
संवाददाता
नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के धरना प्रदर्शन में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के साथ भूख हड़ताल शुरू करने वाले जेएनयू के तीनों छात्रों और आइसा पदाधिकारियों ने आज सुबह 10 बजे अपना अनशन तोड़ दिया. आइसा की ऑल इंडिया प्रेसिडेंट एवं जेएनयू से पीएचडी कर रही नेहा, मनीष और आमीन ने सांसदों मनोज झा, राजाराम सिंह, अमरा राम के साथ-साथ डॉ. योगेंद्र यादव, एडवोकेट प्रशांत भूषण, प्रो. अतुल सूद और अभिनेता प्रकाश राज व अभिनेत्री शबाना आज़मी के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल की अपील पर अपनी भूख हड़ताल खत्म की.
इन नेताओं ने तीनों स्टूडेंट को पानी पिलाकर अनशन तुड़वाया. शबाना आजमी ने कहा कि बारिश के बीच, तीन छात्रों ने अन्याय के खिलाफ़ लड़ने के जज़्बे में एक नई मिसाल कायम की है. डॉ. योगेंद्र यादव ने कहा कि यह भूख हड़ताल तोड़ना नहीं है, बल्कि संघर्ष के इस तरीके का समापन है. डॉ. मनोज झा ने कहा कि आपने जो हासिल किया है, वह बहुत बड़ा है, क्योंकि यह सरकार हर मोर्चे पर बेनकाब हो गई है.
शबाना आज़मी ने कहा कि एक पीढ़ी के तौर पर हम अपनी जेन जी (नई पीढ़ी) का भला करने में नाकाम रहे हैं. लेकिन आप लोगों ने हमें आगे का रास्ता दिखाया है. बिहार के काराकाट से सीपीआई एमएल के सांसद राजाराम सिंह ने कहा कि आज से आपका संघर्ष लोकतंत्र के सदन में भी गूंजेगा. आपने पूरे विपक्ष को लड़ने का रास्ता दिखाया है. उन्होंने कहा कि संघर्ष के जज्बे और संकल्प के बीच 23 दिनों की लगातार लड़ाई के बाद यह भूख हड़ताल खत्म हुई और अब संघर्ष दूसरे तरीकों से जारी रहेगा.
आइसा के अन्य कार्यकर्ताओं ने कहा कि मोदी सरकार की बेरुखी के खिलाफ़ बड़ी लड़ाई लड़ने वाले नेहा, मनीष और आमीन को लाल सलाम. उन्होंने कहा कि छात्र नेताओं ने बहादुरी से लड़ाई लड़ी है. उन सभी का शरीर का वज़न 12% से ज़्यादा कम हो गया है. साथ ही उन्हें खतरनाक रूप से कम ब्लड शुगर लेवल और अपने अंगों पर गंभीर असर का सामना करना पड़ा. आइसा की ओर से कहा गया कि जंतर-मंतर पर हुई ऐतिहासिक भूख हड़ताल की मांगों को उठाते हुए संसद सत्र के साथ-साथ धर्मेंद्र प्रधान, एनटीए और NEP 2020 के खिलाफ़ हम एक महीने का अभियान चलाएंगे. हमारी लड़ाई जवाबदेह शिक्षा प्रणाली के लिए संघर्ष को आगे बढ़ाने की ओर जारी रहेगी.



