
संवाददाता
नई दिल्ली । संसद के मॉनसून सत्र के पहले दिन ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) के प्रस्तावित ‘संसद चलो’ मार्च और विरोध प्रदर्शनों को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस के नवनियुक्त आयुक्त (कमिश्नर) अनुराग कुमार ने स्वयं मोर्चा संभाला। प्रदर्शनकारियों को संसद भवन की ओर बढ़ने से रोकने के लिए उन्होंने संसद मार्ग और जंतर-मंतर इलाके में सुरक्षा व्यवस्था की कमान खुद अपने हाथों में ली। पुलिस चीफ 11 बजे खुद संसद मार्ग थाने पहुंचे और हालात की निगरानी से लेकर रणनीति बनाने का काम अपने हाथों में ले लिया।
बता दें कि 1994 बैच के आईपीएस अधिकारी अनुराग कुमार ने 17 जुलाई 2026 को दिल्ली पुलिस कमिश्नर का ही पदभार ग्रहण किया था। पद संभालते ही उनके सामने संसद के मानसून सत्र के पहले दिन आज यानी 20 जुलाई 2026 को होने वाले विरोध प्रदर्शनों को रोकने की सबसे बड़ी चुनौती थी। हाई-लेवल मीटिंग और मुस्तैदी: पदभार ग्रहण करने के तुरंत बाद पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार ने सभी स्पेशल कमिश्नर, जॉइंट कमिश्नर और डीसीपी स्तर के अधिकारियों के साथ हाई-लेवल समीक्षा बैठक की। उन्होंने कानून-व्यवस्था बनाए रखने और संसद की ओर बढ़ने वाले प्रदर्शनकारियों से कड़ाई से निपटने के स्पष्ट निर्देश दिए।
जंतर-मंतर पर पिछले कई दिनों से कॉकरोच जनता पार्टी का आंदोलन चल रहा था, जिसे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का भी समर्थन प्राप्त था। इन प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर 20 जुलाई को संसद मार्च का ऐलान किया था। संसद कूच से ठीक पहले, पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाकर अस्पताल में भर्ती कराया और जंतर-मंतर के आसपास सुरक्षा घेरा बेहद कड़ा कर दिया।
मार्च को देखते हुए नई दिल्ली जिले में कड़े प्रतिबंध लागू किए गए। पांच या उससे अधिक लोगों के इकट्ठा होने और अनधिकृत जुलूस निकालने पर सख्त पाबंदी लगाई गई। सोमवार सुबह नई दिल्ली को 15 सुरक्षा ज़ोनों में बांटा गया और संसद व अन्य वीवीआईपी क्षेत्रों में 5,000 से अधिक पुलिस और पैरामिलिट्री जवानों को तैनात किया गया।
पुलिस ने अलग -अलग इलाकाें में कई स्तर की बेरीकेटिंग लगाई और सुरक्षा के प्रबंध किए। पुलिस की सबसे बड़ी रणनीति ये थी कि सभी प्रदर्शनकारी एक जगह एकत्र न हो। इसीलिए उन्हें छोटे छोटे ग्रुप्स में विभाजित होने के लिए मजबूर किया गया। इसलिए मामूली बल प्रयोग और आंसू गैस के प्रयोग से ही तितर बितर किया जा सका। कई बार ऐसा भी लगा कि प्रदर्शन अनियंत्रित होकर सुरक्षा बलों के हाथ से निकल गया है लेकिन पुलिस ने हर बार अपने रणनीतिक कौशल से इस पर काबू पा लिया। शाम होते-होते हालात ये बन गए कि प्रदर्शन स्थल जंतर-मंतर से सीजेपी के सभी समर्थक मंच छोड़कर चले गए।
संसद सत्र में सीजेपी के कारण कोई व्यवस्था न हो इसके लिए पुलिस आयुक्त ने इंटेलिजेन्स और गृहमंत्रालय अफसरों के साथ बैठक कर आगामी रणनीति तैयार की। हालाँकि सोनम वांगचुक और सीजेपी रणनीतिकारों ने अनशन और धरना जारी रखने का ऐलान किया है।
इंटेलिजेंस ब्यूरो के पूर्व विशेष निदेशक रह चुके अनुराग कुमार को सुरक्षा मामलों और रणनीतिक ऑपरेशन्स का लंबा अनुभव है। यही वजह है कि उन्होंने खुद ग्राउंड पर उतरकर और पूरी सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी कर संसद कूच की योजना को विफल करने की कमान संभाली।



