
संवाददाता
नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल में ऐतिहासिक जीत के बाद भारतीय जनता पार्टी के सुवेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री बन गए हैं। सीएम पद की शपथ लेते ही सुवेंदु जहां बंगाल में बीजेपी के पहले मुख्यमंत्री बन गए वहीं, वे 11वें ऐसे नेता बन गए जिनका राजनीतिक करियर दूसरी पार्टी से शुरू हुआ था। लेकिन, बाद में बीजेपी में शामिल हुए और मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे।
सुवेंदु इकलौते ऐसे नेता नहीं है, जिनका राजनीतिक बैकग्राउड बीजेपी का न होते हुए भी सीएम बनाया गया है। दरअसल, बीजेपी अब तक सुवेंदु समेत ऐसे 11 मुख्यमंत्री बना चुकी है, जिनकी राजनीतिक पारी कांग्रेस या फिर किसी अन्य पार्टी से शुरू हुई। लेकिन, बीजेपी में एंट्री के बाद उनकी सियासत परवान चढ़ी और पार्टी ने उन्हें सीएम बनाकर राजनीतिक अहमियत देने का काम किया। ये बताता है कि बीजेपी में दूसरे दल के बागियों को पूरा सम्मान मिलता है और ‘ताज’ भी पहनाया जाता है। हालांकि विपक्ष के दृष्टिकोण से ये भी कहा जाता है कि बीजेपी के पास या तो काबिल नेताओं को अभाव है या बीजेपी को पार्टी के मौलिक कार्यकर्ताओं की कद्र नहीं हैं।
कांग्रेस से राजनीतिक सफर शुरू करने वाले सुवेंदु अधिकारी ने तृणमूल कांग्रेस में ममता बनर्जी का दाहिना हाथ बनकर काम किया और अब भाजपा की सरकार के सीएम बने हैं। 15 अप्रैल 2026 को बिहार के 24वें और भाजपा के पहले मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने वाले सम्राट चौधरी राजनीतिक सफर भी लालू यादव की आरजेडी से शुरू हुआ और 2014 में नीतिश कुमार की जेडीयू से होते हुए 2017 में भाजपा में शामिल होने तक रहा।
असम विधानसभा में बीजेपी को 2016 में पहली बार बंपर जीत मिलने के बाद बीजेपी ने मुख्यमंत्री की कुर्सी पर जिन सर्बानंद सोनोवाल को बिठाया उनका राजनीतिक सफर भी ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन के साथ शुरु हुआ था। बाद में सोनोवाल असम गढ़ परिषद में भी रहे। हाल ही में हुए असम विधानसभा में बीजेपी ने लगातार तीसरी बार बंपर जीत दर्ज करके सरकार बनाई है। बीजेपी ने हिमंत बिस्वा सरमा को लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री बनाया। हिमंता का बैकग्राउंड भी बीजेपी का नहीं है और ना ही वह संघ की पाठशाला से निकले हैं। हिमंत सरमा ने कांग्रेस के साथ अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी। गौरव गगोई के पिता तरुण गोगोई की सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे लेकिन, 2015 में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए। पहले मंत्री और फिर मुख्यमंत्री का ताज मिला।
अरुणाचल प्रदेश में तीन बार के मुख्यमंत्री और दो बार बीजेपी की सरकार में सीएम का ताज पहनने वाले पेमा खांडू का राजनीतिक सफर भी कांग्रेस के साथ शुरू हुआ था। उनके पिता दिवंगत दोरजी खांडू अरुणाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार के सीएम रहे हैं।
अरुणाचल प्रदेश में लंबे समय तक कांग्रेस के मुख्यमंत्री रहे गेगोंग अपांग जब साल 2014 में अपने समर्थकों के साथ कांग्रेस छोड़कर भाजपा में चले गए तो बीजेपी ने उन्हें ईनाम में मुख्यमंत्री का ताज पहनाया। इसी तरह मणिपुर में 2017 में पहली बार सरकार बनाने वाली बीजेपी ने जब एन बीरेन सिंह को मुख्यमंत्री बनाया था। लेकिन बीरेन सिंह का राजनीतिक इतिहास न तो बीजेपी का था और ना ही स्वयंसेवक संघ से उनका कोई जुड़ाव था। बीरेन का राजनीतिक सफर डेमोक्रेटिक रिवोल्यूशनरी पीपल्स पार्टी से शुरू हुआ था फिर वह कांग्रेस में शामिल हो गए। मणिपुर हिंसा के चलते जब 2025 में बीरेन सिंह को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा तो बीजेपी ने युमनाम खेमचंद सिंह को सीएम बनाया जो बीरेन सिंह के साथ डेमोक्रेटिक रेवोल्यूशनरी पीपुल्स पार्टी में रहे।
त्रिपुरा में बीजेपी के मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा ने भी अपना राजनीतिक सफर कांग्रेस के साथ शुरू किया था। झारखंड में बीजेपी सरकार के मुख्यमंत्री रहे अर्जुन मुंडा का राजनीतिक सफर भी झारखंड मुक्ति मोर्चा से शुरू हुआ था।
दक्षिण भारत के पहले राज्य कर्नाटक में सरकार बनाने के बाद जब बीजेपी ने येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री से हटाया तो उनकी जगह मुख्यमंत्री बने बसवराज बोम्मई का राजनीतिक सफर भी 1992 में जनता दल के साथ शुरू हुआ था।



