
संवाददाता
अयोध्या। राम मंदिर के दान चोरी को लेकर बड़ी खबर सामने आ रही है. दरअसल, राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े 2 पदाधिकारियों के इस्तीफे की जानकारी सामने आई है. सूत्रों की माने तो राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्ट से जुड़े अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया है. वहीं, गोपाल राय ने भी खुद को इससे अलग कर लिया है. हालांकि, वह राम मंदिर के ट्रस्ट में किसी पद पर नहीं हैं.
गौरतलब है, राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच के दायरे को विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष आलोक कुमार ने बढ़ाए जाने की मांग की थी. उन्होंने कहा कि चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव के खिलाफ भी जांच हों, ये लोग जांच से बाहर नहीं हैं. वहीं विपक्ष भी लगातार सवाल कर रहा था कि आखिर चंपत राय पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है. उनसे इस्तीफा क्यों नहीं मांगा जा रहा है. इस बीच, चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे की खबर सामने आना बहुत बड़ी बात है.
यह कदम एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में मिली मजबूत सिफारिशों के बाद उठाया गया है. एसआईटी की सिफारिश के आधार पर मामले में पहली एफआईआर पहले ही दर्ज की जा चुकी है. इन इस्तीफों को जांच के दौरान की गई कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है. बता दें कि चंपत राय और अनिल मिश्रा का नाम एफआईआर में नहीं था लेकिन फिर भी दोनों ने नैतिकता के आधार पर पद छोड़ दिया है. उनके नामों पर सियासत बहुत तेज थी.
बैठक में मांगा गया इस्तीफा
बताया जा रहा है कि वीएचपी और आरएसएस के दवाब में चंपत राय ने इस्तीफा दिया है. हालांकि, ट्रस्ट की एक बैठक नृत्य गोपालदास के घर पर हुई थी. इस दौरान चंपत राय और अनिल मिश्रा से इस्तीफा मांगा गया. इस पर दोनों ने इस्तीफा दे दिया. इससे पहले, राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, अनुकल्प मिश्र, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडेय, लवकुश मिश्र, रमाशंकर मिश्र, सुभाष श्रीवास्तव और मनीष यादव पर नामजद FIR दर्ज कराई गई. इन सभी पर चोरी, आपराधिक विश्वासघात और आपराधिक षड़यंत्र समेत विभिन्न आरोपों के तहत केस दर्ज किया गया है. वहीं, सभी 8 नामजद आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. इन लोगों से पूछताछ चल रही है.
कौन हैं चंपत राय?
चंपत राय विश्व हिंदू परिषद (VHP) के वरिष्ठ नेता और अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं. वर्तमान में अयोध्या में राम मंदिर का प्रबंधन और निर्माण करने वाले ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ के महासचिव हैं. मगर अब इस्तीफे की बात सामने आ रही है. उनका जन्म 18 नवंबर 1946 में उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के नगीना में हुआ था. वह रसायन विज्ञान (Chemistry) के प्रोफेसर रह चुके हैं. 6 दिसंबर 1992 में विवादित ढांचे के ढहाए जाने के समय भी वे अयोध्या में ही मौजूद थे. इस आंदोलन के उग्र दौर में वे वीएचपी के प्रमुख चेहरों- जैसे अशोक सिंघल और विनय कटियार के बेहद करीबी और भरोसेमंद बनकर उभरे.
अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण और प्रबंधन के लिए 5 फरवरी 2020 को ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ का गठन हुआ था, जिसकी घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं संसद में की थी. सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद अस्तित्व में आए इस 15 सदस्यीय ट्रस्ट की पहली बैठक में महंत नृत्य गोपाल दास को अध्यक्ष और राम मंदिर आंदोलन के रणनीतिकार व विश्व हिंदू परिषद के वरिष्ठ नेता चंपत राय को महासचिव चुना गया था.
कौन हैं अनिल मिश्रा?
डॉ. अनिल मिश्र आम्बेडकर नगर के रहने वाले हैं. यह सरकारी होम्योपैथिक डॉक्टर के पद पर तैनात थे. फैजाबाद के लक्ष्मणपुरी कॉलोनी में रहते हैं. साथ ही आरएसएस के प्रांतीय पदाधिकारी के साथ होम्योपैथिक बोर्ड के चेयरमैन भी रह चुके हैं. सरकारी सेवा से रिटायर होने के बाद मंदिर निर्माण ट्रस्ट के ट्रस्टी के तौर पर भागीदारी कर रहे हैं. अनिल मंदिर ट्रस्ट के स्थायी 11सदस्यों मे से एक थे.
फिर से अयोध्या जा सकती है SIT
बता दें कि एसआईटी एक बार फिर से अयोध्या जा सकती है. प्राइमरी रिपोर्ट के बाद कुछ नए नाम पहचाने गए हैं. गिरफ्तार लोगों से पूछताछ और इन नामों पर जांच और इकट्ठे किए गए डेटा के विश्वलेषण के लिए जांच एजेंसी फिर से अयोध्या जा सकती है.
इस्तीफे पहले ही हो जाने चाहिए थे-सपा सांसद
फैजाबाद से सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा कि ये इस्तीफे तो जांच से पहले ही हो जाने चाहिए थे. एफआईआर में इनके नाम भी होने चाहिए थे. जिनकी जिम्मेदारी चढ़ावे के लोखे-जोखे की थी, उनसे तो पहले ही इस्तीफे लेने चाहिए थे. उन्होंने कहा कि राम मंदिर में करोड़ों लोग आकर चढ़ावा चढ़ाते हैं और माथा टेकते हैं, ये देश और पूरे राष्ट्र का सवाल है. मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की अगुवाई में जांच होनी चाहिए. वहीं कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला ने कहा कि सिर्फ चंपत राय के इस्तीफे से क्या होगा. यह काफी नहीं है. उनसे भी बड़े नाम शामिल हैं. बता दें कि विरोधी बार-बार कह रहे थे कि छोटी मछलियों को पकड़ा गया है. बड़ी मछलियों पर कोई एक्शन नहीं लिया जा रहा. लेकिन अब दो महत्वपूर्ण लोगों ने इस्तीफा दे दिया है.



