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किसके इशारे पर हो रही है साहिबाबाद विधानसभा में टिकट के लिए “शर्मा बनाम शर्मा” की गॉशिप ?

संवाददाता

गाजियाबाद। अगले साल 2027 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए गाजियाबाद में कुछ स्थानीय नेताओं ने अभी से लॉबिंग शुरू कर दी है। लेकिन टिकट की चाह में कुछ नेता ज्‍यादा ही उतावले हो रहे हैं । भले ही उन पर ‘न तीन में ना तेरह में’ वाली कहावत लागू होती है लेकिन वे सपना देख रहे है जिले के सबसे कद्दावर विधायक की टिकट कटने का। दिलचस्‍प बात ये है कि यूपी में दो बार सबसे ज्‍यादा वोटों से जीत हासिल करने का रिकार्ड बनाने वाले विधायक इस वक्‍त प्रदेश में कैबीनेट मिनी‍स्‍टर भी हैं। लेकिन उनकी टिकट काटकर विवादों में रहे एक पूर्व महानगर अध्‍यक्ष को टिकट दिए जाने के दावों से कथित माहौल बनाया जा रहा है।

सोशल मीडिया पर डाली जा रही हैं इस तरह की पोस्‍ट

इन दिनों सोशल मीडिया और चंद छुटभैय्या अखबारों में साहिबाबाद विधानसभा को लेकर मजेदार गॉशिप चल रही है। जिस पर राजनीति से जुड़े लोग खूब चटकारे ले रहे हैं। दरअसल ये खबरे बीजेपी के पूर्व महानगर अध्‍यक्ष अजय शर्मा और साहिबाबाद विधानसभा में दो बार सबसे बड़े अंतर से जीत हासिल करने वाले कैबीनेट मंत्री सुनील शर्मा को लेकर है। सोशल मीडिया पर कुछ वीडियों और पोस्‍ट वायरल हो रही है । जिसमें 2027 में होंने वाले विधानसभा चुनाव में साहिबाबाद विधानसभा चुनाव में टिकट के दावेदारों में शर्मा बनाम शर्मा की लडाई को लेकर खबरे चल रही हैं। छुटभैय्ये अखबारों, गुमनाम से सोशल मीडिया इन्‍फ्लूएंसर के जरिए फैलाई जा रही इन खबरों को कौन चलवा रहा है इनका आधार क्‍या इसका कोई सिर पैर नहीं है। लेकिन इन पर कमेंट करने वाले दावा कर रहे हैं कि साहिबाबाद से दो बार सुनील शर्मा को टिकट मिला है अबकी बार पूर्व महानगर अध्‍यक्ष अजय शर्मा को टिकट मिलने की दावेदारी बेहद मजबूत है, 2022 के चुनाव में उनको टिकट नहीं दिया गया था। हांलाकि ऐसी तमाम पोस्‍ट पर पूर्व महानगर अध्‍यक्ष अजय शर्मा ‘जो पार्टी और हाईकमान तय करेगा और जिम्‍मेदारी देगा उन्‍हें मंजूर है’ ये कमेंट करके ऐसा संदेश देने की कोशिश जरूर कर रहे हैं कि इन खबरों के पीछे उनका कोई हाथ नहीं है। लेकिन इन पोस्‍ट में एकतरफ उनके पक्ष में कमेंट देखकर साफ पता चल जाता है कि इन खबरों और राजनीतिक गॉशिप के पीछे कौन है।

बता दें कि अजय शर्मा भाजपा के सदस्यता अभियान के प्रदेश संयोजक रहे हैं । 2017 में वे गाजियाबाद में भाजपा के महानगर अध्‍यक्ष थे। लेकिन 2022 में जब विधानसभा के टिकट बांटे गए तो सुनील शर्मा को टिकट मिलने से पहले अजय शर्मा ने बागी तेवर अपना लिए थे। फेसुबक पर उन्होंने अपना दर्द बयान करते हुए पार्टी के बड़े नेताओं पर आवाज दबाने का आरोप लगाते हुए पोस्ट साझा की थी। अजय शर्मा साहिबाबाद विधानसभा क्षेत्र से दावेदारी कर रहे थे।

दिलचस्‍प बात ये है कि 2017 और 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने जिले की पांचों सीटों पर जीत दर्ज करके, विपक्ष का सूपड़ा साफ कर दिया था। साहिबाबाद विधानसभा सीट पर सुनील शर्मा ने वर्ष 2022 में हुए विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत हासिल की थी,  उनको प्रदेश सरकार ने मंत्रीमंडल में भी जगह दी है। अब इस सीट पर भाजपा के पूर्व महानगर अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता अजय शर्मा भी दावेदारी ठोक रहे हैं, उन्होंने क्षेत्र में अपनी सक्रियता भी बढ़ाई है।

हांलाकि पार्टी में टिकट मांगने का अधिकार सभी को है,  हर दावेदार पार्टी को अपना बायोडाटा देते हैं। किस विधानसभा सीट पर किसे प्रत्याशी बनाया जाना है, इसका निर्णय संगठन के शीर्ष नेतृत्व व कोर कमेटी द्वारा किया जाता है। लेकिन दो बार साहिबाबाद व एक बार शहर सीट से विधायक रह चुके सुनील शर्मा अपनी ईमानदार छवि और हिन्‍दूवादी नेता के रूप में अपनी छवि ऐसी गढ चुके है कि स्‍थानीय नेताओं में उनकी गिनती दिग्‍गजों के रूप में होती है। शहर के वरिष्‍ठ भाजपाईयों को ही मानना है कि सुनील शर्मा को साहिबाबाद से टिकट कटना टेढी खीर है । उनके उपर न तो कोई दाग है न ही कभी उनका विवादों से नाता रहा है। विधानसभा के सबसे पिछड़े खोडा इलाके में विकास कार्यो के पीछे भी उनकी ही मेहनत है।

जबकि दूसरी तरफ पूर्व महानगर अध्‍यक्ष जिनके लिए मीडिया के जरिए ये लॉबिंग चल रही है उनका कद न तो सुनील शर्मा की तरह विशालकाय है। उपर से विवादों से भी उनका पुराना नाता रहा है।

पार्टी के ही कुछ नेता बताते हैं कि राजनगर में दिसंबर 2017 को एक हिंदू महिला और मुस्लिम युवक के बीच स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत हुई शादी का विरोध करने और उनके घर रिसेप्शन के दौरान भीड़ के साथ घुसकर हंगामा करने के कारण प्रदेश बीजेपी इकाई ने उन्हें महानगर अध्यक्ष के पद से तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया था। इससे पहले जुलाई 2017 में  अध्यक्ष पद पर रहते हुए गोविंदपुरम में अपने होटल के बाहर पैठ (बाजार) लगने के विरोध में एक व्यापारी को धमकाने को लेकर भी उनका विवाद सामने आया था।  साहिबाबाद विधानसभा सीट से टिकट न मिलने की आशंका पर उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से पार्टी के बड़े नेताओं पर आवाज दबाने का आरोप लगाया था।जिसको लेकर वे पहले ही हाई कमान के आखों की किरकिरी बने हुए है।

 

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