latest-newsदेश

ग्लोबल एयर पावर्स रैंकिंग: चीन-जापान को पछाड़कर छठी सबसे ताकतवर बनी भारतीय वायुसेना

संवाददाता

नई दिल्ली । पीएम नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में वैश्विक भू-राजनीति और सैन्य संतुलन के पन्नों पर भारतीय वायुसेना का एक नया और गौरवशाली अध्याय जुड़ा है। दुनियाभर के देशों की सैन्य विमानन की क्षमता और युद्धक क्षमता का सटीक विश्लेषण करने वाली संस्था ‘वर्ल्ड डायरेक्टरी ऑफ मॉडर्न मिलिट्री एयरक्राफ्ट'(WDMMA) ने वर्ष 2026 की ‘ग्लोबल एयर पावर्स रैंकिंग’ जारी की है। इस नवीनतम रैंकिंग ने दुनिया को हैरान और भारत को गौरवान्वित किया है। ऑपरेशन सिंदूर में दुश्मन को धूल चटा देने वाली हमारी भारतीय वायुसेना ने इस रैंकिंग में चीन और जापान को भी पीछे छोड़ दिया है। यह केवल एक रैंकिंग या संख्यात्मक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह हिंद-प्रशांत क्षेत्र और पूरी दुनिया के आसमान में भारत के बढ़ते रणनीतिक प्रभुत्व का एक ठोस दस्तावेज है। पीएम मोदी के दूरदर्शी विजन के चलते ही चीन जैसी विशाल अर्थव्यवस्था और विशाल सैन्य बेड़े वाले देश के ऊपर भारत को बढ़त मिली है। यह ऐतिहासिक बढ़त दुनिया भर के सैन्य विश्लेषकों के बीच चर्चा का एक विषय बन गई है।

संख्या बल पर भारी पड़ी युद्धक क्षमता और ‘TruVal’ रेटिंग
ग्लोबल एयर पावर्स रैंकिंग में 103 देशों की 129 रक्षा विमानन इकाइयों और लगभग 48,082 सैन्य विमानों के गहन और कड़े वैज्ञानिक मूल्यांकन के बाद, भारतीय वायुसेना (IAF) दुनिया की छठी सबसे शक्तिशाली वायुसेना के रूप में स्थापित हो चुकी है। इस रैंकिंग की सबसे बड़ी और गौरवपूर्ण बात यह है कि भारतीय वायुसेना ने अपने दोनों प्रमुख क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वियों चीन (7वां स्थान) और जापान (8वां स्थान) को पछाड़ दिया है। WDMMA की यह रैंकिंग किसी भी वायुसेना की ताकत को केवल उसके पास मौजूदा विमानों की कुल संख्या से नहीं मापती। यदि केवल संख्या देखी जाती तो संभवत: चीन का स्थान ऊपर होता। क्योंकि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी एयरफोर्स (PLAAF) के पास विमानों की संख्या अधिक है। लेकिन WDMMA का मूल्यांकन फॉर्मूला विमानों की कुल संख्या के बजाय ‘TruVal (TvR) Rating’ पर आधारित होता है।अभूतपूर्व रणनीतिक छलांग नीले: आसमान पर तिरंगे का प्रभुत्व
यह रेटिंग वायुसेना के बेड़े के आधुनिकीकरण की गति, साजो-सामान (लॉजिस्टिक्स), पायलटों की ट्रेनिंग की गुणवत्ता, विमानों की बहुमुखी उपयोगिता, स्थानीय विमानन उद्योग की क्षमता और युद्ध के वास्तविक अनुभवों को तौलती है। भारतीय वायुसेना ने कुछ माह पहले ही ऑपरेशन सिंदूर में विजयी पताका फहराकर वास्तविक अनुभव लिया है। इन्ही आधुनिक और व्यावहारिक पैमाने पर भारतीय वायुसेना ने 69.4 की ‘TruVal रेटिंग’ हासिल की, जबकि चीन की वायुसेना 63.8 की रेटिंग के साथ पिछड़ गई। भारत के सैन्य बेड़े में फ्रांसीसी राफेल, रूसी सुखोई (Su-30MKI), स्वदेशी तेजस और अमेरिकी अपाचे व चिनूक हेलीकॉप्टरों का एक ऐसा संतुलित और घातक तालमेल है, जो इसे दुनिया की सबसे लचीली और मारक वायु सेनाओं में से एक बनाता है।2013 और 2026 का सफरनामा: ऐसे बड़ी हमारी ताकत
भारत की वायु शक्ति की इस छलांग को ठीक से समझने के लिए हमें करीब एक दशक के पन्नों को पलटना होगा।
• वर्ष 2013 की नीतिगत अपंगता: आज से लगभग एक दशक से ज्यादा समय पहले, यानि वर्ष 2013 में भारतीय वायुसेना नीतिगत अपंगता, विमानों की खरीद में होने वाली अंतहीन देरी और सोवियत काल के पुराने विमानों (जैसे मिग-21 की दुर्घटनाएं) की समस्याओं से जूझ रही थी। उस समय भारत वैश्विक वायु शक्ति की दौड़ में काफी पीछे था और रक्षा विशेषज्ञों के बीच घटती स्क्वाड्रन ताकत को लेकर भारी चिंताएं थीं।
• 2026 की दुनिया में छठी ताकत: इस वर्ष की सूची में अमेरिका की अलग-अलग सैन्य शाखाओं (यूएस एयरफोर्स पहले, यूएस नेवी दूसरे, यूएस आर्मी चौथे और यूएस मरीन कॉर्प्स पांचवें स्थान पर) को अलग-अलग स्वतंत्र ईकाई मानकर शामिल किया गया है। इस अत्यंत जटिल और कड़ी प्रतिस्पर्धा के बावजूद, सभी अमेरिकी सैन्य अंगों और रूसी वायुसेना के ठीक बाद भारत छठे स्थान पर मजबूती से टिका हुआ है। यह निरंतरता साबित करती है कि भारत का उदय कोई तात्कालिक घटना नहीं, बल्कि पीएम मोदी की एक सुनियोजित रणनीतिक यात्रा का परिणाम है।सरकार के इन पांच प्रमुख प्रयासों से चीन-जापान को पीछे छोड़ा
भारतीय वायुसेना की इस अभूतपूर्व कायाकल्प के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की दीर्घकालिक नीतियां, त्वरित निर्णय लेने की राजनीतिक इच्छाशक्ति, रक्षा आधुनिकीकरण और आत्मनिर्भर भारत के प्रति एक ठोस विजन है। सरकार के इन महत्वपूर्ण प्रयासों को हम इन पांच प्रमुख बिंदुओं और तथ्यों के जरिए समझ सकते हैं…

