
संवाददाता
गाजियाबाद। जिला कारागार डासना में इस बार रक्षाबंधन पर्व आत्मनिर्भरता और सुधार की मिसाल के साथ मनाया जाएगा।। इस बार जेल के बंदी खुद अपने हाथों से राखियां तैयार कर रहे हैं। लगभग 30 महिला और पुरुष बंदी आकर्षक हैंडमेड राखियां बनाने में जुटे हैं, जिनमें 11 महिला और 18 पुरुष बंदी शामिल हैं।
जेल अधीक्षक सीताराम शर्मा ने बताया कि बंदियों को रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से यह पहल की गई है। इन राखियों को डासना जिला कारागार के बाहर बनाए गए आउटलेट पर व गाजियाबाद कोर्ट परिसर में भी बिक्री के लिए उपलब्ध कराया जाएगा।
राखियों की बिक्री से प्राप्त पूरी राशि बंदियों के राहत-कल्याण कोष में जमा की जाएगी। इस राशि का उपयोग बंदियों की जरूरतों और कल्याणकारी कार्यों के लिए किया जाएगा, जिससे उनकी मेहनत को प्रोत्साहन मिलेगा और उनमें आत्मनिर्भरता की भावना विकसित होगी।
जेल प्रशासन के अनुसार, रक्षाबंधन से पहले जेल परिसर के बाहर दो अतिरिक्त स्टॉल भी लगाए जाएंगे। इनमें एक स्टॉल विकास भवन में और दूसरा न्यायालय परिसर में स्थापित किया जाएगा। इन स्टॉलों पर भी बंदियों द्वारा तैयार की गई राखियां आम लोगों के लिए उपलब्ध रहेंगी।
जेल प्रशासन का मानना है कि बंदियों द्वारा बनाई गई ये राखियां रक्षाबंधन के त्योहार को सामाजिक सरोकार से जोड़ेंगी। इससे लोगों को हाथ से बनी राखियां खरीदने का अवसर मिलेगा और आय का लाभ बंदियों के कल्याण पर खर्च होगा। जेल में बंद भाइयों को भी रक्षाबंधन पर इन्हीं राखियों के माध्यम से त्योहार मनाने का अवसर मिलेगा, ताकि वे जेल में भी अपनों से जुड़ाव महसूस कर सकें।
जेल अधीक्षक ने कहा कि कारागार का उद्देश्य केवल सजा देना नहीं, बल्कि सुधार और पुनर्वास भी है। इस तरह के रचनात्मक कार्य बंदियों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए सकारात्मक होते हैं और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने में मदद करते हैं।
जेल प्रशासन की इस पहल की अधिकारियों और बंदियों ने सराहना की है।



