
संवाददाता
नई दिल्ली । दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव 2026 के फाइनल नतीजे आ चुके हैं. नॉर्थ कैंपस के इस हाई-वोल्टेज सियासी दंगल ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि डीयू की सियासत में हवा का रुख किस तरफ है. एबीवीपी ने 4 में से 3 अहम पदों पर शानदार कब्जा जमाकर अपनी ताकत का लोहा मनवाया है. वहीं, एनएसयूआई के हाथ इस बार भी निराशा ही लगी है. डूसू चुनाव के इन नतीजों ने केवल छात्र संघ की जीत-हार का फैसला नहीं किया है. इसने देश की मुख्यधारा की राजनीति को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है.
क्या कहते हैं एबीवीपी की जीत के मायने?
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की इस बड़ी जीत के बाद संगठन के अंदर और बाहर इसे राष्ट्रवाद, सकारात्मक राजनीति और कैंपस विकास के एजेंडे की जीत के रूप में देखा जा रहा है. एबीवीपी समर्थकों का मानना है कि चुनाव के दौरान कांग्रेस और एनएसयूआई की तरफ से जितने भी तीखे राजनीतिक हमले या मुद्दे उछाले गए, उनका असर आम छात्रों पर जरा भी नहीं पड़ा. छात्रों ने जुबानी बहसों के बजाय उन उम्मीदवारों पर भरोसा जताया जो सालभर उनके मुद्दों के लिए सड़क पर संघर्ष करते नजर आए. नॉर्थ कैंपस के कॉलेजों में एबीवीपी की पकड़ इस बात का प्रमाण है कि संगठन का जमीनी नेटवर्क और छात्र संपर्क अभियान चुनाव के आखिरी दिनों में गेम-चेंजर साबित हुआ.
ख्यधारा की राजनीति से क्यों पिछड़ रहा है हाथ का साथ?
डूसू के फाइनल नतीजों के बाद कांग्रेस समर्थित एनएसयूआई के प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक गलियारों में बड़े सवाल खड़े होने शुरू हो गए हैं. पिछले कुछ चुनावों की तरह इस बार भी एनएसयूआई मुख्य पदों पर वो जादुई करिश्मा नहीं दिखा पाई, जिसकी उम्मीद पार्टी के बड़े नेता कर रहे थे. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एनएसयूआई और युवाओं के बीच अब पुराना और गहरा जुड़ाव नहीं दिख रहा है. जब देश की सबसे प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी में युवा विकल्प तलाशते हैं तो विपक्ष की कमजोरी उनके संगठनात्मक ढांचे और रणनीति पर सवाल खड़े करती है. अगर समय रहते पार्टी ने अपनी रणनीति नहीं बदली तो छात्रों के बीच उनकी पकड़ और कमजोर हो सकती है.
नॉर्थ कैंपस के बड़े संस्थानों का मिजाज: SRCC से लेकर हिंदू कॉलेज तक ने किसे चुना?
डूसू चुनाव की असली चाल और ताकत हमेशा नॉर्थ कैंपस के प्रतिष्ठित कॉलेजों से तय होती है. एसआरसीसी (SRCC), हिंदू कॉलेज, हंसराज कॉलेज, किरोड़ीमल कॉलेज, रामजस कॉलेज और डीयू की लॉ फैकल्टी जैसे बड़े संस्थानों में इस बार मतदान का जो पैटर्न देखने को मिला, उसने चुनाव की दिशा तय कर दी. इन एलीट और पॉश संस्थानों में छात्रों का झुकाव मुख्य रूप से मुद्दों, कैंपस की सुविधाओं और प्रैक्टिकल लीडरशिप की तरफ रहा. इन कॉलेजों में एबीवीपी का मजबूत प्रदर्शन और कुछ सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों को मिला जबरदस्त समर्थन बताता है कि छात्र अब किसी हवा में बहने के बजाय अपने कॉलेज और फैकल्टी के स्तर पर सोच-समझकर फैसला ले रहे हैं.
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भविष्य की राजनीति पर असर: क्या डूसू के नतीजे तय करेंगे आने वाले कल की राष्ट्रीय दिशा?
दिल्ली यूनिवर्सिटी को देश की नर्सरी कहा जाता है. यहां से निकलने वाले छात्र नेता कल की राष्ट्रीय राजनीति की कमान संभालते हैं. यही वजह है कि डूसू चुनाव के इन नतीजों को सिर्फ एक यूनिवर्सिटी के चुनाव तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता. एबीवीपी की 3 सीटों वाली शानदार जीत ने राष्ट्रीय स्तर पर संदेश दे दिया है कि युवा वर्ग किस विचारधारा के साथ मजबूती से खड़ा है. क्या यह नतीजा आने वाले समय में अन्य राज्यों के छात्र चुनावों या मुख्यधारा की राजनीति को प्रभावित करेगा? इसका जवाब हां में है.. डीयू का मूड देशभर के युवाओं की मानसिक स्थिति और राजनीतिक प्राथमिकताओं का सटीक आईना माना जाता है.
अध्यक्ष पद के विजेता: एबीवीपी
- एबीवीपी: 24,576 मत
- एनएसयूआई: 22,523 मत
- लेफ्ट: 5,377 मत
- एएसएपी: 1,388 मत
उपाध्यक्ष पद के विजेता: निर्दलीय
- निर्दलीय: 30,615 मत
- एबीवीपी: 16,910 मत
- एनएसयूआई: 4,313 मत
- लेफ्ट: 2,383 मत
सचिव पद के विजेता: एबीवीपी
- एबीवीपी: 21,650 मत
- एनएसयूआई: 14,869 मत
- लेफ्ट: 8,734 मत
- एएसएपी: 7,639 मत
संयुक्त सचिव पद के विजेता: एबीवीपी
- एबीवीपी: 16,615 मत
- एससीएस: 15,778 मत
- एनएसयूआई: 15,206 मत
- लेफ्ट: 5,837 मत



