
संवाददाता
नई दिल्ली। एयर फेयर में अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव और निजी एयरलाइनों द्वारा लगाए जाने वाले सहायक शुल्कों पर अंकुश लगाने के लिए नियामक दिशानिर्देशों की मांग करने वाली एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र को दो सप्ताह के भीतर भारतीय विमान अधिनियम, 2024 के तहत बनाए गए नियमों को उसने सामने रखने का निर्देश दिया।
शीर्ष अदालत ने सरकार से नियमों को सीलबंद लिफाफे में पेश करने को कहा, भले ही उन्हें संसद के समक्ष रखा गया हो।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने यह आदेश तब पारित किया जब केंद्र ने उसे सूचित किया कि मसौदा नियम तैयार हैं और वर्तमान में अनुवाद के दौरा से गुजर रहे हैं।
यात्री सुरक्षा और स्वतंत्र विमानन नियामक की मांग
भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024, जो जनवरी 2025 में लागू हुआ, का उद्देश्य देश के विमानन क्षेत्र को आधुनिक बनाना है, जबकि इसके साथ जुड़े नियमों को अभी तक अधिसूचित नहीं किया गया है। यह मामला अधिक पारदर्शिता और यात्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक मजबूत और स्वतंत्र विमानन नियामक की मांग करने वाली याचिका से उपजा है।
याचिकाकर्ता ने तर्क दिया है कि नियामक निरीक्षण की अनुपस्थिति ने निजी एयरलाइंस को अप्रत्याशित मूल्य निर्धारण और सहायत शुल्क लगाने की अनुमति ही है, खासकर हाई डिमांड के समय।



