
संवाददाता
नई दिल्ली। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने कहा कि संगठन और मैं पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे. उन्होंने कहा कि जिस तरह से शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को रोकने के लिए पीस बॉन्ड का उपयोग किया जा रहा है, वह संविधान से मिले लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार के खिलाफ है. एसआईआर के विरोध और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए नेहा बोरा ने पुलिस की कार्रवाई और जारी किए गए नोटिस पर सवाल उठाए. उन्होंने बताया कि दिल्ली हाई कोर्ट ने पुलिस को नोटिस जारी करने के आधार से जुड़ी सामग्री उपलब्ध कराने और आगे की कार्यवाही में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है.
पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर करना अपने अधिकार छोड़ने जैसा
नेहा बोरा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि लोकतंत्र का अर्थ केवल चुनाव कराना नहीं है, बल्कि नागरिकों को अपने मताधिकार और दूसरे अधिकारों पर हमले के खिलाफ आवाज उठाने का अवसर देना भी है. उन्होंने कहा कि एसआईआर के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं. ऐसे में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना नागरिकों की जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा कि AISA पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर करके लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार को सीमित करने की प्रक्रिया को सामान्य नहीं बनाना चाहता. उन्होंने कहा कि संगठन को शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने में कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन शांति का अर्थ यह नहीं हो सकता कि सरकार से सवाल पूछना बंद कर दिया जाए.

अभिजीत दीपके के मामले का भी किया जिक्र
नेहा बोरा ने CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके के मामले का जिक्र करते हुए कहा कि पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने के बावजूद उनके खिलाफ कार्रवाई की गई. उन्होंने कहा कि दीपके के हाथ में तिरंगा होने के बावजूद उन्हें हिरासत में लिया गया. नेहा ने 16 अक्टूबर को मंडी हाउस में प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि संविधान नागरिकों को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी असहमति जाहिर करने का अधिकार देता है. ऐसे में पीस बॉन्ड की व्याख्या और उसका उपयोग इस तरह नहीं होना चाहिए कि लोग अपने संवैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल करने से डरने लगें.
आम लोगों के अधिकारों पर सवाल उठाना शांति भंग करना नहीं
Delhi: AISA President Neha Bora says, "When our right to vote was taken away in this democracy, we took to the streets. You saw all those protests. You saw that, apart from raising slogans and carrying banners, people did nothing that could be described as undemocratic. All the… pic.twitter.com/YQpHLCVAaB
— IANS (@ians_india) October 24, 2026
नेहा बोरा ने कहा कि यदि लोगों के अधिकारों का हनन होता है और वे उसके खिलाफ आवाज नहीं उठाते, तो क्या इसे ही शांति माना जाएगा. उन्होंने सवाल किया कि सरकार और चुनाव व्यवस्था से जवाब मांगना कब से शांति भंग करने की श्रेणी में आने लगा. उन्होंने कहा कि पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर नहीं करने का फैसला एसआईआर के खिलाफ चल रहे आंदोलन से अलग नहीं है. यह इस बात से भी जुड़ा है कि आने वाले समय में नागरिकों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का अधिकार मिलना चाहिए. नेहा बोरा ने उम्मीद जताई कि अदालत इस मामले में संवैधानिक अधिकारों और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों को ध्यान में रखेंगी. उन्होंने दोहराया कि AISA शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार की रक्षा के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेगा और मौजूदा स्वरूप में पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर नहीं करेगा.
SEM के सामने आज पेश होंगे नेहा बोरा
नेहा बोरा ने कहा कि पीस बॉन्ड मामले में दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद संगठन के कार्यकर्ता विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट (SEM) के सामने पेश होंगे. उन्होंने उम्मीद जताई कि SEM अदालत के आदेश का पालन करते हुए प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का ध्यान रखेंगे. नेहा ने कहा कि AISA शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार की रक्षा के लिए अपनी कानूनी लड़ाई जारी रखेगा.



