
संवाददाता
नई दिल्ली। शाहदरा थाना विवाद और उसके बाद पुलिसकर्मियों द्वारा दिए गए धरने के बीच गृह मंत्रालय ने बड़ी कार्रवाई की है. सोमवार को पुराना पुलिस मुख्यालय के बाहर दिल्ली पुलिस के जवानों द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शन के तुरंत बाद मंत्रालय ने एसीपी मनस्वी वशिष्ठ को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है.
शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बीच उठाई गईं थीं मांगें
मुख्यालय के बाहर लगभग 100 से 150 पुलिसकर्मी जिनमें महिला अधिकारी भी शामिल थीं, अपनी मांगों को लेकर एकजुट हुए थे. प्रदर्शन के दौरान एसीपी वशिष्ठ ने कहा था, “हमने अपनी मांगें पुलिस कमिश्नर के सामने रख दी हैं. उन्होंने हमें बैठक के लिए समय दिया, जहां हमने अपनी बात रखी. हालांकि सभी को खुलकर बोलने का मौका नहीं मिल सका, लेकिन हमने अपनी पांच मुख्य मांगें पहुंचा दी हैं.

“प्रदर्शनकारी पुलिसकर्मियों की मुख्य मांगों में एसीपी वशिष्ठ और शाहदरा थाने के पूर्व एसएचओ अरुण कुमार का तबादला रद्द कर पुराने पदों पर बहाल करना, अदालतों व थानों में वकीलों के साथ किसी भी टकराव से निपटने के लिए स्पष्ट एसओपी बनाना और प्रदर्शन में शामिल जवानों के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई न करना शामिल था.

23 अक्टूबर से शुरू हुआ था विवाद
पूरे विवाद की नींव 23 अक्टूबर को शाहदरा थाने में हुई एक झड़प के दौरान पड़ी. आरोप था कि वकील ललित बंसल को सिर में चोट आई थी. वकीलों ने एसीपी मनस्वी वशिष्ठ पर रिवॉल्वर दिखाकर धमकी देने का आरोप लगाते हुए अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी थी. मामला बढ़ता देख 28 अक्टूबर को एसीपी वशिष्ठ को गांधी नगर एसडीपीओ पद से हटाकर एसपीयूडब्ल्यूएसी (SPUWAC) भेज दिया गया, जबकि एसएचओ अरुण कुमार का तबादला सिक्योरिटी ब्रांच में कर दिया गया. इसके बाद वकीलों ने अपनी हड़ताल वापस ली थी.
तबादले से असंतुष्ट थे पुलिसकर्मी
जवानों का तर्क है कि वकीलों के दबाव में अधिकारियों का तबादला किया जाना अनुचित है और इससे पुलिस बल के मनोबल पर विपरीत असर पड़ता है. वहीं, प्रदर्शन की सूचना मिलते ही पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर जवानों से अनुशासन बनाए रखने और सड़क पर उतरने के बजाय अंदर बैठकर वार्ता के जरिए समाधान निकालने की अपील की. हालांकि, गृह मंत्रालय के इस निलंबन आदेश के बाद विभाग के भीतर तनाव और बढ़ गया है.



