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गाजीपुर लैंडफिल साइट का मंत्री आशीष सूद ने किया निरीक्षण, बोले- 31 जुलाई तक बढ़ेगी कचरा निस्तारण की रफ्तार

गाजीपुर लैंडफिल साइट का मंत्री आशीष सूद ने किया औचक निरीक्षण, अधिकारियों को दिए कड़े निर्देश.

संवाददाता

नई दिल्ली। दिल्ली के कूड़े के पहाड़ गाजीपुर लैंडफिल को लेकर दिल्ली के नगर विकास मंत्री आशीष सूद ने शुक्रवार को गाजीपुर लैंडफिल साइट का सघन दौरा किया और वहां चल रहे बायोमाइनिंग कार्यों की समीक्षा की. इस दौरान मंत्री सूद ने न केवल काम की धीमी गति पर अधिकारियों को फटकार लगाई, बल्कि कचरे के ढेर को तेजी से खत्म करने के लिए सख्त दिशा-निर्देश भी जारी किए. मंत्री ने स्पष्ट किया कि 31 जुलाई तक कचरा निस्तारण की क्षमता को 7,000 टन प्रतिदिन से बढ़ाकर 12,000 टन प्रतिदिन करना अनिवार्य है.

अप्रैल 2026 के ड्रोन सर्वे के अनुसार, साइट पर 67.81 लाख मीट्रिक टन कचरा था, जो अब घटकर 66.68 लाख मीट्रिक टन रह गया है. सरकार का लक्ष्य दिसंबर 2027 तक गाजीपुर को कचरा मुक्त करना है. इस दौरान मौके पर मौजूद दिल्ली नगर निगम (MCD) के वरिष्ठ अधिकारियों ने मंत्री को कूड़ा निस्तारण के लिए किए जा रहे प्रयासों और अब तक की प्रगति की भी विस्तृत जानकारी दी.

कचरे के पहाड़ को जड़ से खत्म करने का संकल्प

दौरे के दौरान मंत्री आशीष सूद ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी के विजन और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार लैंडफिल साइटों को वैज्ञानिक तरीके से खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है. गाजीपुर का यह लैंडफिल साल 1984 से संचालित है और करीब 70 एकड़ में फैला है. 2019 में एनजीटी के निर्देशों के बाद भी यह लगातार बढ़ता गया और इसकी ऊंचाई 65 मीटर तक पहुंच गई थी. मंत्री ने कहा कि अब इसे ‘परमानेंट सॉल्यूशन’ के जरिए खत्म किया जाएगा.

फेज-II में मिली बड़ी सफलता

मंत्री आशीष सूद ने बताया कि फरवरी 2025 में वर्तमान सरकार के गठन के बाद से बायोमाइनिंग प्रक्रिया में तेजी आई है. फेज-I (नवंबर 2022 से नवंबर 2024) के दौरान 30 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य था, लेकिन मात्र 13.90 लाख मीट्रिक टन का ही निपटान हो पाया था. इसके उलट, 7 मार्च 2025 को शुरू हुए फेज-II में अब तक लगभग 24 लाख मीट्रिक टन कचरे का निस्तारण किया जा चुका है. इतना ही नहीं, करीब 20 एकड़ भूमि को कचरा मुक्त कराकर उसे पुनर्जीवित भी किया गया है.

ताजा कचरे के निस्तारण के लिए बनेगा अलग एक्शन प्लान

निरीक्षण के दौरान आशीष सूद ने कचरा प्रबंधन की राह में आ रही दो बड़ी बाधाओं की पहचान की. पहली चुनौती रोजाना साइट पर आने वाला ताजा कचरा है. शाहदरा जोन से प्रतिदिन करीब 2,400-2,500 टन कचरा यहां पहुंचता है. इसमें से 800 टन कचरा अभी भी सीधे लैंडफिल में गिर रहा है. मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ताजा कचरे को बायोमाइनिंग वाले पुराने कचरे से पूरी तरह अलग रखा जाए. इसके लिए दो महीने के भीतर एक ठोस ‘फ्रेश वेस्ट प्रोसेसिंग एक्शन प्लान’ बनाकर मंत्रालय में जमा करने को कहा गया है.

मिट्टी (इनर्ट) के निस्तारण के लिए बढ़ेंगे वाहन

दूसरी बड़ी समस्या बायोमाइनिंग के बाद निकलने वाले इनर्ट (मिट्टी और अन्य पदार्थ) के निस्तारण की थी. इसके लिए गाजीपुर से 23 किमी दूर स्थित एनटीपीसी इको पार्क को चिह्नित किया गया है. मंत्री ने एजेंसी को निर्देश दिए कि इनर्ट उठाने वाले वाहनों की संख्या तुरंत बढ़ाई जाए और एक हफ्ते के भीतर अनुपालन रिपोर्ट पेश की जाए, ताकि काम की रफ्तार न थमे. मंत्री आशीष सूद ने स्पष्ट कर दिया है कि अब गाजीपुर लैंडफिल का काम ढिलाई से नहीं चलेगा. उन्होंने घोषणा की है कि इस पूरे प्रोजेक्ट की साप्ताहिक समीक्षा की जाएगी. उन्होंने खुद अगले महीने दोबारा साइट का दौरा करने की बात कही है.

निरीक्षण के बाद कैबिनेट मंत्री आशीष सूद ने गाजीपुर लैंडफिल साइट पर चल रहे कार्यों पर संतोष जताया. उन्होंने कहा कि दिल्ली के तीनों लैंडफिल साइट को चरणबद्ध तरीके से खत्म करना सरकार की प्राथमिकता है. ओखला और भलस्वा लैंडफिल साइट पर तेजी से कूड़ा कम किया जा रहा है, जबकि गाजीपुर में जगह की कमी और निकलने वाले इनर्ट को हटाने की चुनौती है, जिसे दूर करने के प्रयास किए जा रहे हैं.

मंत्री सूद ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के कारण कूड़े और इनर्ट को सड़कों के नीचे डालने की अनुमति नहीं है. वर्तमान में गाजीपुर से निकलने वाले इनर्ट को करीब 23 किलोमीटर दूर बायो पार्क भेजा जा रहा है, साथ ही इसकी प्रक्रिया को और तेज करने पर काम किया जा रहा है.

दैनिक निस्तारण लक्ष्य: 7,000 TPD से बढ़ाकर 12,000 TPD (31 जुलाई तक).

मौजूदा स्थिति: 66.68 लाख मीट्रिक टन कचरा शेष.
अंतिम लक्ष्य: दिसंबर 2027 तक पूर्ण निस्तारण.
बदलाव: ताजा कचरा और पुराना कचरा अलग-अलग प्रोसेस होगा.
निगरानी: साप्ताहिक समीक्षा बैठक अनिवार्य.
गाजीपुर लैंडफिल साइट पर चल रहे कार्यों पर जताया संतोष

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