
संवाददाता
नई दिल्ली। दिल्ली में दो दिवसीय 18वें ब्रिक्स सम्मेलन की औपचारिक शुरुआत हो गई है. पीएम मोदी के भाषण से इस वैश्विक समिट 2026 का आगाज हुआ, जिसमें पीएम ने खुद ब्रिक्स के नेताओं के स्वागत किया. इस समिट में सर्वसम्मति से ब्रिक्स घोषणापत्र को मंजूरी मिल गई. जिसमें एकतरफा टैरिफ की निंदा से लेकर एक तरफा युद्ध न हो जैसे कई अहम मुद्दों पर बात हुई. आइए इस खबर में डिटेल में समझते हैं घोषणा पत्र की बड़ी बाते क्या रही हैं.
घोषणापत्र की प्रमुख बातें
1. BRICS की मूल भावना
ब्रिक्स के सभी सदस्य देशों ने आपसी सम्मान, संप्रभु समानता, एकजुटता, लोकतंत्र और सहमति पर जोर दिया है. इस सभी बातों को मानने पर सहमति जताई है.
विस्तारित ब्रिक्स में तीन प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग:
- राजनीतिक और सुरक्षा
- आर्थिक और वित्तीय
- सांस्कृतिक एवं लोगों के बीच संपर्क
2. ग्लोबल साउथ की आवाज मजबूत करने पर जोर
- विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं (ईएमडीसीएस) की वैश्विक संस्थाओं में ज्यादा भागीदारी की मांग.
- अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका की आवाज को वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में अधिक प्रतिनिधित्व देने की बात.
- ब्रिक्स खुद को ग्लोबल साउथ की आवाज उठाने वाले प्रमुख मंच के रूप में देखता है.
3. यूएन में सुधार
- संयुक्त राष्ट्र और खासकर यूएन सिक्योरिटी काउंसिल में सुधार की मांग दोहराई.
- इसे ज्यादा लोकतांत्रिक, प्रतिनिधित्वपूर्ण और प्रभावी बनाने पर जोर.
- भारत और ब्राजील की यूएनएससी में बड़ी भूमिका की दावेदारी का समर्थन.
- चीन और रूस ने विशेष रूप से भारत और ब्राजील की बड़ी भूमिका के समर्थन को दोहराया.
- यूएन के शीर्ष पदों में विकासशील देशों और महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाने की बात.
4. वैश्विक आर्थिक संस्थाओं में सुधार
- आईएमएफ और वर्ल्ड बैंक में विकासशील देशों की हिस्सेदारी और आवाज बढ़ाने की मांग.
- ब्रेटन वुड्स इंस्टीट्यूशंस की गवर्नेंस स्ट्रक्चर को आज की वैश्विक अर्थव्यवस्था के अनुरूप बदलने पर जोर.
- आईएमएफ कोटा और वोटिंग पावर में विकासशील देशों का हिस्सा बढ़ाने की मांग.
5. डब्ल्यूटीओ और व्यापार
- डब्ल्यूटीओ को मजबूत करने और नियम आधारित वैश्विक व्यापार व्यवस्था बनाए रखने पर जोर.
- एकतरफा टैरिफ और नॉन-टैरिफ बैरियर्स पर गंभीर चिंता.
- संरक्षणवाद से ग्लोबल ट्रेड और सप्लाई चेन्स को नुकसान की बात.
- डब्ल्यूटीओ का डिस्प्यूट सेटलमेंट मैकेनिज्म पूरी तरह बहाल करने की मांग.
- इथियोपिया और ईरान की डब्ल्यूटीओ मेंबरशिप की दावेदारी का समर्थन.
युद्ध के लेकर ये बनी सहमति
6. एकतरफा प्रतिबंधों का विरोध
- अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ लगाए गए यूनिलैटरल सैंक्शंस और सेकेंडरी सैंक्शंस का विरोध.
- ब्रिक्स का कहना है कि इनका असर आम लोगों, फूड सिक्योरिटी, हेल्थ और डेवलपमेंट पर पड़ता है.