1. पीएम मोदी का आत्मनिर्भर भारत का मंत्र और स्वदेशीकरण
मोदी सरकार ने रक्षा क्षेत्र में विदेशी निर्भरता को कम करने के लिए ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को वायुसेना की रीढ़ बनाया।
• तेजस (LCA Tejas) कार्यक्रम को संजीवनी: दशकों से लटके स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट ‘तेजस’ परियोजना को इस सरकार ने तेजी से आगे बढ़ाया। सरकार ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को 83 तेजस Mk1A विमानों के निर्माण का ऐतिहासिक ऑर्डर दिया। इसके साथ ही, अगली पीढ़ी के AMCA (Advanced Medium Combat Aircraft) और तेजस Mk2 परियोजनाओं को मंजूरी और बजटीय आवंटन देकर भारत को पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट बनाने वाले चुनिंदा देशों की कतार में खड़ा कर दिया है।2. मोदी सरकार की रणनीतिक और त्वरित आपातकालीन खरीद
पुरानी सरकारों के समय रक्षा सौदों में होने वाली अंतहीन फाइलों की देरी को खत्म करते हुए, मोदी सरकार ने त्वरित रणनीतिक फैसले लिए।
• राफेल विमानों का आगमन: फ्रांस के साथ अंतर-सरकारी समझौते (G2A) के तहत 36 राफेल लड़ाकू विमानों WDMMA 2025 Rankings Report की आपातकालीन खरीद वायुसेना के लिए गेम-चेंजर साबित हुई। उल्का (Meteor) और स्कैल्प (SCALP) जैसी मिसाइलों से लैस राफेल ने चीनी जे-20 (J-20) और जे-16 विमानों के मुकाबले भारतीय वायुसेना को आसमान में तकनीकी और रणनीतिक बढ़त (Tactical Edge) दिला दी।

