
संवाददाता
पटना । मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में हुए बिहार कैबिनेट विस्तार में इस बार सिर्फ जातीय और क्षेत्रीय संतुलन ही नहीं, बल्कि राजनीतिक विरासत की भी खास झलक देखने को मिली. सम्राट कैबिनेट में बिहार के तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों के बेटे मंत्री बने हैं. इनमें सबसे ज्यादा चर्चा नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की है, जिन्होंने पहली बार मंत्री पद की शपथ लेकर न सिर्फ अपनी पार्टी जेडीयू बल्कि बिहार के लोगों को भी बड़ा मैसेज दिया है.
सम्राट कैबिनेट की सबसे बड़ी राजनीतिक घटना निशांत कुमार की एंट्री मानी जा रही है. लंबे समय तक सक्रिय राजनीति और किसी पद से दूरी बनाए रखने वाले निशांत कुमार आखिरकार मंत्री बनने के लिए मान ही गए. निशांत कुमार ने आज सम्राट कैबिनेट में मंत्री पद की शपथ ली. बिहार की राजनीति में कई बार यह चर्चा होती रही कि क्या नीतीश कुमार अपने बेटे को राजनीति में लाएंगे. हालांकि नीतीश कुमार हमेशा परिवारवाद के सवाल पर बचते रहे, लेकिन इस बार निशांत कुमार को कैबिनेट में जगह देकर जेडीयू ने बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है. शपथ ग्रहण समारोह के दौरान एक भावुक तस्वीर भी देखने को मिली, जब निशांत कुमार ने मंच पर अपने पिता नीतीश कुमार के पैर छूकर आशीर्वाद लिया. इस दौरान नीतीश कुमार ने बेटे की पीठ थपथपाकर शुभकामनाएं दीं.
जगन्नाथ मिश्रा की विरासत संभाल रहे नीतीश मिश्रा
पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा के बेटे नीतीश मिश्रा पहले से बिहार की राजनीति में सक्रिय हैं और पहले भी मंत्री भी रह चुके हैं. मिथिला क्षेत्र में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है. नीतीश मिश्रा को बीजेपी ने एक बार फिर कैबिनेट में शामिल कर ब्राह्मण समाज और मिथिला क्षेत्र दोनों को साधने की कोशिश की है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीतीश मिश्रा सिर्फ ‘पूर्व CM के बेटे’ नहीं, बल्कि संगठन और प्रशासनिक अनुभव वाले नेता के तौर पर भी अपनी पहचान बना चुके हैं.
मांझी के बेटे संतोष सुमन की बढ़ती अहमियत
पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के बेटे संतोष कुमार सुमन को भी एक बार फिर मंत्रिमंडल में जगह मिली है. हालांकि वह पहले भी मंत्री रह चुके हैं. हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) की राजनीति में संतोष सुमन अहम चेहरा माने जाते हैं. दलित राजनीति में उनकी पकड़ और मांझी परिवार के प्रभाव को देखते हुए एनडीए ने उन्हें फिर से कैबिनेट में शामिल किया है. माना जा रहा है कि आगामी चुनावों में महादलित वोट बैंक को साधने में संतोष सुमन की बड़ी भूमिका रहने वाली है.
बिहार की राजनीति में ‘परिवार’ फैक्टर फिर चर्चा में



