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ऐसा लगता है शुभेंदु अधिकारी ने तृणमूल कांग्रेस को ख़त्म करके ही मानेंगे ?

संवाददाता

नई दिल्ली। बंगाल में ममता बनर्जी को दो बड़े झटके लगे। नंदीग्राम में ममता ने जिस महिला को उम्मीदवार बनाया था, उसने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात से पहले अचानक अपना पर्चा वापस ले लिया। ममता ने फौरन कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन देने का ऐलान कर दिया, लेकिन शाम को पुलिस ने उसे हत्या के किसी पुराने मामले में गिरफ्तार कर लिया।

दूसरा झटका मिला चुनाव आयोग से।चुनाव आयोग ने ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस पार्टी के नाम और चुनाव निशाल को freeze कर दिया। ममता की पार्टी को नाम दिया “ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस” और अरुप राय की पार्टी को नाम दिया “डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस”। ममता को फुटबॉल चुनाव निशान दिया और अरुप राय की पार्टी को लिफाफा निशान दिया। ममता ने इस फैसले को लोकतंत्र के लिए काला दिन बताया, कहा, वो सुप्रीम कोर्ट में इसे चुनौती देंगी।

शुभेंदु अधिकारी ने कहा, ये सब ममता के पापों का फल है, ममता ने सनातन को गाली दी, राम मंदिर के उद्घाटन के दिन कोलकाता में रैली निकाली, इसलिए ममता को प्रभु राम का ग़ुस्सा झेलना पड़ रहा है। ममता बनर्जी ने कहा, चुनाव आयोग और बीजेपी मिलकर विपक्ष को ख़त्म कर रहे हैं, इसके ख़िलाफ़ मिलकर लड़ना होगा, अब वो INDI alliance को मज़बूत करेंगी।

राहुल गांधी और अखिलेश यादव ने ट्विटर पर आरोप लगाया कि बीजेपी ने चुनाव आयोग के साथ मिलकर पहले उद्धव ठाकरे की शिव सेना को तोड़ा, फिर शरद पवार की एनसीपी में सेंध लगाई और अब ममता बनर्जी की पार्टी को खत्म किया जा रहा है, ये देश में लोकतन्त्र की हत्या है।

ममता बनर्जी ने कांग्रेस का दामन शौक़ से नहीं थामा। ये उनकी मजबूरी है। जाएं तो जाएं कहां? नंदीग्राम से उनकी उम्मीदवार छोड़कर चली गईं, चुनाव आयोग ने पार्टी का चुनाव निशान freeze कर दिया, पार्टी का नाम बदल दिया और ममता इन सबके लिए बीजेपी को ज़िम्मेदार न ठहराएं, तो किसे ठहराएं? पर उन्हें ये सोचना चाहिए कि आख़िरकार ये सब क्यों हुआ? जनता ने उन्हें चुनाव क्यों हराया? हार के कुछ ही हफ़्तों के अंदर ज़्यादातर MLAs और MPs ममता को छोड़कर क्यों चले गए?

ममता को ये भी सोचना चाहिए कि इस बार कांग्रेस ने उचक कर उनका साथ क्यों दिया? उनसे सहानुभूति क्यों जताई? दरअसल, कांग्रेस की अपनी परेशानी है। DMK ने कहा है कि वो गैर-कांग्रेसी पार्टियों के साथ मिलकर एक तीसरा मोर्चा बनाएगी। कनीमोझी कालीघाट जाकर ममता बनर्जी से मिली थीं। उन्होंने उद्धव ठाकरे और सुप्रिया सुले से भी नए alliance में शामिल होने की बात की है। केजरीवाल पंजाब में कांग्रेस से लड़ रहे हैं। कम्यूनिस्ट केरल में कांग्रेस के ख़िलाफ़ लड़े थे। अब अगर ये सब DMK के साथ चले गए तो INDIA bloc का क्या होगा? INDIA bloc अगर ख़त्म हुआ तो फिर कांग्रेस का क्या होगा ? कांग्रेस को यही चिंता सताए जा रही है। कांग्रेस को ममता से प्यार नहीं है, INDIA alliance के अस्तित्व को बचाने की मजबूरी है।

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