3. भारतीय वायुसेना में सुखोई बेड़े का महा-आधुनिकीकरण
भारतीय वायुसेना के पास 240 से अधिक सुखोई-30 MKI विमान हैं, जो इसकी रीढ़ हैं। मोदी सरकार ने इस बेड़े को पुराना होने से बचाने के लिए ‘सुपर सुखोई’ अपग्रेड कार्यक्रम शुरू किया। इसके तहत इन विमानों में स्वदेशी ‘उत्तम’ एईएसए (AESA) राडार, उन्नत इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट और सबसे महत्वपूर्ण, ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल को एकीकृत किया गया। ब्रह्मोस से लैस सुखोई अब सैकड़ों किलोमीटर दूर बैठे दुश्मन के ठिकानों को पलक झपकते ही नष्ट करने की क्षमता रखता है, जो चीन या जापान के पास मौजूद किसी भी समकक्ष सुखोई वेरिएंट से कहीं अधिक घातक है।

4. 3D युद्धक क्षमता: हेलीकॉप्टर और ट्रांसपोर्ट बेड़ा
वायुसेना केवल लड़ाकू विमानों से नहीं जीती जाती। मोदी सरकार ने वायुसेना की लॉजिस्टिक्स और परिवहन क्षमता को वैश्विक स्तर पर पहुंचाने के लिए अमेरिका से चिनूक (Chinook) हैवी-लिफ्ट हेलीकॉप्टर और अपाचे (Apache) अटैक हेलीकॉप्टर खरीदे। इसके अलावा, स्वदेशी ‘प्रचंड’ (LCH) और ‘रुद्र’ हेलीकॉप्टरों को शामिल किया गया। सियाचिन और लद्दाख जैसे अत्यधिक ऊंचाई वाले मोर्चों पर सैनिकों और भारी हथियारों को चंद घंटों में तैनात करने की जो क्षमता भारत ने हासिल की है, वह चीनी सेना की कठोर और केवल मैदानी इलाकों के लिए प्रशिक्षित वायुसेना के पास नहीं है।

5. वैश्विक युद्धाभ्यास: भारतीय वायुसेना का नया वैश्विक युग
WDMMA ने भारत के पायलटों के कड़े प्रशिक्षण और उनके वैश्विक अनुभवों को बहुत अधिक अंक दिए हैं। मोदी सरकार की विदेश नीति के तहत भारतीय वायुसेना ने अमेरिकी वायुसेना के साथ ‘कोप इंडिया’, फ्रांस के साथ ‘गरुड़’, और ऑस्ट्रेलिया की वायुसेना के साथ ‘पिच ब्लैक’ जैसे बेहद कठिन अंतर्राष्ट्रीय युद्धाभ्यासों में हिस्सा लिया। इसके विपरीत, चीनी वायुसेना (PLAAF) का अनुभव काफी हद तक बंद दरवाजों के पीछे का है और उनके पास युद्ध का वास्तविक अनुभव या बहुपक्षीय लोकतांत्रिक वायुसेनाओं के साथ काम करने का एक्स्पोजर न के बराबर है।

भारत की बढ़ती वायु शक्ति के रणनीतिक और कूटनीतिक लाभ
दुनिया में छठे स्थान पर आने और चीन-जापान को पीछे छोड़ने का यह गौरव केवल कागजी नहीं है, बल्कि इसके भारत के लिए दूरगामी सामरिक और आर्थिक फायदे होने वाले हैं:
• दो मोर्चों पर युद्ध का डर खत्म: भारत लंबे समय से चीन और पाकिस्तान के गठजोड़ से उत्पन्न होने वाले ‘टू-फ्रंट वॉर’ के खतरे पर है। लेकिन इस रैंकिंग और भारतीय वायुसेना की वास्तविक मारक क्षमता ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत का हवाई रक्षा कवच दोनों दुश्मनों को एक साथ धूल चटाने के लिए पूरी तरह सक्षम है। पाकिस्तान का इस सूची में 18वें स्थान पर होना और चीन का भारत से पीछे होना हमारी वायु शक्ति की श्रेष्ठता को दर्शाता है।
• हिंद-प्रशांत क्षेत्र में ‘नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर’ की भूमिका: हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की विस्तारवादी नीति से परेशान छोटे देशों (जैसे वियतनाम, फिलीपींस) के लिए भारत अब एक मजबूत और विश्वसनीय सुरक्षा कवच के रूप में उभर सकता है। भारत की मजबूत वायुसेना इस पूरे क्षेत्र में शक्ति संतुलन बनाए रखने का काम करेगी।
• वैश्विक रक्षा निर्यात को बढ़ावा: तेजस, प्रचंड हेलीकॉप्टर और स्वदेशी मिसाइल प्रणालियों की इस वैश्विक सफलता से दुनिया भर में ‘मेड इन इंडिया’ हथियारों की साख बढ़ी है। कई दक्षिण-पूर्वी एशियाई और अफ्रीकी देश अब भारत से रक्षा उपकरण खरीदने में रुचि दिखा रहे हैं, जिससे भारत आने वाले समय में एक बड़ा रक्षा निर्यातक हब बनकर उभरेगा।

