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एयरपोर्ट व अन्य संस्थानों की सुरक्षा प्राइवेट सिक्योरिटी को देने की तैयारी

नरेंद्र भल्ला

नयी दिल्ली। देश की आंतरिक सुरक्षा को और अधिक मजबूत करने के मकसद से केंद्र सरकार आने वाले दिनों में कुछ अहम फैसले लेने की तैयारी में है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक इसमें एक महत्वपूर्ण फैसला यह लिये जाने की संभावना है कि देश के एयरपोर्ट्स और ऊर्जा जैसे अहम सार्वजनिक संस्थानों की सुरक्षा का जिम्मा प्राइवेट सुरक्षा एजेंसियों के हाथों में सौंप दिया जाए। फिलहाल यह कार्य सीआईएसएफ के पास है। सरकार का विचार है कि इस फ़ोर्स को वहां से हटाकर आंतरिक सुरक्षा संभालने की अहम जिम्मेदारी दी जाये, ताकि पुलिस बल की कमी और उस पर बढ़ते हुए दबाव को कम करते हुए इसे पूरी तरह से चाकचौबंद किया जाये।

सूत्रों के अनुसार इसकी योजना पर तेजी से काम हो रहा है और सरकार इसके लिये निजी सुरक्षा के सबसे बड़े संगठन सेंट्रल एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट सिक्योरिटी इंडस्ट्री यानी “कैप्सी”से विचार-विमर्श कर रही है। गृह मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक इसके लिये पहले निजी सुरक्षा गार्ड्स को प्रोफेशनल तरीके से ट्रेनिंग दी जायेगी। सीआईएसएफ के इंस्ट्रक्टर पहले “कैप्सी” के चुनिंदा कुशल इंस्ट्रक्टर को यह ट्रेनिंग देंगे और फिर वे निजी सुरक्षा गार्ड्स को प्रशिक्षित करेंगे। गौरतलब है कि कैप्सी के देश भर में करीब 170 ट्रेनिंग सेंटर हैं।

उल्लेखनीय है कि फिलहाल देश में करीब 35 हजार रजिस्टर्ड प्राइवेट सिक्योरिटी एजेंसियां हैं जिनमें करीब एक करोड़ सुरक्षा गार्ड कार्यरत हैं। ये सभी कैप्सी की सदस्य हैं,उस लिहाज से यह अपैक्स बॉडी है। 17 जून को दिल्ली में इस संगठन की गवर्निंग कौंसिल की बैठक हुई,जिसमें इंडस्ट्री से जुड़े तमाम मुद्दों पर चर्चा हुई। कैप्सी के चेयरमैन कैप्टेन कुंवर विक्रम सिंह ने पिछले छह महीनों की गतिविधियों का लेखा-जोखा प्रस्तुत करते हुए इस बात पर जोर दिया कि आंतरिक सुरक्षा को लेकर निकट भविष्य में प्राइवेट सिक्युरिटी की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होने वाली है,लिहाजा हमें कौशल-विकास व ट्रेनिंग पर खास ध्यान देने की जरुरत है। देश भर से आये संगठन के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए उन्होंने बताया कि लाइसेंस प्राप्त करने में आने वाली दिक्कतों को दूर करने को लेकर गृह मंत्रालय के अधिकारियों के साथ निरंतर बैठकें हुई हैं और इसके सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। इंडस्ट्री से जुड़े तमाम मुद्दों का समाधान निकालने के लिये गृह मंत्रालय व अन्य कंट्रोलिंग अथॉरिटी के साथ 25 जून को दिल्ली में

होने वाली है जॉइंट वर्कशॉप

इस अवसर पर रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल अशोक शिवाने और बीएसएफ के पूर्व महानिदेशक एम एल कुमावत ने आंतरिक सुरक्षा में प्राइवेट सिक्योरिटी की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि 2047 तक देश को “सुरक्षित भारत” बनाने का मोदी सरकार का जो संकल्प है,उसमें सबसे बड़ी भूमिका निजी सुरक्षा की ही रहेगी,इसलिये एजेंसियों के संचालकों को बेहद गंभीरता व जिम्मेदारी से अपने रोल को समझना होगा और इसमें नई टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल पर जोर देना होगा।

इस मौके पर गुजरात के पूर्व पुलिस महानिदेशक अनिल प्रथम ने “सर्टिफाइड कॉरपोरेट इन्वेस्टिगेटर” कोर्स को लांच करते हुए बताया कि भविष्य में यह क्षेत्र बेहद महत्वपूर्ण होने वाला है,लिहाजा एजेंसी संचालकों को अपने कुछेक काबिल गार्ड्स को यह कोर्स करवाना,अपनी प्राथमिकता बनाना होगा। कैप्सी के महासचिव महेश चंद्र शर्मा ने कहा कि पिछले दो दशक के सफर में हमारे सामूहिक प्रयासों का ही ये नतीजा है कि आज सरकार ने भी प्राइवेट सिक्युरिटी के महत्व को समझा है,इसलिये अब समाज व देश के प्रति हमारी जिम्मेदारी और अधिक बढ़ गई है।

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