
संवाददाता
नई दिल्ली । मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी दलों के हंगामे ने लुटियंस दिल्ली को रणभूमि में बदल दिया है। पिछले एक हफ्ते से जारी विरोध-प्रदर्शनों के चलते जगह-जगह बैरिकेड्स, भारी पुलिस बल और बंद रास्तों ने दिल्ली के दिल को बंधक बना दिया है।
बृहस्पतिवार को भी विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में कनाॅट प्लेस में पार्टी कार्यकर्ताओं के जुटान, रास्ते बंद और जाम की स्थिति रही। हंगामे की आशंका से दोपहर में ही कई रेस्त्रां, दुकान और कार्यालय बंद कर दिए गए। तो कई खरीदार बीच रास्ते लौट गए। 10 अक्टूबर को सीजेपी के जंतर-मंतर मार्च की घोषणा ने कनाॅट प्लेस, जनपथ रोड, पालिका बाजार समेत अन्य बाजारों के दुकानदारों के साथ रहने वाले लोगों को भारी चिंता में डाल दिया है।

‘धरना-प्रदर्शन खुले क्षेत्रों में किया जाए’
पिछली बार जब सीजेपी का धरना प्रदर्शन 36 दिनों तक चला था, तब कनाट प्लेस और जनपथ स्थित दुकानों और रेस्त्रां का कारोबार महज 10 प्रतिशत पर आ गया था। ऐसे में उन्होंने गृहमंत्री को पत्र लिखकर उनकी आजीविका के अधिकार को सुरक्षित रखने की मांग की है।
व्यापारी संगठनों के साथ आरडब्ल्यूए ने उनसे गुहार लगाई है कि जंतर-मंतर या मध्य दिल्ली के बजाय ऐसे धरने-प्रदर्शन बुराड़ी या रामलीला मैदान जैसे बाहरी और खुले स्थलों पर आयोजित किए जाएं, ताकि आम जनता और व्यापार प्रभावित न हो।
सप्ताहभर से जारी हंगामे के चलते कनॉट प्लेस, जनपथ, मोहन सिंह प्लेस, बाबा खड़क सिंह मार्ग, पालिका बाजार और सुपर बाजार जैसे प्रमुख बाजारों में कारोबार घटकर महज 50 प्रतिशत रह गया है।
अब लोग भी आने से कतरा रहे
नई दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन (एनडीटीए) के अध्यक्ष अतुल भार्गव चिंता जताते हुए कहते हैं कि जंतर-मंतर के नजदीक होने का बड़ा खामियाजा कनाट प्लेस के दुकानदारों को उठाना पड़ रहा है। प्रदर्शनों के चलते रास्ते बाधित होने के साथ मेट्रो सेवाओं पर पाबंदियां लग जाती हैं। ऐसे में लोग खरीदारी करने व घूमने के लिए यहां आने से कतराते हैं।
व्यापारियों का कहना है कि वह किसी के विरोध प्रदर्शन के अधिकार के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन इस तरह के आयोजनों से उनकी आजीविका का अधिकार दांव पर लग रहा है। कारोबार आधा रह गया है, जिससे तय खर्चे निकालने तक में मुश्किल हो रही है।
खान मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संजीव मेहरा बताते हैं कि रास्ते बंद होने से खरीदार अन्य बाजारों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। खान मार्केट के कारोबार में 30 प्रतिशत तक की गिरावट है।
कश्मीरी गेट का 200 करोड़ रुपये का व्यापार प्रभावित
बुधवार को आम आदमी पार्टी, कांग्रेस तथा वाम दलों के कश्मीरी गेट स्थित दिल्ली चुनाव आयोग कार्यालय के बाहर अलग-अलग विरोध प्रदर्शनों से दिनभर लोथियन रोड, सुभाष मार्ग, एसपी मुखर्जी मार्ग समेत अन्य मार्गों पर यातायात प्रभावित रहा।
चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) के चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा कि उससे थोक बाजारों का कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ। स्थिति यह कि अकेले कश्मीरी गेट ऑटो पार्ट्स मार्केट का करीब 200 करोड़ का कारोबार प्रभावित हुआ।



