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ईरान ने खत्म की रूढ़िवादी परंपरा, महिलाएं भी स्टेडियम में देख सकेंगी मैच

तेहरान. ईरान में 40 साल से महिलाओं को फुटबॉल समेत अन्य किसी भी खेल को देखने के लिए स्टेडियम में जाने की अनुमति नहीं थी। यह रुढ़िवादी परंपरा अब खत्म हो गई है। ईरान सरकार ने फेडरेशन इंटरनेशनल फुटबॉल एसोसिएशन (फीफा) के आदेश और पिछले महीने हुई ‘ब्लू गर्ल’ की मौत के बाद महिलाओं को स्टेडियम में प्रवेश देने का फैसला लिया है।

ईरान फुटबॉल टीम और कोलंबिया के बीच गुरुवार को फीफा वर्ल्ड कप 2022 का क्वालिफायर मुकाबला होना है। इसके लिए ईरान सरकार ने 3500 महिलाओं को मैच देखने की अनुमति दी है। जबकि स्टेडियम में दर्शकों की क्षमता 1 लाख है।

महिला पत्रकार ने कहा- मैच का अनुभव लूंगी

ईरान की महिला पत्रकार राहा पूरबख्श भी इन 3500 महिलाओं में से एक हैं, जिन्होंने मैच के लिए टिकट बुक किया। राहा ने कहा, ‘‘मुझे अब भी यकीन नहीं हो रहा है कि ईरान में ऐसा हो रहा है। मैंने पिछले कई सालों तक इसके लिए काम किया और देश में हो रहे प्रदर्शनों को भी टीवी पर देखा। अब मैं इसका (मैच देखने की आजादी) अनुभव ले सकूंगी।’’

‘ब्लू गर्ल’ को कोर्ट ने 6 महीने की सजा सुनाई थी

ईरान की 29 साल की सहर खोडयारी फुटबॉल प्रशंसक थी। इसी साल मार्च में सहर लड़कों के कपड़े पहनकर तेहरान स्टेडियम में हो रहा फुटबॉल मैच देखने पहुंची थी। इसी दौरान उसे गिरफ्तार कर लिया गया था। इसके बाद कोर्ट ने सहर को 6 महीने की सजा सुनाई थी। पिछले महीने ही जेल जाने के डर से सहर ने खुद को आग लगाकर जान दे दी थी। सहर की पसंदीदा टीम एस्टेगलल फ़ुटबॉल क्लब थी और इसका कलर ब्लू था। इसी कारण लोग सहर को प्यार से ‘ब्लू गर्ल’ कहने लगे।

3,500 ईरानी महिलाएं मैच देखने आएंगी

फीफा ने पिछले महीने ईरान सरकार को आदेश दिया था कि वह महिलाओं पर लगे सभी प्रतिबंध हटा ले। इसके बाद ईरान फुटबॉल एसोसिएशन ने 3500 महिलाओं के बैठने के लिए तीन अतिरिक्त लाइनें बनाईं। इन सीटों के टिकट तत्काल ही बिक गए।

मार्च में 35 महिलाओं को हिरासत में लिया था

पिछले महीने एक जैनब नाम की लड़की भी लड़कों के कपड़े पहनकर मैच देखने गई थी, जिसे पुलिस ने हिरासत में ले लिया था। इसके बाद जैनब की फोटो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुई। इसी साल मार्च में एक मैच देखने की कोशिश करने वाली 35 महिलाओं को हिरासत में लिया गया था।

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महिलाओं के प्रतिबंध का लिखित कानून नहीं
ईरान में महिलाओं के स्टेडियम में प्रवेश पर प्रतिबंध का कोई लिखित कानून नहीं है। 1979 इस्लामिक क्रांति के बाद यह तय किया गया था कि महिलाओं को किसी भी स्टेडियम में विशेष परिस्थितियों में ही प्रवेश मिलेगा। इसके बाद 2001 में वर्ल्ड कप क्वॉलिफायर मुकाबले के लिए करीब 20 ईरानी महिलाओं को मैच देखने के अनुमति मिली थी। अक्टूबर में करीब 100 महिलाओं को बोलिविया के खिलाफ दोस्ताना मैच देखने के लिए चुना गया था।

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