7. युद्धों का समाधान बातचीत से
- बढ़ते जियोपॉलिटिकल टेंशंस और पोलराइजेशन पर चिंता.
- संघर्षों के समाधान के लिए डायलॉग, डिप्लोमेसी और मेडिएशन पर जोर.
- कॉन्फ्लिक्ट प्रिवेंशन और उसके मूल कारणों को दूर करने की बात.
8. परमाणु खतरे पर चिंता
- बढ़ते न्यूक्लियर रिस्क्स पर चिंता.
- न्यूक्लियर डिसआर्मामेंट, आर्म्स कंट्रोल और नॉन-प्रोलिफरेशन व्यवस्था को मजबूत करने की बात.
- आउटर स्पेस में हथियारों की होड़ रोकने का भी समर्थन.
वेस्ट एशिया / मिडिल ईस्ट
9. गाजा पर स्पष्ट रुख
- गाजा में सीजफायर लागू करने और मानवीय सहायता की निर्बाध पहुंच की मांग.
- फिलिस्तीनियों के फोर्स्ड डिस्प्लेसमेंट का विरोध.
- गाजा की डेमोग्राफिक या जियोग्राफिक स्थिति बदलने का विरोध.
- फिलिस्तीन के यूएन में फुल मेंबरशिप के समर्थन को दोहराया.
- टू-स्टेट सॉल्यूशन का समर्थन.
- 1967 की सीमाओं के आधार पर स्वतंत्र और संप्रभु फिलिस्तीन की बात, जिसकी राजधानी ईस्ट जेरूसलम हो.
10. इजराइल-फिलिस्तीन
- नागरिकों और सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा पर जोर.
- गाजा में स्टार्वेशन को वॉरफेयर के तरीके के रूप में इस्तेमाल करने और ह्यूमैनिटेरियन एड रोकने की निंदा.
- यूएनआरडब्ल्यूए के मैंडेट और भूमिका का समर्थन.
11. लेबनान
- लेबनान में सीजफायर का स्वागत.
- यूएनएससी रिजॉल्यूशन 1701 को पूरी तरह लागू करने की मांग.
- लेबनान की सॉवरेनिटी और टेरिटोरियल इंटीग्रिटी का सम्मान करने की बात.
- यूएनआईएफआईएल पर्सोनल और इंस्टॉलेशंस की सुरक्षा पर जोर.
12. सीरिया
- सीरिया की सॉवरेनिटी, इंडिपेंडेंस और टेरिटोरियल इंटीग्रिटी का समर्थन.
- सीरियन-लेड और यूएन-फैसिलिटेटेड पॉलिटिकल प्रोसेस की वकालत.
- विदेशी आतंकवादी लड़ाकों और आतंकवाद के खतरे पर चिंता.
13. सूडान
- सूडान में बिगड़ते ह्यूमैनिटेरियन क्राइसिस पर गंभीर चिंता.
- तत्काल और स्थायी सीजफायर की मांग.
- बातचीत के जरिए समाधान.
- अफ्रीकन सॉल्यूशन टू अफ्रीकन प्रॉब्लम्स के सिद्धांत का समर्थन.
- भारत के लिए महत्वपूर्ण
14. पहलगाम टेरर अटैक का उल्लेख
- ब्रिक्स ने 22 अप्रैल 2025 के जम्मू-कश्मीर आतंकी हमले की कड़ी निंदा की.
- घोषणा में कहा गया कि हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी.
- क्रॉस-बॉर्डर मूवमेंट ऑफ टेररिस्ट्स, टेरर फाइनेंसिंग और सेफ हेवन्स के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की बात.
- आतंकवाद को किसी धर्म, राष्ट्रीयता या जातीय समूह से जोड़ने का विरोध.
15. आतंकवाद के खिलाफ सहयोग
- ब्रिक्स काउंटर-टेररिज्म वर्किंग ग्रुप के काम की सराहना.
- आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने पर जोर.
