
संवाददाता
नई दिल्ली। आज से शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व मां दुर्गा की आराधना के साथ शुरू हो गया है. नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है. इस दिन घटस्थापना करने के बाद शैलपुत्री की पूजा अर्चना की जाती है. शैल का अर्थ है हिमालय, पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के बाद माता पार्वती को शैलपुत्री भी कहा जाता है. इस दिन से कुछ भक्त नौ दिन का व्रत रखते हैं तो कुछ प्रतिपदा और अष्टमी तिथि का व्रत करते हैं. मान्यता है कि विधि-विधान और श्रद्धा से मां शैलपुत्री की पूजा करने से जीवन में सुख-शांति, साहस और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है. आइए जानते हैं मां शैलपुत्री की पूजा विधि, प्रिय भोग और मंत्र.
मां शैलपुत्री की पूजा विधि
नवरात्रि के पहले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें. इसके बाद पूजा स्थल की साफ-सफाई करके मां दुर्गा और मां शैलपुत्री की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें. नवरात्रि की शुरुआत में घटस्थापना करने की परंपरा भी है. इसके बाद मां को रोली, अक्षत, सफेद फूल, धूप और दीप अर्पित करें. मां शैलपुत्री का ध्यान करते हुए दुर्गा मंत्रों का जाप करें और श्रद्धापूर्वक आरती करें. भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार व्रत भी रख सकते हैं.
मां शैलपुत्री को किस चीज का भोग लगाएं?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां शैलपुत्री को सफेद रंग प्रिय माना जाता है. इसलिए पूजा में सफेद फूल, दूध, दूध से बनी मिठाई और गाय के घी का भोग अर्पित किया जाता है. कई भक्त मां को सफेद मिठाई या खीर का भोग भी लगाते हैं. भोग अर्पित करने के बाद उसे प्रसाद के रूप में परिवार के सदस्यों में बांट सकते हैं.
घटस्थापना करते समय पूजा स्थल की साफ-सफाई और पवित्रता का ध्यान रखना चाहिए.
1. पूजा स्थल तैयार करें: सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा स्थान को साफ करें. मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें.
2. जौ बोएं: मिट्टी के पात्र में साफ मिट्टी डालकर उसमें जौ बो दें और थोड़ा जल छिड़कें.
3. कलश तैयार करें: कलश में जल या गंगाजल भरें. परंपरा के अनुसार उसमें सुपारी, अक्षत और सिक्का डालें. कलश के मुख पर आम या अशोक के पत्ते रखें.
4. नारियल स्थापित करें: नारियल को लाल कपड़े में लपेटकर कलश के ऊपर स्थापित करें. कलश को जौ वाले पात्र के पास रखें.
5. मां दुर्गा की पूजा करें: रोली, अक्षत, फूल, धूप और दीप अर्पित करें. मां दुर्गा का ध्यान करके पूजा, मंत्र जाप और आरती करें.
घटस्थापना पूजा मुहूर्त 2026
कलश स्थापना का मुहूर्त: सुबह में 06:19 ए एम से 10:12 ए एम तक
दोपहर में कलश स्थापना मुहूर्त: 11:44 ए एम से लेकर 12:31 पी एम तक
नवरात्रि के पहले दिन के मुहूर्त और योग
ब्रह्म मुहूर्त: प्रात: 04:40 बजे से लेकर 05:30 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: 11:44 ए एम से दोपहर 12:31 बजे तक
द्विपुष्कर योग: रात 09:30 बजे से लेकर रात 10:32 बजे तक
वैधृति योग: प्रात:काल से लेकर रात 09:05 बजे तक
चित्रा नक्षत्र: प्रात:काल से लेकर रात 10:32 बजे तक
मां शैलपुत्री का मंत्र
ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः।
वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्।।
पूणेन्दु निभां गौरी मूलाधार स्थितां प्रथम दुर्गा त्रिनेत्राम्॥
पटाम्बर परिधानां रत्नाकिरीटा नामालंकार भूषिता॥
कमनीयां लावण्यां स्नेमुखी क्षीणमध्यां नितम्बनीम् ॥
नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नम:।

शैलपुत्री मां बैल पर सवार। करें देवता जय जयकार।
शिव शंकर की प्रिय भवानी। तेरी महिमा किसी ने ना जानी।
पार्वती तू उमा कहलावे। जो तुझे सिमरे सो सुख पावे।
ऋद्धि-सिद्धि परवान करे तू। दया करे धनवान करे तू।
सोमवार को शिव संग प्यारी। आरती तेरी जिसने उतारी।
उसकी सगरी आस पुजा दो। सगरे दुख तकलीफ मिला दो।
घी का सुंदर दीप जला के। गोला गरी का भोग लगा के।
श्रद्धा भाव से मंत्र गाएं। प्रेम सहित फिर शीश झुकाएं।
जय गिरिराज किशोरी अंबे। शिव मुख चंद्र चकोरी अंबे।
मनोकामना पूर्ण कर दो। भक्त सदा सुख संपत्ति भर दो।
जोर से बोलो जय माता दी, सारे बोले जय माता दी



