
संवाददाता
काेलकाता । पश्चिम बंगाल में तृणमूल कॉन्ग्रेस के भीतर चल रही सियासी जंग अब पार्टी दफ्तर तक पहुँच गई है और ममता बनर्जी के हाथ एक और निराशा लगी है। शुक्रवार (3 जुलाई 2026) को ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट ने कोलकाता के मेट्रोपॉलिटन ईएम बाईपास स्थित तृणमूल कॉन्ग्रेस मुख्यालय पर अपना दावा ठोक दिया। गुट के नेता दफ्तर पहुँचे, बैठक की, नए पोस्टर लगाए और फिर कार्यालय को ताला लगाकर चाबी अपने साथ ले गए।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ऋतब्रत बनर्जी के साथ फिरहाद हकीम, संदीपन साहा, जावेद खान, अख्रुज्जमां और कई अन्य नेता पार्टी कार्यालय पहुँचे थे। दफ्तर के बाहर नया पोस्टर लगाया गया, जिसमें ममता बनर्जी और अरूप रॉय की तस्वीर थी। इस गुट का दावा है कि 22 जून को हुई विशेष बैठक में ममता बनर्जी को अध्यक्ष पद से हटाकर अरूप रॉय को नया अध्यक्ष चुना गया है। गुट ममता बनर्जी को अब पार्टी की सलाहकार बता रहा है।
जब पत्रकारों ने ताला लगा रहे व्यक्ति से पूछा कि वह किसके लिए ताला लगा रहा है, तो उसने दरवाजे पर लगे नए पोस्टर की ओर इशारा करते हुए कहा कि जो जानना है, वह वहीं लिखा है। दिलचस्प बात यह रही कि गुट ने कार्यालय के भीतर लगी ममता बनर्जी की तस्वीरों और कटआउट्स को नहीं हटाया।
यह कदम गुरुवार को चुनाव आयोग से मुलाकात के ठीक बाद उठाया गया। ऋतब्रत गुट ने दावा किया है कि पार्टी के संगठनात्मक बदलावों से जुड़े सभी दस्तावेज आयोग को सौंप दिए गए हैं। उनका कहना है कि विशेष सत्र में नई राष्ट्रीय कार्यसमिति भी बनाई गई है।
ममता समर्थक नेता कुनाल घोष जब दफ्तर पहुँचे तो गेट पर ताला लगा होने के कारण अंदर नहीं जा सके। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कब्जा राज्य प्रशासन और पुलिस की सहमति से हुआ है।
बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कॉन्ग्रेस में बगावत खुलकर सामने आई थी। पार्टी के 80 विधायकों में से 58 विधायक ममता नेतृत्व से अलग होकर ऋतब्रत बनर्जी के साथ चले गए। अब ममता बनर्जी के पास 22 विधायक, 8 लोकसभा सांसद और 9 राज्यसभा सांसद बचे हैं।



