
संवाददाता
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार यूपी के विकास को लेकर काम कर रहे हैं. चाहे वो सड़क बनाने की बात हो या कोई मंदिर, चाहे वो किसान की बात हो या महिला… सीएम हर किसी को सशक्त बनाना चाहते हैं. अब दिवाली से पहले एक बार फिर अपना खजाना खोल दिया. इस बार प्रहरियों को बड़ी सौगात दी है. उन्होंने आज यानी 13 अक्टूबर को बरेली पुलिस लाइन मैदान में आयोजित कार्यक्रम में भाग लिया. इस दौरान मंच से 68 हजार ग्राम प्रहरियों के मानदेय को बढ़ाने की घोषणा की. अब प्रहरियों का मानदेय 2500 रुपये से बढ़कर 3500 रुपये होगा. इसके साथ ही, ग्राम प्रहरियों और उनके परिवार को प्रति वर्ष पांच लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा भी मिलेगी.
यूपी बदल चुका है
सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश बदल चुका है और बरेली इसका सबसे बड़ा प्रमाण है. साल 2017 से पहले त्योहारों पर उपद्रव होते थे. अब लोग सुरक्षित माहौल में पर्व मना रहे हैं. आज मंदिरों में भीड़ उमड़ रही है और उत्सव का माहौल है. यह माहौल लोगों के विश्वास के कारण है कि वे सुरक्षित हैं. उन्होंने इस बदलाव को सामूहिक प्रयास से संभव बताया. उन्होंने आगे कहा कि पुलिस को अच्छी ट्रेनिंग मिल रही है. इन सुविधाओं का लाभ होमगार्ड, पीआरडी और ग्राम प्रहरियों को भी मिलना चाहिए. 2017 से पहले ग्राम प्रहरियों का मानदेय 1500 रुपये था. उनकी सरकार ने 2019 में मानदेय बढ़ाकर 2500 रुपये किया था. उसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए अब यह मानदेय 3500 रुपये कर दिया गया है. ग्राम प्रहरी अपने गांव में रहकर सूचना एकत्र करें और अपने थानाध्यक्ष या दरोगा को उपलब्ध करा दें. सीएम योगी ने गांव में ग्राम प्रहरियों की भूमिका को सीसीटीवी की तरह बताया.
उन्होंने बरेली और मुरादाबाद के शिक्षक मतदाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि 2017 के बाद शिक्षा को फिर से खड़ा किया गया. सबसे पहला प्रण नकल विहीन परीक्षा पूरा किया. शिक्षक युग निर्माता होता है. पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम ने हमेशा अपने को शिक्षक के रूप में प्रस्तुत किया. डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने अपने को शिक्षक के रूप में प्रस्तुत किया. शिक्षकों के आशीर्वाद से 2017 में यूपी में बीजेपी की सरकार बनी. उत्तर प्रदेश में बिना भेदभाव से सरकारी नौकरी दी गई. उत्तर प्रदेश बीमारू राज्य से मजबूत अर्थव्यवस्था के रूप में उभरा.
सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश के नागरिकों को दूसरे राज्य में अपमानित किया जाता था. आज उत्तर प्रदेश के नागरिकों को गले लगाया जाता है. बेसिक और माध्यमिक में शिक्षक ही नहीं थे. शिक्षकों की व्यवस्था की गई. ऑपरेशन कायाकल्प से स्कूलों के भवन बनवाए गए. नकल विहीन परीक्षा होने से उत्तर प्रदेश की शिक्षा पर लोगों का भरोसा मजबूत हुआ. पहले माध्यमिक की परीक्षा में 6 महीना लगते थे अब परीक्षा होने के 14 दिन के भीतर परिणाम आएगा. बरेली में त्योहारों से पहले दंगा होता था. अब बरेली के दंगाई जेल में उर्स मना रहे हैं, बाप दादा की संपत्ति से भी हाथ धोना पड़ेगा. पहले बरेली की पहचान झुमके से अब नाथ नगरी से हो रही है. बरेली को पौराणिक पहचान मिली है.



