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केजरीवाल की राह पर सिसोदिया, जस्टिस स्वर्णकांता को लिखी चिट्ठी: लिखा- ‘नहीं पेश करेंगे वकील, अब सत्याग्रह ही रास्ता’

मनीष सिसोदिया ने हाई कोर्ट की जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को लिखी चिट्ठी ,कहा मुझे अब इस व्यवस्था से न्याय की कोई उम्मीद नहीं बची है.

संवाददाता

नई दिल्ली । दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया ने दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को एक बेहद भावुक और तीखी चिट्ठी लिखी है. अरविंद केजरीवाल द्वारा सोमवार को अपनाए गए रुख के नक्शेकदम पर चलते हुए सिसोदिया ने स्पष्ट कर दिया है कि अब उनकी ओर से अदालत में कोई वकील पेश नहीं होगा. सिसोदिया ने अपनी चिट्ठी के जरिए न केवल न्यायिक प्रणाली पर सवाल उठाए हैं, बल्कि केंद्र सरकार और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पर भी तीखा हमला बोला है.

न्याय की उम्मीद नहीं, अब होगा सत्याग्रह

मनीष सिसोदिया ने अपने पत्र में गहरे असंतोष और हताशा का इजहार करते हुए लिखा, “मुझे अब इस व्यवस्था से न्याय की कोई उम्मीद नहीं बची है.” उन्होंने आगे कहा कि जिस तरह की परिस्थितियां बनी हैं, उनमें अब सत्याग्रह के अलावा कोई दूसरा विकल्प शेष नहीं रह गया है. सिसोदिया का यह बयान राजनीति के गलियारों में हलचल पैदा कर रहा है, क्योंकि यह सीधे तौर पर न्यायपालिका और जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर अविश्वास प्रकट करता है. दिल्ली आबकारी घोटाले में नामजद अरविंद केजरीवाल की तरह ही मनीष सिसोदिया समेत कुल 23 लोग आरोपी हैं. जिन्हें गत फरवरी माह में निचली अदालत से राहत मिली थी. लेकिन सीबीआई द्वारा हाई कोर्ट का रुख करने से मामला जस्टिस स्वर्णकान्ता शर्मा की अदालत में विचाराधीन है.

केजरीवाल के फैसले का किया समर्थन

बता दें कि इससे पहले अरविंद केजरीवाल ने भी इसी तरह का कड़ा रुख अपनाया था. सिसोदिया ने अपनी चिट्ठी में साफ किया कि वह केजरीवाल के उस फैसले के साथ खड़े हैं जिसमें उन्होंने कानूनी प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी से खुद को अलग करने की बात कही थी. सिसोदिया ने लिखा कि जब तक सच्चाई को स्वीकार नहीं किया जाता, तब तक कोर्ट में वकीलों की दलीलों का कोई अर्थ नहीं रह जाता. सिसोदिया की इस चिट्ठी के बाद राजधानी की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है. आम आदमी पार्टी के सूत्रों का कहना है कि पार्टी अब इसे ‘जनता की अदालत’ में ले जाने की तैयारी कर रही है. वहीं, भाजपा ने इसे न्यायिक प्रक्रिया पर दबाव बनाने का एक ‘पब्लिसिटी स्टंट’ करार दिया है. कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि आरोपियों द्वारा वकील न पेश करने का फैसला कानूनी पेचीदगियों को और बढ़ा सकता है. फिलहाल, जस्टिस स्वर्णकांता को लिखी गई यह चिट्ठी सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक मंचों तक चर्चा का विषय बनी हुई है.

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