
संवाददाता
नई दिल्ली । दिल्ली में दिल्ली परिवहन निगम के संविदा कर्मचारियों की हड़ताल लगातार पांचवें दिन में प्रवेश कर चुकी है. हड़ताल के कारण राजधानी की सड़कों पर बसों का अकाल पड़ा हुआ है. विभिन्न बस स्टॉपों पर घंटों इंतजार करने के बाद भी यात्रियों को बसें नहीं मिल पा रही हैं, जिससे आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.
करोल बाग और आसपास के इलाकों में बस स्टॉप पर खड़े यात्रियों ने अपना दर्द बयां किया. श्याम नामक यात्री ने बताया कि मैं पिछले 20-25 सालों से डीटीसी बसों में यात्रा कर रहा हूं. लेकिन ऐसी स्थिति पहले कभी नहीं देखी. घंटे भर से बस का इंतजार कर रहे हैं. सामान्य तौर पर बसों में 20-25 रुपये में काम हो जाता है, लेकिन अब ऑटो वाले 150 से 250 रुपये तक मांग रहे हैं, जिससे जेब पर भारी असर पड़ रहा है.
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घंटों इंतजार, जेब पर अतिरिक्त बोझ
इसी तरह बस के इंतजार में बैठी सरोज ने बताया कि वह पिछले 15 सालों से डीटीसी में सफर कर रही हैं. उन्होंने बताया कि बसें नहीं आने से ऑटो का सहारा लेना पड़ रहा है. ऑटो वाले 100-150 रुपये मांग रहे हैं, जिससे घर का बजट पूरी तरह गड़बड़ा गया है. सरकार को चालकों और परिचालकों की समस्याओं का जल्द समाधान निकालना चाहिए.
महिलाओं की सुरक्षा और सुविधाओं पर असर
निजी क्षेत्र में कार्यरत कोमल शर्मा का कहना है कि महिलाओं के लिए डीटीसी बसें सबसे सुरक्षित और सुविधाजनक माध्यम हैं. उन्होंने बताया कि रोज बसों में सफर करते हैं और ड्राइवर-कंडक्टर हमेशा हमारे साथ सम्मानजनक व्यवहार करते हैं. लेकिन बसों के न चलने से टाइम मैनेजमेंट और डेली बजट दोनों बिगड़ गए हैं. सरकार को कर्मचारियों की मांगें मानकर जल्द से जल्द समाधान करना चाहिए, क्योंकि डीटीसी दिल्ली के यातायात की रीढ़ की हड्डी है.
डीटीसी और दिल्ली बस नेटवर्क से संबंधित प्रमुख आंकड़े
गौरतलब, दिल्ली में रोजाना लगभग 40 लाख से अधिक यात्री डीटीसी और क्लस्टर बसों में सफर करते हैं. बसों की अनुपलब्धता के कारण ऑटो-रिक्शा, कैब और ई-रिक्शा के किराए में 150 फीसदी से 200 फीसदी तक की वृद्धि देखी जा रही है, जिससे आम नौकरीपेशा लोगों का दैनिक परिवहन खर्च 3 से 4 गुना बढ़ गया है.
दिल्ली में वर्तमान में लगभग 7,500+ बसें संचालित होती हैं, जिनमें इलेक्ट्रिक बसें भी शामिल हैं. साथ कुल ड्राइवरों और कंडक्टरों में से लगभग 60 फीसदी से अधिक कर्मचारी अनुबंध आधार पर काम कर रहे हैं. इसके अलावा दिल्ली सरकार की मुफ्त यात्रा योजना के तहत रोजाना औसतन 15 लाख से अधिक महिलाएं पिंक पास के माध्यम से बसों में मुफ्त सफर करती हैं. जनता की मांग है कि दिल्ली सरकार और डीटीसी प्रशासन तुरंत हस्तक्षेप कर कर्मचारियों की समस्याओं का निपटारा करे ताकि सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था दोबारा पटरी पर लौट सके.



