
संवाददाता
नई दिल्ली । दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में बिल्डिंग हादसे के बाद दिल्ली नगर निगम (MCD) ने राजधानी की खतरनाक इमारतों को लेकर अपनी कार्रवाई तेज करने की तैयारी कर ली है. 7 सितंबर को MCD के संबंधित विभागों को खतरनाक इमारतों से जुड़ी सर्वे रिपोर्ट दोबारा भेजी गई है. न्यूज18इंडिया के पास इस सर्वे रिपोर्ट की एक्सक्लूसिव कॉपी है. रिपोर्ट के मुताबिक, सर्वे में कुल 62 इमारतों को खतरनाक घोषित किया गया था. इनमें से 20 इमारतों के खिलाफ डिमोलिशन या सीलिंग की कार्रवाई पहले ही की जा चुकी है, जबकि 42 इमारतें अभी कार्रवाई के लिए बाकी हैं.
सत्य निकेतन हादसे के बाद MCD अब इन बची हुई 42 इमारतों को प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई के दायरे में लाने की तैयारी में है. सर्वे रिपोर्ट को एक बार फिर निगम के आंतरिक विभागों को भेजा गया है, ताकि संबंधित जोन में जरूरी कार्रवाई की जा सके. रिपोर्ट में कई खतरनाक मकानों को खाली कराने और मरम्मत से जुड़ी कार्रवाई का भी उल्लेख किया गया है.
32.55 लाख मकानों का सर्वे, 97 फीसदी से ज्यादा काम पूरा
दिल्ली नगर निगम हर साल मानसून से पहले भवन सुरक्षा को लेकर सर्वे कराता है. इस बार निगम ने राजधानी में 32.55 लाख मकानों के सर्वे का लक्ष्य रखा था. इनमें से 30.74 लाख से अधिक मकानों का सर्वे पूरा हो चुका है. यानी कुल लक्ष्य का 97.12 फीसदी सर्वे पूरा किया जा चुका है. सर्वे के दौरान 377 मकान ऐसे पाए गए जिन्हें मरम्मत की जरूरत थी. इनमें से अब तक 27 मकानों की मरम्मत पूरी की जा चुकी है. वहीं, खतरनाक घोषित किए गए 62 मकानों में 50 मेंटेनेंस कैटेगरी और 12 बिल्डिंग कैटेगरी में रखे गए हैं.
20 खतरनाक इमारतों पर हो चुकी कार्रवाई
MCD की अलग-अलग जोन से मिली जानकारी के आधार पर तैयार रिपोर्ट में बताया गया है कि 62 खतरनाक मकानों में से 20 के खिलाफ सीलिंग/स्टे से जुड़ी कार्रवाई की गई है. इनमें 16 इमारतों पर डिमोलिशन और 4 पर सीलिंग की कार्रवाई पूरी हो चुकी है. अब 42 बची हुई खतरनाक इमारतें निगम की प्राथमिकता सूची में हैं.
सत्य निकेतन में आसपास की इमारतें भी बंद
सत्य निकेतन में जिस इमारत के गिरने की घटना हुई, उसके आसपास मौजूद कुछ इमारतों को भी सुरक्षा के मद्देनजर बंद किया गया है. इन इमारतों में मौजूद लोग अपना जरूरी सामान निकाल रहे हैं. कुछ लोगों ने बताया कि हादसे के बाद डर का माहौल है, इसलिए वे अपने कंप्यूटर और अन्य सामान को दूसरी जगह स्थित दफ्तरों में शिफ्ट कर रहे हैं.
इसी बीच बिजली विभाग के कर्मचारी भी इन इमारतों की बिजली आपूर्ति काटने के लिए मौके पर पहुंचे. एक कर्मचारी ने बताया कि संबंधित इमारत को गिराया जाना है और इसी प्रक्रिया से पहले बिजली कनेक्शन काटने की कार्रवाई की जा रही है. सत्य निकेतन हादसे के बाद खतरनाक इमारतों की यह सर्वे रिपोर्ट एक बार फिर सामने आने से अब निगम की कार्रवाई पर नजर है. 42 इमारतों पर डिमोलिशन या सीलिंग की कार्रवाई कब और किस क्रम में होती है, यह आने वाले दिनों में अहम होगा.



