
संवाददाता
नई दिल्ली। पर्यावरण मंत्रालय ने एक साथ एक निजी सचिव और तीन अतिरिक्त निजी सचिवों को हटा दिया है। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के निजी सचिव को प्रशासनिक आधार पर हटाया गया। हालांकि, अधिकारियों को हटाए जाने का कारण नहीं बताया गया है।
जिन निजी सचिव को कार्यमुक्त कर दिया गया वह 2010 बैच के आइआरएस अधिकारी अमर सिंह हैं। मंत्रालय के आदेश के अनुसार, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री के निजी सचिव अमर सिंह को प्रशासनिक कारणों से उनके मूल कैडर यानी राजस्व विभाग में वापस भेजा जा रहा है। उन्हें तत्काल प्रभाव से उनके कर्तव्यों से मुक्त कर दिया गया है।
जिन अतिरिक्त निजी सचिव की नियुक्ति समाप्त कर दी गई है, वह आयुष सरन हैं। एक अन्य आदेश में कहा गया है कि कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग के आधिकारिक ज्ञापन के अनुपालन में और सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी से पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री के अतिरिक्त निजी सचिव के तौर पर आयुष सरन की नियुक्ति तत्काल प्रभाव से समाप्त की जाती है।
सिद्धार्थ यादव सहायक निजी सचिव हैं। इनकी नियुक्ति तुरंत प्रभाव से खत्म कर दी गई है। एक और अतिरिक्त निजी सचिव जिन्हें उनके मूल कैडर में वापस भेज दिया गया है, वे हैं शैलेश कुमार सिंह।
कहा गया है कि पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री के अतिरिक्त निजी सचिव और केंद्रीय सचिवालय सेवा के अधिकारी शैलेश कुमार सिंह को उनके मूल कैडर (यानी कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग) में समय से पहले वापस भेजा जा रहा है।
उन्हें काम से लंबे समय तक अलग रहने (एक्सटेंडेड कूलिंग आफ) की शर्त के साथ तत्काल प्रभाव से उनके कर्तव्यों से मुक्त किया जाता है। आदेश की प्रतियां प्रधानमंत्री कार्यालय, कैबिनेट सचिवालय और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग सहित अन्य को भेजी गईं।
कांग्रेस ने मंगलवार को पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव के कार्यालय से उनके अहम सहयोगियों को हटाए जाने को लेकर सरकार पर निशाना साधा और पूछा कि क्या यह ” चंदा दो, धंधा लो” स्कीम के फेल होने का मामला हो सकता है।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि यादव के स्टाफ के चार सदस्यों को हटाए जाने की खबर चौंकाने वाली है। उन्होंने एक्स पर पूछा, “यह कोई रहस्य नहीं है कि मोदी सरकार के दौरान ऐसी नियुक्तियां कैसे की जाती हैं।
क्या बिना आग के इतना धुआं हो सकता है। कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि जनता को किसी भी गड़बड़ी के बारे में सच्चाई जानने का अधिकार है।



