
संवाददाता
गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश में बीजेपी की नई टीम बननी है लेकिन इसके लिए पार्टी कार्यकर्ताओं के इंतजार की घड़ियां खत्म नहीं हो पा रहीं। खबर है कि तेरे-मेरे के फेर में सूची अटकी है। कुछ ‘बड़ों’ ने अपने चहेतों के लिए प्रतिष्ठा दांव पर लगा रखी है। हालांकि पार्टी सूत्रों का कहना है कि अधिकांश चेहरे चिन्हित हो चुके हैं। कई नेताओं के प्रमोशन की तैयारी है। छह मौजूदा क्षेत्रीय अध्यक्षों में से कई को प्रदेश टीम में जगह मिलने जा रही है। वहीं मोर्चों से भी मुख्य टीम में भागीदारी मिलेगी।
प्रदेश के नेताओं में एकराय न बन पाने के चलते ही दिल्ली में भी सूई अटक गई है। फिलहाल, जो सूची फाइनल हुई है, उसमें प्रदेश महामंत्रियों और उपाध्यक्षों में खासा बदलाव दिख रहा है जबकि अभिजात मिश्रा, डा. चंद्रमोहन, अर्चना मिश्रा, शिवभूषण सिंह, शंकर लोधी का प्रमोशन होने की संभावना है। प्रदेश महामंत्री अमर पाल मौर्या के केंद्रीय टीम में जाने की संभावना है जबकि संजय राय व रामप्रताप चौहान का रिपीट होना प्रस्तावित है। प्रियंका मौर्या को उपाध्यक्ष बनाया जा सकता है।
प्रदेश मंत्री शंकर गिरि अगर रिपीट हुए तो इसका लाभ कई और प्रमुख पदाधिकारियों को हो सकता है, क्योंकि फिर 10 साल वाला फार्मूला प्रभावी नहीं रहेगा।मोर्चा अध्यक्षों की भी मजबूत दावेदारीउपाध्यक्षों में बृजबहादुर, देवेश कोरी, दिनेश चंद्र शर्मा, मानवेंद्र सिंह, त्रयंबक त्रिपाठी,भाजपा नेता डा. नीरज सिंह, कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र के उपाध्यक्ष अनिल यादव व प्रदेश प्रवक्ता डा. समीर सिंह की भी मजबूत दावेदारी है। प्रदेश मंत्री विजय शिवहरे, अमित वाल्मीकि, एमएलसी साकेत मिश्रा का भी नाम हैं।
युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष प्रांशुदत्त द्विवेदी, महिला मोर्चा अध्यक्ष गीता शाक्य, एससी मोर्चा के अध्यक्ष रामचंद्र कनौजिया और किसान मोर्चा के अध्यक्ष कामेश्वर सिंह भी प्रमुख दावेदार हैं।काशी-अवध और गोरक्ष के क्षेत्रीय अध्यक्षों पर पेंचपार्टी सभी छह क्षेत्रीय अध्यक्षों को बदलने जा रही है। फिलहाल, काशी, गोरखपुर के साथ ही अवध क्षेत्र के क्षेत्रीय अध्यक्ष पर अंतिम मुहर नहीं लग पाई है। अवध क्षेत्र में विधायक आशीष सिंह आशू, एमएलसी मुकेश शर्मा और अवनीश पटेल के अलावा शंकर लोधी भी अध्यक्ष पद के दावेदार हैं। सभी मौजूदा क्षेत्रीय अध्यक्ष प्रकाश पाल, दिलीप पटेल, दुर्गविजय शाक्य, कमलेश मिश्रा व सहजानंद राय भी रेस में शामिल हैं। इनमें ज्यादातर का समायोजन होने की संभावना है।