चीन पर मनोवैज्ञानिक बढ़त और हमारी रणनीतिक ‘उड़ान’
WDMMA की 2026 की यह रैंकिंग इस बात का जीवंत प्रमाण है कि जब देश का नेतृत्व स्पष्ट विजन, त्वरित निर्णय लेने की क्षमता और स्वदेशी प्रतिभाओं पर भरोसा करता है, तो सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित होते हैं। भारतीय वायुसेना का छठा स्थान और चीन पर उसकी मनोवैज्ञानिक व रणनीतिक बढ़त नए भारत की उस ‘उड़ान’ को दर्शाती है। अब इसको रोकना किसी भी वैश्विक महाशक्ति के लिए मुमकिन नहीं है। यह आकाश को गौरव के साथ छूना के आदर्श वाक्य को चरितार्थ करने का स्वर्णिम काल है। वैश्विक रक्षा बाजार में भारत का बढ़ता दबदबा हर देशवासी का सीना गर्व से चौड़ा कर देने वाला है।

ऑपरेशन सिंदूर की नायक ब्रह्मोस अब इंडोनेशिया सेना में शामिल
‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तानी सैन्य और आतंकी ठिकानों की धज्जियां उड़ाकर दुनिया भर में अपनी अचूक मारक क्षमता का लोहा मनवाने वाली ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल को अब दक्षिण-पूर्व एशिया का सबसे बड़ा मुस्लिम देश इंडोनेशिया खरीदने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया ऐतिहासिक इंडोनेशिया यात्रा के दौरान जकार्ता के मरडेका पैलेस में इंडोनेशियाई राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ द्विपक्षीय वार्ता के बाद इस ऐतिहासिक रक्षा सौदे पर अंतिम मुहर लगा दी गई है। युद्ध के मैदान में पूरी तरह से खुद को साबित कर चुकी इस मिसाइल की मारक रफ्तार और अचूक सटीकता ने इंडोनेशियाई रक्षा मंत्रालय को बेहद प्रभावित किया, जिसके चलते उन्होंने अपनी तटीय सुरक्षा और सैन्य शक्ति को मजबूत करने के लिए भारत के साथ इस बड़े डिफेंस एग्रीमेंट को अंतिम रूप दिया है।फिलीपींस और वियतनाम के बाद इंडोनेशिया का ब्रह्मोस पर भरोसा
यह रक्षा समझौता न केवल भारत की ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ नीतियों की एक बहुत बड़ी कूटनीतिक जीत है, बल्कि यह हिंद-प्रशांत क्षेत्र के रणनीतिक समीकरणों को भी पूरी तरह बदलने की ताकत रखता है। प्रधानमंत्री मोदी के इस दौरे में ब्रह्मोस एयरोस्पेस और इंडोनेशिया के बीच हुआ यह सौदा भारत को एक शुद्ध हथियार आयातक देश की छवि से बाहर निकालकर एक मजबूत वैश्विक रक्षा निर्यातक के रूप में स्थापित करने वाला है। फिलीपींस और वियतनाम के बाद इंडोनेशिया द्वारा ब्रह्मोस को अपनाना साफ दर्शाता है कि दक्षिण-पूर्वी एशियाई देश अपनी संप्रभुता की रक्षा और दक्षिण चीन सागर में चीन के बढ़ते विस्तारवाद को रोकने के लिए अब पूरी तरह से भारत की सैन्य तकनीक और अजेय ‘ब्रह्मोस’ पर भरोसा कर रहे हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com