
संवाददाता
कोलकाता । बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद टीएमसी ताश के पत्तों की तरह बिखरती जा रही है. सूत्रों के मुताबिक, ममता बनर्जी की बेहद करीबी और टीएमसी की फायरब्रांड चेहरा सयानी घोष के भी बागी होने की खबर है. बागी गुट में कुल 19 लोकसभा सांसद शामिल हैं. इनमें सयानी घोष और सुदीप बंदोपाध्याय का भी नाम शामिल हैं. इसके अलावा दो राज्यसभा सांसदों (सुखेंदु शेखर राय और सुष्मिता देव) ने भी इस्तीफा दे दिया है. सयानी घोष बंगाल के जादवपुर लोकसभा क्षेत्र से टीएमसी की सांसद हैं.
ममता की बागी ब्रिगेड में सयानी घोष का नाम सबसे चौकाने वाला है. ममता बनर्जी की सिपहसालार सयानी घोष का भी ह्रद

य परिवर्तन हो चुका है. ये वो सयानी घोष हैं जो ममता बनर्जी की सियासी प्रयोगशाला से निकली हैं. ममता ने अपनी प्रयोगशाला में संघर्ष और आक्रामकता का जो मॉडल गढ़ा था, उसमें सयानी घोष सबसे फिट थीं. बीजेपी पर उनके कटाक्ष टीएमसी समर्थकों को खूब लुभाते थे. उनके तीखे वार कार्यकर्ताओं में जोश भरते थे. हालांकि, विधानसभा चुनाव में हार के बाद अब बहुत कुछ बदल चुका है. अब घोष भी हवा का रुख भांप चुकी हैं और काफी सयानी हो गई हैं. वो टीएमसी के उन बागी सांसदों में शामिल हैं, जिन्होंने स्पीकर को लेटर लिखकर अलग बैठने और एनडीए को समर्थन करने का ऐलान किया है.
तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को हस्ताक्षर किया पत्र सौंप दिया है. बताया जा रहा है कि सौंपे गए पत्र पर 19 सांसदों के हस्ताक्षर होने का दावा किया गया है. यह खेमा काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में एनडीए को समर्थन देने की बात कर रहा है. सयानी घोष और शत्रुघ्न सिन्हा भी इस गुट में शामिल बताए जा रहे हैं. इसके अलावा यूसुफ पठान भी इस गुट में शामिल हैं. अब टीएमसी के पास सिर्फ 9 सांसद बचे हैं, जो उनके साथ बने रहने का दावा कर रहे हैं.

टीएमसी के बागी सांसदों में काकोली से लेकर यूसुफ और शत्रुघ्न सिन्हा से लेकर सयाेनी तक शामिल
टीएमसी के बागी 19 सांसदों में काकोली घोष दस्तिदार (बारासात), जगदीश चंद्र बसुनिया (कूचबिहार), खलीलुर रहमान (जंगीपुर), यूसुफ पठान (बहरामपुर), अबू ताहेर खान (मुर्शिदाबाद), पार्थ भौमिक (बैरकपुर), बापी हलदार (मथुरापुर), सायोनी घोष (जादवपुर)] माला रॉय (कोलकाता दक्षिण), मिताली बाग (आरामबाग), दीपक अधिकारी (देव) (घाटाल), कालीपद सोरेन (झाड़ग्राम), जून मालिया (मेदिनीपुर), अरूप चक्रवर्ती (बांकुरा), डॉ. शर्मिला सरकार (बर्धमान पूर्व), शत्रुघ्न सिन्हा (आसनसोल), असित कुमार माल (बोलपुर), शताब्दी रॉय (बीरभूम) और हुगली से सांसद रचना बनर्जी शामिल हैं.
ममता के साथ कितने सांसद बचे?
टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी के साथ अब सिर्फ 8 सांसद हैं. जिनमें अभिषेक बनर्जी, महुआ मोइत्रा, कीर्ति आजाद, सौगत रॉय, कल्याण बनर्जी शामिल हैं. सूत्रों के मुताबिक, ममता बनर्जी अपने बचे हुए सांसदों के संपर्क में हैं और आगे की रणनीति तैयार कर रही है. इस बीच ममता ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी से मुलाकात की. जबकि अभिषेक बनर्जी भी राहुल गांधी से मिले.
सबसे बुरे दाैर से गुजर रही ममता बनर्जी की टीएमसी

बंगाल में 15 साल की सत्ता गंवाने के बाद ममता बनर्जी इस समय सबसे कठिन या फिर यूं कहें कि सबसे बुरे दौर से गुजर रही हैं. उनके सामने पार्टी और संगठन दोनों के बचाने की चुनौती है. पार्टी में बगावत के बाद जो कभी उनके (ममता के) अपने थे, वो भी अब उनका साथ छोड़ रहे हैं. विरोधी सुरों ने ममता को बिल्कुल अकेला छोड़ दिया है. स्थिति पार्टी के अस्तित्व पर संकट जैसी हो गई है.
तृणमूल कांग्रेस में बगावत का दौर ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा के निष्कासन के बाद से चला. पार्टी विरोध गतिविधियों के चलते ममता ने इन दोनों नेताओं को पार्टी से बाहर कर दिया. इसके बाद ऋतब्रत बनर्जी बागी होकर अपने साथ 58 विधायक ले गए और विपक्ष के नेता बन गए. हालांकि, ये सभी विधायक टीएमसी में ही हैं. इसके बाद बारी आई सांसदों की.
बीते दिनों टीएमसी की वरिष्ठ सांसद काकोली घोष की अगुवाई में तृणमूल के कई सासंदों ने भूपेंद्र यादव के घर पर बैठक की थी. इस दौरान बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी मौजूद थे. इसके बाद उन्होंने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को एक पत्र दिया. इसमें 20 सांसदों के सिग्नेचर थे. काकोली ने अलग गुट बनाने का दावा किया. बता दें कि लोकसभा में तृणमूल के कुल 28 सांसद हैं.
सोमवार यानी 8 जून को टीएमसी के राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर राय ने इस्तीफा दे दिया. ये इस्तीफा उस वक्त हुआ, जब टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी दिल्ली में थीं. इंडिया गठबंधन की बैठक में हिस्सा ले रही थीं. उन्होंने इस्तीफे की एक कॉपी ममता को भी भेजी थी. यह ममता के लिए दिल्ली में एक बड़ा झटका था. इसके दो दिन बाद बुधवार 10 जून को राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने भी टीएमसी छोड़ दी. सुष्मिता 2021 में तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुई थीं. इससे पहले वह कांग्रेस में थीं. इस्तीफा देने के बाद उन्होंने असम के सीएम हिमंता बिस्व सरमा से मुलाकात की. इन दोनों सासंदों का इस्तीफा यह दिखाता है कि ममता की टीएमसी लगातार कमजोर होती जा रही है.



