
संवाददाता
गाजियाबाद। गाजियाबाद पुलिस ने एक लाख के इनामी धर्मेंद्र उर्फ ‘टिड्डी’ को एनकाउंटर में मार गिराया। मुठभेड़ बुधवार शाम साढ़े 6 निवाड़ी क्षेत्र में गंग नहर पटरी पर हुई। दोनों ओर से 20 राउंड गोलियां चलीं। इसमें दो गोलियां धर्मेंद्र को सीने और गर्दन में लगीं।
धर्मेंद्र उर्फ टिंडी उर्फ टिड्डी बावरिया गिरोह का सदस्य था। वह गाजियाबाद के लोनी का रहता था। लेकिन वह मूल रूप से अमरोहा का रहने वाला था, वहां उसके खिलाफ अमरोहा में कोई मुकदमा दर्ज नहीं था।
पुलिस के मुताबिक, वह गाजियाबाद, बागपत, शामली और मुजफ्फरनगर में चोरी, लूट और डकैती की वारदात करता था। उस पर गाजियाबाद और बागपत से 50-50 हजार रुपए का इनाम घोषित था। एनकाउंटर के बाद उसकी जेब से 2270 रुपए मिले।

धर्मेंद्र गाजियाबाद और बागपत में डकैती की वारदात करता था।
पिछले एक साल से गाजियाबाद और बागपत पुलिस उसे तलाश रही थी। मुठभेड़ में तीन पुलिसकर्मी विनीत, अमित और हिमांशु गोली लगने से घायल हुए हैं। उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
2 पिस्टल से पुलिस टीम पर की फायरिंग
पुलिस कमिश्नर जे. रविंदर गौड ने बताया- मुखबिर से धर्मेंद्र के बारे में सूचना मिली थी। एडिशनल डीसीपी क्राइम पीयूष सिंह के नेतृत्व में क्राइम ब्रांच की टीम को गंग नहर पटरी पर लगाया गया था। इसी दौरान धर्मेंद्र अपने दो दोस्तों के साथ बाइक से आता दिखा।
पुलिस ने रुकने का इशारा किया तो धर्मेंद्र ने टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में उसे भी दो गोली लगीं। पुलिस टीम ने इलाज के लिए उसे निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां धर्मेंद्र की मौत हो गई। मौके से 2 पिस्टल भी बरामद हुई हैं।

फरार बदमाशों को तलाश रही पुलिस
घटनास्थल पर पहुंचे एडिशनल पुलिस कमिश्नर केशव कुमार चौधरी ने बताया कि बाइक पर तीन बदमाश सवार थे। धर्मेंद्र को गोलियां लगते ही दो बदमाश अंधेरे का फायदा उठाकर भाग निकले। उनकी तलाश में पुलिस की चार टीमें लगाई गई हैं।
धर्मेंद्र पर मेरठ रेंज के डीआईजी और गाजियाबाद पुलिस कमिश्नर की ओर से 50-50 हजार रुपए का इनाम घोषित था। उस पर लूट, डकैती, गैंगस्टर और चोरी समेत 17 मामले दर्ज थे। वह गाजियाबाद में डकैती और बागपत में लूट-डकैती के दो मामलों में फरार था।
2017 में पहली बार दर्ज हुआ था केस
धर्मेंद्र उर्फ टिड्डी उर्फ बावरिया के खिलाफ पहला मुकदमा अप्रैल 2017 में शामली के गढ़ीपुख्ता थाने में चोरी के मामले में दर्ज हुआ था। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा था। जेल से बाहर आने के बाद वह फिर चोरी के मामले में पकड़ा गया। पुलिस के अनुसार, इसके बाद उसने अपना गैंग बना लिया और पश्चिमी यूपी के कई जिलों में वारदात करने लगा। 2017 में मुजफ्फरनगर पुलिस ने उस पर 5 हजार रुपए का इनाम घोषित किया था। बाद में गाजियाबाद और बागपत में भी उसके खिलाफ मामले दर्ज हुए और इनाम बढ़कर एक लाख रुपए हो गया। पुलिस के मुताबिक, वर्ष 2019 में भी धर्मेंद्र को पैर में गोली मारकर गिरफ्तार किया गया था। जेल से जमानत पर बाहर आने के बाद वह फिर वारदात करने लगा। मसूरी क्षेत्र में लूट के दौरान पिता-पुत्र पर चाकू से हमला करने का भी उस पर आरोप था। साल 2019 में धर्मेंद्र पर शामली पुलिस की ओर से 15 हजार और गाजियाबाद पुलिस की ओर से 25 हजार रुपए का इनाम घोषित हुआ था। इसी साल मुठभेड़ के दौरान उसके पैर में गोली लगी थी, जिसके बाद उसे गिरफ्तार किया गया था।

जेल से छूटने के बाद धर्मेंद्र ने 8 नवंबर, 2024 को बागपत के खेकड़ा इलाके में रात के समय घर में घुसकर चोरी की। 27 फरवरी 2025 को फिर इसी इलाके में घर में घुसकर चोरी को अंजाम दिया था। 29 जून, 2025 को धर्मेंद्र ने गाजियाबाद के मसूरी इलाके में घर में घुसकर मारपीट और चाकू से जानलेवा हमला किया था।
दीपावली से पहले बड़ी वारदात की तैयारी में था
पुलिस के अनुसार, धर्मेंद्र कई साल से अमरोहा स्थित अपने गांव नहीं गया था। वह लगातार अपना ठिकाना बदलता रहता था और मोबाइल फोन का इस्तेमाल भी नहीं करता था। पुलिस और एसटीएफ उसकी तलाश कर रही थीं। पुलिस का दावा है कि वह दीपावली से पहले बड़ी लूट की तैयारी में था।

इन मामलों में चल रहा था फरार
पुलिस के मुताबिक, धर्मेंद्र बागपत के खेकड़ा क्षेत्र में 8 नवंबर 2024 और 27 फरवरी 2025 को घरों में हुई चोरी के मामलों में फरार था। इसके अलावा 29 जून 2025 को गाजियाबाद के मसूरी क्षेत्र में लूट के इरादे से घर में घुसकर पिता-पुत्र पर चाकू से हमला करने के मामले में भी उसकी तलाश की जा रही थी।



