समुदाय की आबादी में अप्रत्याशित बाढ़ आ गई। यह कोई प्राकृतिक जनसंख्या वृद्धि नहीं है, बल्कि सोची-समझी रणनीति के तहत कराई गई अवैध घुसपैठ का नतीजा है। यहां के बदलाव देख सरकार की नींद उड़ी हुई है। यह देश की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बनने वाला है। इसके अलावा देश के कई हिस्सों में मूल निवासियों को अल्पसंख्यक बनाने का खेल चल रहा है। धार्मिक स्तर पर हो रहे इस असामान्य जनसंख्या परिवर्तन का पूरा कच्चा चिट्ठा यह कमेटी तैयार करेगी। साथ ही इस पर एक्शन भी लिया जाएगा।
गृह मंत्री अमित शाह के इस ऐलान की सबसे बड़ी बात यह है कि यह कमेटी केवल रिपोर्ट बनाकर ठंडे बस्ते में नहीं डालेगी। यह कमेटी सुनियोजित और समयबद्ध समाधान देगी यानी एक निश्चित टाइमलाइन के भीतर कमेटी अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपेगी और उसके तुरंत बाद देशव्यापी एक्शन प्लान शुरू होगा.



