
संवाददाता
नई दिल्ली। दिल्ली में शहरी गरीबों के लिए आवास संकट के समाधान और झुग्गी-झोपड़ी (जेजे) बस्तियों के पुनर्वास की दिशा में दिल्ली सरकार ने ‘दिल्ली स्लम तथा झुग्गी-झोपड़ी पुनस्थापन एवं पुनर्वास नीति, 2026’ की अधिसूचना जारी कर दी है. उपराज्यपाल द्वारा शहरी विकास विभाग के माध्यम से इसे दिल्ली राजपत्र में आधिकारिक रूप से अधिसूचित कर दिया गया है.
करीब 675 जेजे बस्तियों पर केंद्रित
राजपत्र में प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में वर्तमान में लगभग 675 झुग्गी-झोपड़ी (जेजे) बस्तियां मौजूद हैं. तेजी से हुए शहरीकरण और रोजगार की तलाश में आने वाले प्रवासियों की बढ़ती संख्या के कारण किफायती आवास की कमी हुई है. इन बस्तियों के निवासी वाहन चलाने, सामान बेचने और घरेलू कार्य जैसे आर्थिक गतिविधियों से स्थानीय अर्थव्यवस्था में योगदान तो देते हैं, लेकिन स्वास्थ्य जोखिम और अस्वच्छ वातावरण का सामना करते हैं.
अब अधिसूचना जारी होने के साथ धरातल पर काम शुरू हो जाएगा. इस परियोजना से दिल्ली में रहने वाले लाखों परिवारों के वर्षों पुराने पक्के घर के सपने को पंख लगेंगे. यदि इस नीति का क्रियान्वयन तय समयसीमा के भीतर और पूरी पारदर्शिता के साथ होता है, तो यह दिल्ली के शहरी परिदृश्य को बदलने वाली एक मील का पत्थर साबित होगी.
जानिए यह नीति क्यों है महत्वपूर्ण
दिल्ली सरकार के मंत्री आशीष सूद का कहना ही कि यह नीति दिल्ली को एक सुनियोजित शहर के रूप में विकसित करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा. कच्चे और असुरक्षित घरों से निकलकर परिवारों का पक्के घरों में जाना स्वास्थ्य और सुरक्षा के दृष्टिकोण से बदलाव होगा. पीपीपी मॉडल और समयबद्ध टेंडर प्रक्रिया से भ्रष्टाचार की गुंजाइश कम होगी और काम में पारदर्शिता आएगी. नीति के अंतिम रूप दिए जाने के बाद, अब चरणबद्ध तरीके से उन क्लस्टरों की सूची तैयार की जाएगी जिनका पुनर्वास पहले किया जाना है. सरकारी तंत्र अब उन निजी डेवलपर्स के साथ तालमेल बिठाने पर काम करेगा जो इन परियोजनाओं के लिए बोली लगाएंगे.
स्लम एवं जे.जे. पुनर्वास नीति-2026 का मुख्य उद्देश्य
- इस नीति का प्राथमिक उद्देश्य दिल्ली की झुग्गियों में रहने वाले लाखों परिवारों को एक सम्मानजनक और सुरक्षित आवास प्रदान करना है. यह नीति केवल आवास देने तक सीमित नहीं है, बल्कि पुनर्वास की एक व्यापक प्रक्रिया है जो लाभार्थियों के जीवन स्तर को ऊपर उठाने पर केंद्रित है.
- इस परियोजना को गति देने के लिए ‘पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप’ (पीपीपी) मॉडल को अपनाया गया है. इसमें निजी डेवलपर्स के सहयोग से झुग्गीवासियों के लिए बहुमंजिला इमारतों का निर्माण किया जाएगा.
- सरकार ने पुनर्वास की गति को बढ़ाने का निर्णय लिया है. इसके तहत प्रत्येक माह कम से कम 5 पीपीपी-आधारित परियोजनाओं के टेंडर जारी करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, ताकि काम में कोई देरी न हो.
- केवल घर ही नहीं, बल्कि पुनर्वास कॉलोनियों में सभी नागरिक सुविधाओं को अनिवार्य किया गया है. जिसमें आधुनिक सरकारी स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र, आंगनवाड़ी केंद्र, खेल के मैदान और सामुदायिक पार्क होगा.