- यूएन फ्रेमवर्क के तहत कॉम्प्रिहेंसिव कन्वेंशन ऑन इंटरनेशनल टेररिज्म को जल्द अंतिम रूप देने की मांग.
16. साइबर सुरक्षा
- साइबरक्राइम, रैनसमवेयर/मैलिशियस सॉफ्टवेयर, मिसइन्फॉर्मेशन, डिसइन्फॉर्मेशन और डीपफेक्स पर चिंता.
- ब्रिक्स देशों के बीच साइबर-सिक्योरिटी कोऑपरेशन बढ़ाने की बात.
- सुरक्षित और इंटरऑपरेबल डिजिटल एनवायरनमेंट पर जोर.
17. ऑनलाइन स्कैम नेटवर्क
- क्रॉस-बॉर्डर फ्रॉड और स्कैम कंपाउंड्स को गंभीर खतरा बताया.
- फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस और डिजिटल पेमेंट सिस्टम्स के दुरुपयोग को रोकने के लिए सहयोग बढ़ाने की बात.
- मनी लॉन्ड्रिंग और इल्लीगल फाइनेंशियल फ्लोज पर कार्रवाई.
18. भ्रष्टाचार और अवैध धन
- क्रॉस-बॉर्डर करप्शन, मनी लॉन्ड्रिंग और इलिसिट फाइनेंशियल फ्लोज से निपटने पर जोर.
- क्रिमिनल एसेट्स को ट्रेस और रिकवर करने के लिए ब्रिक्स कोऑपरेशन बढ़ाने की बात.
19. ड्रग्स
- अवैध ड्रग प्रोडक्शन, ट्रैफिकिंग और अब्यूज को वैश्विक खतरा बताया.
- ब्रिक्स एंटी-ड्रग एजेंसियों के बीच ऑपरेशनल और टेक्निकल कोऑपरेशन बढ़ाने का समर्थन.
- स्पेस और टेक्नोलॉजी पर क्या हुई बात
20. स्पेस कोऑपरेशन
- ब्रिक्स रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट कॉन्स्टेलेशन की उपलब्धियों की सराहना.
- स्पेस टेक्नोलॉजी का पीसफुल और डेवलपमेंटल यूज बढ़ाने की बात.
- स्पेस डेब्रिस कम करने और आउटर स्पेस की लॉन्ग-टर्म सस्टेनेबिलिटी पर जोर.
- ब्रिक्स स्पेस काउंसिल की दिशा में प्रगति का स्वागत.
21. स्पेस में हथियारों की दौड़ रोकने की बात
- आउटर स्पेस को वेपनाइजेशन और आर्म्स रेस से बचाने पर जोर.
- इसके लिए अंतरराष्ट्रीय लीगल फ्रेमवर्क की दिशा में बातचीत का समर्थन.
आर्थिक विकास
22. सस्टेनेबल और इन्क्लूसिव ग्रोथ
- ब्रिक्स ने सस्टेनेबल डेवलपमेंट और इन्क्लूसिव इकोनॉमिक ग्रोथ को प्राथमिकता बताया.
- अलग-अलग देशों की नेशनल प्रायोरिटीज और डेवलपमेंट स्टेजेस का सम्मान करते हुए प्रैक्टिकल सॉल्यूशंस पर जोर.
23. ग्लोबल इनइक्वालिटी
- देशों के भीतर और देशों के बीच बढ़ती इनइक्वालिटी को बड़ी वैश्विक चुनौती बताया.
- गरीबी उन्मूलन को सस्टेनेबल डेवलपमेंट की सबसे जरूरी शर्तों में से एक बताया.
- साउथ अफ्रीका और ब्राजील के इंटरनेशनल पैनल ऑन इनइक्वालिटी के प्रस्ताव को नोट किया.
24. हेल्थ कोऑपरेशन
- ब्रिक्स देशों के बीच हेल्थ कोऑपरेशन बढ़ाने की प्रतिबद्धता.
- यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज के लिए रेजिलिएंट और पीपल-सेंटर्ड अप्रोचेज पर जोर.



