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तिहाड़ जेल से हथियारों की तस्करी: ऑपरेशन प्रहार के तहत गाजियाबाद में तीन तस्कर गिरफ्तार

गिरफ्तार किए गए आरोपियों के कब्जे से 7 अदद पिस्टल, 20 अदद कारतूस और एक महिंद्रा थार बरामद की गई है.

संवाददाता

गाजियाबाद । अपराध की दुनिया में अवैध हथियारों का कारोबार किस कदर संगठित हो चुका है, इसका खुलासा गाजियाबाद पुलिस की कार्रवाई में हुआ है. पुलिस ने ऐसे अंतरराष्ट्रीय गिरोह का पर्दाफाश किया है जो 30 से 35 हजार रुपए में अवैध पिस्तौल खरीद कर 50 से 55 हज़ार में बेचता था. पूछताछ में आरोपियों ने कबूल किया है कि पिछले एक साल में करीब 20 अवैध हथियारों की तस्करी कर चुके हैं. चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरे नेटवर्क की डोर दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद कुख्यात अपराधी के हाथों में थी.

गाजियाबाद पुलिस की स्वाट टीम और थाना लोनी पुलिस टीम ने ऑपरेशन प्रहार के तहत तीन हथियार तस्करों को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अरुण कुमार, अजीत राय और अभिषेक शर्मा उर्फ मोटू के रूप में हुई है.

पुलिस के मुताबिक, शामली निवासी ऋतिक के माध्यम से अवैध हथियार गिरोह तक पहुंचते थे. ऋतिक से गिरोह 30 से 35 हजार रुपए में पिस्टल खरीदता था और उसे करीब 55 हज़ार रुपए तक बेचता था. एक हथियार बेचने पर बीस हज़ार रुपए तक का मुनाफा कमाया जाता था. गिरफ्तार किए गए आरोपी पिछले एक साल से अवैध हथियारों की तस्करी कर रहे थे और अब तक 20 अवैध हथियार बाजार में खपा चुके हैं. जांच में सामने आया है कि गिरोह का संपर्क तिहाड़ जेल में बंद कुख्यात अपराधी उमेश शर्मा और उमेश पंडित से था.

अवैध असला तस्कर गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है. जिनके कब्जे से अवैध पिस्तौल, जिंदा कारतूस और एक काली थार गाड़ी बरामद हुई है. गिरोह के सदस्य अवैध असला की सप्लाई करने के लिए जा रहे थे इसी बीच पुलिस द्वारा चेकिंग के दौरान आरोपियों को गिरफ्तार किया है. अन्य फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीम बना दी गई है. गाजियाबाद पुलिस द्वारा ऑपरेशन प्रहार संचालित किया जा रहा है. ऑपरेशन प्रहार के तहत इस वर्ष में अवैध असली के खिलाफ कार्रवाई करते हुए गाजियाबाद पुलिस ने अब तक कुल 100 मुकदमे पंजीकृत किए हैं. – राजकरन नैयर, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त

पुलिस की जांच अब इस बात पर केंद्रित है कि आखिर इन अवैध हथियारों का निर्माण कहां हो रहा था और इन्हें गाजियाबाद तक पहुंचाने का पूरा नेटवर्क कैसे काम करता था. साथ ही पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि पिछले एक साल में करीब 20 अवैध हथियारों की सप्लाई की गई, वह किन लोगों तक पहुंचे. पुलिस इस गिरोह के फरार सप्लायरों, हथियार खरीदने वालों और तिहाड़ जेल में बंद आरोपी से जुड़े पूरे नेटवर्क की कड़िया जोड़ने में लगी है, ताकि अवैध हथियारों की सप्लाई चैन का पूरी तरह से पर्दाफाश किया जा सके.

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